तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं परिभाषा, कार्य और प्रकार | Tantrika Tantra Kise Kahate Hain

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नमस्कार दोस्तों, Allhindi के इस नए लेख में आप सभी का स्वागत हैं। आज की इस लेख में आप जानेंगे की तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं [ Tantrika Tantra Kise Kahate Hain ] , प्रकार और इसके कार्य को जानेंगे। यदि आप तंत्रिका तंत्र के बारे में पूरी जानकारी चाहिए तो इस लेख को अंत तक पढ़ते रहिये।

तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं [ Tantrika Tantra Kise Kahate Hain ]

तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं परिभाषा, कार्य और प्रकार  | tantrika Tantra Kise Kahate Hain

तन्त्रिका तन्त्र की परिभाषा: शरीर की प्रत्येक प्रतिक्रिया में भाग लेने वाले विविध ऊतकों तथा अंगों की क्रियाओं के समन्वयन हेतु केवल जन्तुओं में एक विशेष तन्त्र पाया जाता है, जिसे तन्त्रिका तन्त्र कहते हैं। यह वातावरणीय परिवर्तनों को संवेदी सूचनाओं के रूप में ग्रहण करके उसे तन्त्रिकीय प्रेरणाओं अथवा आवेगों (Impulses) के रूप में प्रसारित कर प्रतिक्रियाओं (Quick reactions) का संचालन करता है।

यह भ्रूण के बाह्य जनन स्तर (Ectoderm) से बनता हैं| तन्त्र के मुख्य घटक अथवा मुख्य कोशिका को तन्त्रिका कोशिका या न्यूरॉन (Nerve cells or neuron) कहते हैं। यह तन्त्रिका तन्त्र की संरचनात्मक (Structural) एवं क्रियात्मक (Fufictional) इकाई होती है।

तन्त्रिका तन्त्र के कार्य [tantrika tantra ke kary]

  1. यह मानव शरीर में एच्छिक व अनैच्छिक क्रियाओं को नियन्त्रित करता हैं|
  2. यह बाह्य वातावरण से संवेदांगों (जैसे नाक, कान, जिह्वा, आदि) द्वारा सूचनाओं को इकट्ठा करता है, उदाहरण-स्वादांग से स्वाद का पता चलता है, जबकि घ्राण (Olfactory) अंग से गन्ध का पता चलता है।
  3. तन्त्रिका तन्त्र हमें सोचने, तर्क करने में सहायता करता है।
  4. यह मानव शरीर में प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियन्त्रण करता है।

तन्त्रिका तन्त्र के प्रकार [Tantrika Tantra Ke Prakaar]

मनुष्य में तन्त्रिका तन्त्र को निम्नलिखित तीन भागों में विभक्त किया जाता है।

केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं[Kendriya Tantrika Tantra Kise Kahate Hain]

इस तन्त्रिका तन्त्र का प्रमुख भाग मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु है, जो शरीर के समस्य प्रतिक्रियाओं का नियमन करते हैं। इनकी उत्पत्ति भ्रूण (गैस्टूला अवस्था के बाद) के विकास के समय बनने वाली तन्त्रिकीय नाल से होती है।

(i) मानव मस्तिष्क Brain मस्तिष्क अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं कोमल अंग होता है। यह खोपड़ी के मस्तिष्क कोष (Cranium) में सुरक्षित रहता है। मानव मस्तिष्क का भार लगभग 1300-1400 ग्राम होता है, जबकि नवजात शिशु में इसका भार 370-400 ग्राम तक होता है। मनुष्य में इसका आयतन 1200-1500cc होता है।

यह चारों ओर से तिहरी झिल्ली से घिरा होता है। प्रमस्तिष्क अग्र मस्तिष्क हाइपोथैलेमस पीयूष ग्रन्थि पोन्स पश्च मस्तिष्क मेड्यूला m कपाल खोपड़ी मेरुरज्जु अनुमस्तिष्क चित्र 10.3 मानव मस्तिष्क का पाश्र्व दृश्य खोपड़ी मृदुतानिका मध्य मस्तिष्क एरेक्नॉइड पदार्थ बाहरी झिल्ली को दृढ़तानिका (Duramater) , मध्य झिल्ली को जालतानिका (Arachnoid) तथा भीतरी झिल्ली को मृदुतानिका (Piamater) कहते हैं। मृदुतानिका में रुधिर केशिकाओं का एक सघन जाल होता है, इन्हीं के द्वारा मस्तिष्क को भोजन तथा O, मिलती है।

मृदुतानिका एवं जालतानिका के मध्य तथा मस्तिष्क की गुहा (Ventricle) में एक रंगहीन, स्वच्छ तरल पदार्थ प्रमस्तिष्क मेरुद्रव्य (Cerebrospinal fluid) भरा रहता भाग होते हैं है, जो मस्तिष्क की बाह्य आघातों से सुरक्षा करता है।

परिधीय तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं [Paridheey Tantrika Tantra Kise Kahate Hain]

केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र को शरीर के विभिन्न संवेदी भागों से जोड़ने वाली धागेनुमा तन्त्रिकाएँ, परिधीय तन्त्रिका तन्त्र बनाती है। प्रत्येक तन्त्रिका अनेक तन्त्रिका तन्तुओं का गुच्छा होती है। अधिकांश तन्त्रिका तन्तु ऐच्छिक (Voluntary) प्रतिक्रियाओं से सम्बन्धित होते हैं।

ये तन्त्रिकाएँ दो प्रकार अर्थात् मस्तिष्क से सम्बन्धित कपालीय तन्त्रिकाएँ (Cranial nerves) तथा मेरुरज्जु से सम्बन्धित मेरु अथवा सुषुम्नीय तन्त्रिकाएँ (Spinal nerves) होती हैं। मानव में कपालीय तन्त्रिकाएँ 12 जोड़ी तथा सुषुम्नीय तन्त्रिकाएँ 31 जोड़ी होती हैं। इनमें से कुछ तन्त्रिकाएँ संवेदी, कुछ चालक तथा कुछ मिश्रित स्वभाव की होती है।

स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं [Swayat Tantrika Tantra Kise Kahate Hain]

स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र की परिभाषा: यह वास्तव में परिधीय तन्त्रिका तन्त्र का ही भाग होता है, जो आन्तरांगों (Viceral organs) की क्रियाओं का नियन्त्रण व नियमन करता है, परन्तु परिधीय तन्त्रिकाओं के विपरीत यह भाग तुलनात्मक रूप में स्वतन्त्र होता है। इसमें अन्तरांगों का दोहरा परस्पर विरोधात्मक (Antagonistic) नियन्त्रण होता है।

इससे सम्बंधित लेख: संघनन किसे कहते है | Sanghnan kise kahate hain

प्रश्न: तन्त्रिका तन्त्र के क्या कार्य हैं ?

उत्तर: यह मानव शरीर में एच्छिक व अनैच्छिक क्रियाओं को नियन्त्रित करता हैं।
यह बाह्य वातावरण से संवेदांगों (जैसे नाक, कान, जिह्वा, आदि) द्वारा सूचनाओं को इकट्ठा करता है, उदाहरण-स्वादांग से स्वाद का पता चलता है, जबकि घ्राण (Olfactory) अंग से गन्ध का पता चलता है।
तन्त्रिका तन्त्र हमें सोचने, तर्क करने में सहायता करता है।
यह मानव शरीर में प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियन्त्रण करता है।

प्रश्न: स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र किसे कहते हैं ?

उत्तर: यह वास्तव में परिधीय तन्त्रिका तन्त्र का ही भाग होता है, जो आन्तरांगों (Viceral organs) की क्रियाओं का नियन्त्रण व नियमन करता है, परन्तु परिधीय तन्त्रिकाओं के विपरीत यह भाग तुलनात्मक रूप में स्वतन्त्र होता है। इसमें अन्तरांगों का दोहरा परस्पर विरोधात्मक (Antagonistic) नियन्त्रण होता है।

प्रश्न: मानव मस्तिष्क का भार कितना होता हैं ?

उत्तर: मानव मस्तिष्क का भार लगभग 1300-1400 ग्राम होता है

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