सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं | सॉफ्टवेयर के प्रकार

प्रिय पाठक! allhindi.co. in पर आप सभी का स्वागत है। उम्मीद करता हूँ की आप सभी लोग अच्छे होंगे और प्रतिदिन कुछ नया सीख रहे होंगे। आज की इस लेख में आप यह जानेंगे की सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं , सॉफ्टवेयर के प्रकार, गुण और भी बहुत कुछ। इस लेख को पढने के बाद आपको सॉफ्टवेयर से जुडी हर जानकारी प्राप्त हो जाएगी।

सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं ?

सॉफ्टवेयर (Software): कम्प्यूटर मूलत: एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो स्वयं कुछ नहीं कर सकता इसलिए इसे कुछ करने के लिए बाध्य किया जाता है। इसके लिए इसे उचित आदेश दिए जाते हैं। यदि ये आदेश न दिए जाएँ, तो कम्प्यूटर की कोई उपयोगिता नहीं होती, चाहे वह कितनी ही उच्च कोटि का क्यों न हो।

यह उसी तरह है, जैसे कोई अच्छा बजने वाला हारमोनियम या पियानो तब तक बेकार ही रहता है, जब तक हमारा दिमाग, हमारी अँगुलियों को उसे बजाने का आदेश न दे। इसी प्रकार यह सॉफ्टवेयर ही है, जो कम्प्यूटर में जान डालकर उससे सभी कार्य करा लेता है।

सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं

सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्यूटर बिना आत्मा के शरीर या बिना बिजली के टेलीवीज़न जैसा ही है। कम्प्यूटर हार्डवेयर से कोई भी कार्य कराने के लिए हमें आदेश (Commands) देने पड़ते हैं। कम्प्यूटर के क्षेत्र में आदेशों के समूह को प्रोग्राम कहा जाता है और प्रोग्रामों के समूह को ‘सॉफ्टवेयर’ कहा जाता है।इस प्रकार सॉफ्टवेयर उन प्रोग्रामों, प्रक्रियाओं और आदेशों के समूह का नाम है, जो कम्प्यूटर हार्डवेयर को चलाते हैं और उनसे विभिन्न कार्य कराते हैं। 

सॉफ्टवेयर के प्रकार (Types of Software) 

सॉफ्टवेयर को वर्गों या श्रेणियों में बाँटने का कोई सर्वमान्य तरीका नहीं है, फिर भी सॉफ्टवेयर मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
  2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
  3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software):

सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software): जो प्रोग्राम कम्प्यूटर को चलाने, उसको नियन्त्रित करने, उसके विभिन्न भागों की देखभाल करने तथा उसकी सभी क्षमताओं का अच्छे से अच्छा उपयोग करने के लिए लिखे जाते हैं, उनको सम्मिलित रूप से ‘सिस्टम सॉफ्टवेयर’ कहा जाता है। सामान्यतया सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर के निर्माता द्वारा ही उपलब्ध कराया जाता है। वैसे ये बाद में बाज़ार से भी खरीदे जा सकते हैं। कम्प्यूटर से हमारा सम्पर्क या संवाद सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही हो पाता है।

दूसरे शब्दों में, कम्प्यूटर हमेशा सिस्टम सॉफ्टवेयर के नियन्त्रण में अथवा उससे चारों ओर से घिरा हुआ रहता है, जिससे हम सीधे कम्प्यूटर से अपना सम्पर्क नहीं बना सकते। वास्तव में हमें उसकी आवश्यकता भी नहीं क्योंकि सिस्टम सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता की सुविधा के लिए ही बनाया जाता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर से हमें बहुत सुविधा हो जाती है, क्योंकि यह कम्प्यूटर को अपने नियन्त्रण में लेकर हमारे द्वारा बताए गए कार्यों को कराने तथा प्रोग्रामों का सही-सही पालन कराने का दायित्व अपने ऊपर ले लेता है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकार

  1. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
  2. भाषा अनुवादक (Language Translator)
  3. कम्पाइलर (Compiler)
  4. इण्टरप्रेटर (Interpreter)

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)

यह कुछ विशेष प्रोग्रामों का ऐसा व्यवस्थित समूह है, जो किसी कम्प्यूटर के सम्पूर्ण क्रियाकलाप को नियन्त्रित करता है। यह कम्प्यूटर के साधनों के उपयोग पर नजर रखने और उन्हें व्यवस्थित करने में यूज़र की सहायता करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम विशेष सेवाएँ देने वाले प्रोग्रामों का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है और उपयोगकर्ताओं की इच्छा के अनुसार आउटपुट निकालने के लिए डेटा का प्रबन्ध करता है। वास्तव में, यह उपयोगकर्ता और कम्प्यूटर के हार्डवेयर के बीच इण्टरफेस (Interface) का कार्य करता है।

भाषा अनुवादक (Language Translator)

ये ऐसे प्रोग्राम हैं, जो विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे गए प्रोग्रामों का अनुवाद कम्प्यूटर की मशीनी भाषा (Machine Language) में करते हैं। प्रोग्रामों का अनुवाद कराना इसलिए आवश्यक होता है कि कम्प्यूटर केवल अपनी मशीनी भाषा में लिखे हुए प्रोग्राम का ही पालन कर सकता है।

भाषा अनुवादकों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है

असेम्बलर (Assembler) यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो असेम्बली भाषा (Assembly Language) में लिखे गए प्रोग्राम को पढ़ता है और उसका अनुवाद मशीनी भाषा में कर देता है। असेम्बली भाषा में लिखे प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम (Source Program) कहा जाता है। और मशीनी भाषा में अनुवाद करने के बाद जो प्रोग्राम प्राप्त होता है, उसे ऑब्जेक्ट प्रोग्राम (Object Program) कहा जाता है। 

कम्पाइलर (Compiler) यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High Level Programming Language) में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है। कम्पाइलर सोर्स प्रोग्राम के प्रत्येक कथन या निर्देश का अनुवाद करके उसे एक या अधिक मशीनी के निर्देशों में बदल देता है। प्रत्येक उच्चस्तरीय भाषा के लिए एक अलग कम्पाइलर की आवश्यकता होती है। 

इण्टरप्रेटर (Interpreter) यह भी किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है परन्तु यह एक बार में सोर्स प्रोग्राम के केवल एक कथन को मशीनी भाषा में अनुवादित करता है और उसका पालन कराता है। इनका पालन हो जाने के बाद ही वह सोर्स प्रोग्राम के अगले कथन का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है। मूलतः कम्पाइलर और इण्टरप्रेटर का कार्य समान होता है, अन्तर केवल यह है कि कम्पाइलर जहाँ ऑब्जेक्ट प्रोग्राम बनाता है, वहीं इण्टरप्रेटर कुछ नहीं बनाता इसलिए इण्टरप्रेटर का उपयोग करते समय हर बार सोर्स प्रोग्राम की आवश्यकता पड़ती है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software): यह उन प्रोग्रामों का समूह होता है, जो हमारा वास्तविक कार्य कराने के लिए लिखे जाते हैं; जैसे-कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन की गणना करना, सभी लेन-देन व खातों का हिसाब-किताब रखना, विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट छापना, स्टॉक की स्थिति का विवरण देना, पत्र डॉक्युमेण्ट तैयार करना आदि। कम्प्यूटर वास्तव में इन कार्यों के लिए ही प्रयोग में लाए जाते हैं। ये काम प्रत्येक कम्पनी या उपयोगकर्ता के लिए अलग-अलग प्रकार के होते हैं इसलिए हमारी आवश्यकता के अनुसार इनके लिए प्रोग्राम हमारे द्वारा नियुक्त प्रोग्रामर द्वारा लिखे जाते हैं।

हालाँकि ऐसे प्रोग्राम सामान्य तौर पर सबके लिए एक जैसे लिखे हुए भी आते हैं, जिन्हें रेडीमेड सॉफ्टवेयर (Readymade Software) या पैकेज (Package) कहा जाता है; जैसे-एमएस वर्ड (MS-Word) , एमएस-एक्सेल (MS-Excel) , टैली (Tally) , कोरल ड्रॉ (Coral Draw) , पेजमेकर (Page Maker) , फोटोशॉप (Photoshop) आदि। इन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर्स को डिज़ाइन करने वाले प्रोग्रामर को एप्लीकेशन प्रोग्रामर (Application Programmer) कहा जाता है। ये सभी प्रोग्राम प्रायः उच्चस्तरीय भाषा (High Level Language) में लिखे जाते हैं। इन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयरों का प्रयोग करने वाले यूज़र एप्लीकेशन प्रयोगकर्ता कहलाते हैं। 

सामान्यतः एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं 

सामान्य उद्देश्य के एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

प्रोग्रामों का वह समूह, जिन्हें यूज़र अपनी आवश्यकतानुसार अपने सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग करते हैं, सामान्य उद्देश्य के सॉफ्टवेयर कहलाते हैं; जैसे-ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software) , जिसके प्रयोग द्वारा यूज़र निर्मित डेटा का चित्रपूर्ण ग्राफिक्स का प्रस्तुतिकरण करता है। ये सॉफ्टवेयर विशेष कार्यों से सम्बन्धित होते हैं परन्तु इनका उद्देश्य केवल सामान्य कार्य करने के लिए होता है।

जिस कारण ये सॉफ्टवेयर लगभग हर क्षेत्र, हर संस्था तथा हर कार्यालय में दैनिक रूप से उपयोग में लाए जाते हैं। सामान्य उद्देश्य के सॉफ्टवेयर का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग निम्नवत् है कम्प्यूटर आधारित डिज़ाइन (Computer Aided Design) । सूचना संचार (Information Communication) डेटाबेस प्रबन्धन प्रणाली (Database Management System) क ग्राफिक्स प्रयोग (Graphics Application) • शब्द संसाधन (Word Processing) typ शैक्षिक प्रयोग (Educational Application) व्यापारिक प्रयोग (Business Application) 

 (ii) विशिष्ट उद्देश्य के एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

प्रोग्रामों का वह समूह, जो एक विशेष प्रकार के कार्य को निष्पादित करने के लिए प्रयोग किया जाता है, विशिष्ट उद्देश्य के सॉफ्टवेयर कहलाते हैं; जैसे-होटल प्रबन्ध सम्बन्धी सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग होटलों में ग्राहकों की सूचना, बुकिंग विवरण, बिलिंग विवरण आदि को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। विशिष्ट उद्देश्य के सॉफ्टवेयर का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग निम्नवत् है • रेलवे, वायुयान, संग्रहालयों, आदि के आरक्षण हेतु • अस्पतालों में होटल प्रबन्धन में स्कूलों में लाइब्रेरी में 

3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) यह कुछ ऐसे प्रोग्रामों का समूह होता है, जो सिस्टम सॉफ्टवेयर नहीं होते, परन्तु जिनकी आवश्यकता हमें बार-बार पड़ती है। यूटिलिटी सॉफ्टवेयर, कई ऐसे कार्य करता है जो कम्प्यूटर का उपयोग करते समय हमें कराने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए, यूटिलिटी प्रोग्राम हमारी फाइलों का बैकअप किसी बाहरी भण्डारण साधन पर लेने का कार्य कर सकता है। ये सिस्टम सॉफ्टवेयर के अनिवार्य भाग नहीं होते परन्तु सामान्यतया उसके साथ ही प्रयोग किए जाते हैं और कम्प्यूटर के निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। यूटिलिटी सॉफ्टवेयर के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्न प्रकार हैं 

(i) टेक्स्ट एडिटर (Text Editor) यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो टेक्स्ट फाइलों के निर्माण और उनके सम्पादन की सुविधा देता है। इसका उपयोग केवल टेक्स्ट टाइप करने में किसी प्रोग्राम के लिए डेटा तैयार करने में किया जाता है। इस टेक्स्ट को फाइलों के रूप में भी स्टोर किया जा सकता है और बाद में कभी भी सुधारा जा सकता है। विण्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में नोटपैड (Notepad) एक ऐसा ही प्रोग्राम है।

 (ii) फाइल सॉर्टिंग प्रोग्राम (File Sorting Program) ये ऐसे प्रोग्राम होते हैं, जो किसी डेटा फाइल के रिकॉडों को हमारे किसी इच्छित क्रम (Order) में लगा सकते हैं। फाइल को छाँटना इसलिए आवश्यक होता है, जिससे उसमें किसी विशेष सूचना को ढूँढना सम्भव हो सके। 

(iii) डेटा सिलेक्शन प्रोग्राम (Data Selection Program) ये ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो किसी डेटा फाइल में से हमारी रुचि के रिकॉर्ड अलग करने में सहायक होते हैं। ऐसे रिकॉर्डो का चयन किसी विशेष सूचना के मानों के आधार पर किया जाता है।

 (iv) डिस्क मैनेजमेण्ट प्रोग्राम (Disk Management Program) ये ऐसे प्रोग्राम होते हैं, जो हार्ड डिस्क पर फाइलों को इस प्रकार व्यवस्थित (Arrange) करते हैं कि उस पर अधिक-से-अधिक फाइलों को स्टोर करना सम्भव हो सके तथा डिस्क का स्पेस बेकार न जाए। डिस्क मैनेजमेण्ट प्रोग्राम फाइलों को संकुचित (Compress) करके स्टोर करने का भी कार्य करता है, जिससे स्थान (Space) की बचत होती है। सिस्टम सॉफ्टवेयर एवं एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर में अन्तर

सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर सिस्टम के लिए सिस्टम सॉफ्टवेयर होना अति आवश्यक है। सिस्टम सॉफ्टवेयर को विकसित करना अधिक जटिल होता है। यह हार्डवेयर को संचालित कर एप्लीकेशन को रन करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर महँगे होते हैं। सिस्टम सॉफ्टवेयर को कस्टमाइज़ नहीं किया जा सकता। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर सिस्टम के लिए एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होना अति आवश्यक नहीं है। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को विकसित करना जटिल नहीं होता। यह प्रयोगकर्ता द्वारा दिए गए कार्य को ही करता है। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सस्ते होते हैं। एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को कस्टमाइज़ किया जा सकता है।

इस लेख के बारे में:

तो आपने इस लेख में जाना की सॉफ्टवेयर किसे कहते हैं। इस लेख को पढ़कर आपको कैसा लगा आप अपनी राय हमें कमेंट कर सकते है। इस लेख में सामान्य तौर पर किसी भी प्रकार की कोई गलती तो नहीं है लेकिन अगर किसी भी पाठक को लगता है कि इस लेख में कुछ गलत है तो कृपया कर हमे अवगत करे। आपके बहुमूल्य समय देने के लिए और इस लेख को पढने के लिए allhindi की पूरी टीम आपका दिल से आभार व्यक्त करती है।
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