शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं | शुद्ध पदार्थ के प्रकार Shuddh Padarth kise kahate hain

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शुद्ध पदार्थ किसे कहते हैं

दैनिक जीवन में शुद्ध शब्द का अर्थ रसायन विज्ञान के शुद्ध शब्द के अर्थ की अपेक्षा भिन्न है। साधारण व्यक्ति के लिए शुद्ध पदार्थ का अर्थ होता है कि उस पदार्थ में कोई मिलावट तो नहीं मौलिक कण एक ही प्रकार के हों। है परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से शुद्ध पदार्थ से तात्पर्य उस पदार्थ से है, जिसमें उपस्थित सभी सकता है रासायनिक संघटन या शुद्धता के आधार पर द्रव्य को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है।

शुद्ध पदार्थ की परिभाषा

शुद्ध पदार्थ (Pure Substances): रसायन विज्ञान में शुद्ध पदार्थ वह होता है, जिसमें उपस्थित सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हों। अर्थात् एक शुद्ध पदार्थ समान प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है। सभी पदार्थ दो या दो से अधिक शुद्ध अवयवों के संयोग से बनते हैं।
उदाहरण- समुद्र का जल, खनिज, मिट्टी इत्यादि मिश्रण है।

शुद्ध पदार्थ के प्रकार:

शुद्ध पदार्थ के दो प्रकार होते हैं

  1. तत्व (Elements)
  2. यौगिक (Compounds)

तत्व

तत्व (Elements): राबर्ट बॉयल ने सन् 1661 में बताया कि “वह शुद्ध द्रव्य, जिसे भौतिक या रासायनिक विधियों द्वारा दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता और न ही उनसे बनाया जा सकता, तत्व कहलाता है।
उदाहरण- लोहा, क्लोरीन, गन्धक, सोना, ब्रोमीन आदि।

तत्व समान प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं एवं एक ही तत्व के सभी परमाणुओं का परमाणु क्रमांक समान होता है।” वास्तव में, तत्व प्रकृति के मूल पदार्थ हैं। यहाँ मूल पदार्थ से यह अभिप्राय है कि इन्हीं से संसार के सभी द्रव्यों की रचना हुई है।

तत्व के प्रकार

तत्वों के तीन प्रकार होते हैं
(i) धातु
(ii) अधातु
(iii) उपधातु

तत्वों की विशेषताएँ

  1. प्रत्येक तत्व का सबसे छोटा स्वतन्त्र कण परमाणु होता है।
  2. समान तत्व के सभी परमाणु संघटन तथा गुणधर्म में समान होते हैं।
  3. भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न संघटन एवं गुणधर्म वाले होते हैं।
  4. अब तक ज्ञात तत्वों की संख्या 118 है, जिनमें से 27 तत्व मानव निर्मित तथा शेष प्राकृतिक है।
  5. तत्वों को भौतिक या रासायनिक विधियों द्वारा पुनः सरल पदार्थों विभाजित नहीं किया जा सकता।
नोट: भू-पपेटी में ऑक्सीजन सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व तथा ऐलुमिनियम सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली धातु (तथा तीसरा सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व) है। 
हीरा तथा ग्रेफाइट भी तत्व हैं। ये कार्बन के अपररूप (Allotropes) हैं।

यौगिक (Compounds):

वे पदार्थ, “जो दो या दो से अधिक तत्वों के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनते हैं, यौगिक कहलाते हैं।” आधुनिक अणु सिद्धान्त के अनुसार, यौगिक वह पदार्थ है, जिसके अणु भिन्न-भिन्न प्रकार के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में संयोग द्वारा निर्मित होते हैं।
उदाहरण-जल (H2O) एक यौगिक है, क्योंकि इसमें इसके अवयवी तत्वों अर्थात् हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के भार के अनुसार अनुपात सदैव 1: 8 होता है।

यौगिक के दो प्रकार होते है
(1) कार्बनिक यौगिक 
(2) अकार्बनिक यौगिक 

यौगिकों की विशेषताएँ

  1. यौगिक, तत्वों के निश्चित अनुपात में संयोग के फलस्वरूप बनते हैं।
  2. यौगिक के बनने प्रायः प्रकाश, ऊष्मा, विद्युत आदि अवशोषित या उत्सर्जित होते हैं।
  3. प्रत्येक यौगिक शुद्ध एवं समांगी (Homogeneous) पदार्थ होता है।
  4. यौगिकों को उनके अवयवों में साधारण भौतिक विधियों द्वारा विभाजित नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये प्रबल बन्धों द्वारा बँधे होते हैं।
  5. यौगिकों के एक निश्चित गलनांक एवं क्वथनांक होते हैं।
  6. किसी यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं।

इस लेख के बारे में:

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