सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं? इतिहास, विकास और उदाहरण

प्रिय पाठक (Friends & Students)! allhindi.co.in में आपका स्वागत है। उम्मीद करता हूँ आप सब लोग अच्छे होंगे। आज की इस लेख में आप सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं? इसके बारे में जानेंगे। सांकेतिक भाषा का इतिहास, विकास और उदाहरण| इनके बारे में हम बारीकी से समझेंगे। तो चलिए आज की इस लेख की शुरुआत करते है।

जब हम सभी इस धरती पर मानव का जन्म लिए तो हमे कुछ भी पता नहीं था। जैसे-जैसे हम बड़े हुए हमने अपने परिवार की भाषाओ को नक़ल करना शुरू किया। वह जैसा बोलते हम भी उनकी बातो को दोहराते थे फिर हम सभी को भाषा का ज्ञान हुआ। फिर हमने अलग-अलग भाषाओ को भी सीखा। उन्ही भाषाओं में से एक भाषा होती है जिन्हें हम सांकेतिक भाषा के नाम से जानते है आज की इस लेख में हम इसी भाषा के पूरे इतिहास को जानेंगे।

सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं
सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं

सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं ?

वह संकेत जिसका प्रयोग करके कोई व्यक्ति अपने भावो या विचारो को आपके सामने प्रकट करता है ऐसी भाषा को सांकेतिक भाषा कहते है। सांकेतिक भाषा का प्रयोग करने के लिए व्यक्ति को हाथों, उंगलियों, इशारो, या चेहरे के हाव भाव से अपनी बातों को स्पष्ट करता हैं / समझाता है। इस भाषा का प्रयोग करके व्यक्ति बिना शब्दों का प्रयोग किये अपनी भावनाओ को व्यक्त करने में सक्षम होता है।

इस भाषा का प्रयोग अधिकतर वे लोग करते हैं जो मुख बधिर होते हैं। मुखबधिर बच्चों को अलग प्रकार से प्रशिक्षित किया जाता है जिनसे वह इस भाषा का प्रयोग करके अपने बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। सांकेतिक भाषाओं में एक ही इशारों के कई मतलब होते हैं।

जिनसे उन्हें समझ पाना बहुत ही कठिन हो जाता है इसी समस्या को हल करने के लिए बहुत सारे विशेषज्ञों ने सांकेतिक भाषाओ के ऊपर कुछ महत्त्वपूर्ण किताबें लिखी है, जो की आप नीचे देख सकते है।

सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं

सांकेतिक भाषा का इतिहास

सांकेतिक भाषा के इतिहास उतना ही पुराना है जितना की मौखिक भाषा का। सांकेतिक भाषा मौखिक भाषा को पूरा करने का कार्य करता है इसलिए सांकेतिक भाषा को मौखिक भाषा का पूरक भी माना जाता है। मौखिक भाषाओं में हम सांकेतिक माताओं का भी प्रयोग करते हैं। यह दोनों मिश्रण होते हैं जैसे मान लीजिए अगर किसी भी व्यक्ति को रोकना है तो अगर उस व्यक्ति के सामने अपना हाथ सीधा करके रख दे तो वह व्यक्ति समझ जाता है इस प्रकार के बहुत सारे उदाहरण हैं। जिससे यह पता चल पाता है की मौखिक भाषा जितनी सांकेतिक भाषा भी पुरानी है।

500 साल पहले प्लेटो के प्लेटो के क्रैटिलस अभिलेखों मे सुकरात ने कहा था कि “यदि हमारे हमारे पास बोलने के लिए अंग नहीं होते और हम एक दूसरे से बात करने में समर्थ नहीं होते तो क्या हम दूसरों से बात करने के लिए अपने अंगों का प्रयोग करके बात करने की कोशिश नहीं करते जैसा गूंगे करते हैं“?

सुकरात के इस अभिलेख से यह स्पष्ट हो जाता है कि वह जिस भाषा की बात कर रहे हैं वह सांकेतिक भाषा ही थी।

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सांकेतिक भाषा का विकास कैसे हुआ?

1620 में, जुआन पाब्लो बोनेट ने मैड्रिड में “Reducción de las Letras y arte para enseñar a hablar a los mudos ” को प्रकाशित किया। इस भाषा को पहला आधुनिक ग्रंथ माना जाने लगा इस पुस्तक में कुछ ऐसे संकेत विकसित किए जो पारंपरिक वर्णमाला ओं को दर्शाते हुए एक ऐसी संकेतिक भाषा का विकास हुआ जो मुक बधिर ओ के लिए बातचीत करने में सहायक हो।

सांकेतिक भाषा के 5 उदाहरण

  • ट्रैफिक लाइट के बत्तियों से
  • उंगलियों का प्रयोग करके किसी वस्तु की मात्रा या गिनती को समझाना
  • सर को हिलाकर हा या ना बताना

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सांकेतिक भाषा से जुड़े कुछ सवाल जवाब

प्रश्न: लिखित और सांकेतिक भाषा में क्या अंतर है ?

उत्तर: जब मनुष्य अपने मन के भावों या विचारों को लिखकर प्रकट करता है, तो उसे लिखित भाषा कहते हैं। लिखना और पढ़ना लिखित भाषा के रूप हैं।

वह संकेत जिसका प्रयोग करके कोई व्यक्ति अपने भावो या विचारो को आपके सामने प्रकट करता है ऐसी भाषा को सांकेतिक भाषा कहते है।

प्रश्न: वर्तमान में सांकेतिक भाषा का प्रयोग कहाँ कहाँ किया जाता है

उत्तर: वर्तमान में सांकेतिक भाषा का प्रयोग बहुत सारे जगहों पर किया जाता है|

प्रश्न: सांकेतिक भाषा क्या हैं ?

उत्तर: संकेत के द्वारा अपने भावो या विचारो का आदान प्रदान करना

प्रश्न: सांकेतिक भाषा का अर्थ क्या है?

उत्तर: सांकेतिक भाषा का अर्थ है: संकेतो से संवाद करना

प्रश्न: सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं?

उत्तर: वह संकेत जिसका प्रयोग करके कोई व्यक्ति अपने भावो या विचारो को आपके सामने प्रकट करता है ऐसी भाषा को सांकेतिक भाषा कहते है।

इस लेख के बारे में:

तो आपने इस लेख में जाना की सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं। इस लेख को पढ़कर आपको कैसा लगा आप अपनी राय हमें कमेंट कर सकते है। इस लेख में सामान्य तौर पर किसी भी प्रकार की कोई गलती तो नहीं है लेकिन अगर किसी भी पाठक को लगता है कि इस लेख में कुछ गलत है तो कृपया कर हमे अवगत करे। आपके बहुमूल्य समय देने के लिए और इस लेख को पढने के लिए allhindi की पूरी टीम आपका दिल से आभार व्यक्त करती है।
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