पदार्थ किसे कहते हैं | परिभाषा, प्रकार, अवस्था और परिवर्तन

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प्रिय पाठक (Friends & Students)! allhindi.co.in में आपका स्वागत है। उम्मीद करता हूँ आप सब लोग अच्छे होंगे। आज की इस नए लेख में आप पदार्थ किसे कहते हैं ? इसके बारे में जानेंगे। इसके अलावा आप पदार्थ की परिभाषा, प्रकार, अवस्था और परिवर्तन के बारे में हम बारीकी से समझेंगे। तो चलिए आज की इस लेख की शुरुआत करते है।

इस संसार में असंख्य वस्तुएँ हैं, जिनका अनुभव हमें ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा होता है। आदिकाल से ही यह अवधारणा रही है कि ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुएँ द्रव्य हैं। इनमें से कुछ को हम देख सकते हैं, जबकि कुछ का केवल अनुभव कर सकते हैं। जैसे—पेड़-पौधे, धातु, जल आदि दृश्य (अर्थात् देखे जा सकने वाले) द्रव्य हैं, जबकि वायु आदि अदृश्य (अर्थात् केवल अनुभव किए जाने वाले) द्रव्य हैं।

पदार्थ किसे कहते हैं

पदार्थ: पदार्थ ब्रह्माण्ड का वह अवयव है, जिसमें द्रव्यमान व आयतन होता है तथा जिसका अनुभव हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा कर सकते हैं। पदार्थ को द्रव्य भी कहा जाता हैं|
उदाहरण—जल, वायु, लकड़ी, हीरा, स्टील (इस्पात) , काँच आदि सभी में द्रव्यमान होता है तथा सभी स्थान घेरते हैं, अतः ये पदार्थ हैं।
प्राचीन काल में द्रव्य को पाँच मूल तत्त्वों में वर्गीकृत किया, जिसे पंचतत्त्व कहा गया, ये पंचतत्त्व वायु, पृथ्वी, अग्नि, जल तथा आकाश हैं।

पदार्थ किसे कहते हैं
पदार्थ किसे कहते हैं

आधुनिक वैज्ञानिकों ने द्रव्य को भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म के आधार पर वर्गीकृत किया है।
उदाहरण—ठोस, द्रव तथा गैस (कणों की व्यवस्था या भौतिक गुणों के आधार पर) या तत्त्व, यौगिक तथा मिश्रण (रासायनिक प्रकृति के आधार पर)

पदार्थ से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण पद

इस भाग में आप पदार्थ से सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण पद को जानेंगे|

द्रव्यमान (Mass): किसी वस्तु में उपस्थित द्रव्य की वास्तविक मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। किसी वस्तु का द्रव्यमान सदैव निश्चित होता है अर्थात् स्थान परिवर्तन के साथ इसका मान परिवर्तित नहीं होता है। इसे m द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

भार (Weight): पृथ्वी अपने केन्द्र की ओर वस्तुओं को जिस बल द्वारा आकर्षित करती है, उसे भार कहते हैं। स्थान परिवर्तन के साथ इसका मान परिवर्तित होता जाता है। इसे द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

द्रव्यमान तथा भार में सम्बन्ध(Relation between Mass and Weight): यदि द्रव्य का द्रव्यमान m एवं भार w हो, तो w= mg, जहाँ g = गुरुत्व जनित त्वरण है। स्थान परिवर्तन के साथ g एवं w का मान परिवर्तित होता जाता है।

उदाहरण-अन्तरिक्ष में g का मान शून्य होने के कारण वस्तु का भार शून्य प्रतीत होता है। चन्द्रमा पर g का मान पृथ्वी पर g के मान का 1 / 6 है, अतः यदि किसी वस्तु का पृथ्वी पर भार 600 किग्रा पाया गया है, तो चन्द्रमा पर यह 100 किग्रा प्रतीत होगा। यद्यपि दोनों स्थानों पर द्रव्यमान समान होगा। नोट रसायन विज्ञान के परिपेक्ष में भार एवं द्रव्यमान समान अर्थ में प्रयुक्त किए जाते हैं।

आयतन Volume: किसी वस्तु द्वारा घेरा (Occupied) गया स्थान, उस वस्तु का आयतन कहलाता है। इसे V द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

ऊर्जा Energy: येक-किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। प्रत्येक द्रव्य में ऊर्जा की एक निश्चित मात्रा होती है। ऊर्जा अपने विभिन्न रूपों, जैसे-प्रकाश ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, गतिज ऊर्जा आदि में से किसी भी रूप में उपस्थित हो सकती है।ऊर्जा में न तो द्रव्यमान होता है और न ही इसकी कोई भौतिक अवस्था होती है। इसे E द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता नियम Mass-Energy Equality Law यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m तथा ऊर्जा E हो, तो आइन्सटीन के अनुसार,
E = mc²
जहाँ, c = प्रकाश का वेग = 3 x 1010 सेमी / सेकण्ड
अतः उपर्युक्त समीकरण के आधार पर यह स्पष्ट है कि द्रव्यमान को ऊर्जा में तथा ऊर्जा को द्रव्यमान में परिवर्तित किया जा सकता है।

पदार्थ का भौतिक स्वरूप Physical Nature of Matter:

पदार्थ कणों से मिलकर बना होता है, वास्तव में पदार्थ विभिन्न आकार, आकृति तथा प्रकृति के कणों से मिलकर बना होता है। पदार्थ के कण बहुत छोटे होते हैं। उन्हें व्यक्तिगत रूप से नग्न नेत्रों से देखना असम्भव है। वे इतने छोटे होते हैं कि उनकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।

पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण Characteristic Properties of Particle of Matter:

पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण निम्नलिखित हैं:

  1. पदार्थ के कणों के मध्य रिक्त स्थान होता है।
  2. पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील होते हैं अर्थात् उनमें गतिज ऊर्जा होती है तथा तापमान बढ़ने से कणों की गति तेज हो जाती है। अतः यह कहा जा सकता है कि ताप वृद्धि होने पर कणों की गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है। Awar
  3. पदार्थ के कणों के मध्य आकर्षण बल उपस्थित होते हैं, जिसे अन्तर आण्विक बल कहते हैं।
  4. (iv) द्रव्य के कणों के मध्य की दूरी घटने के साथ-साथ कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल बढ़ता जाता है।
    उदाहरण- द्रव्यों के कणों में सतत् (Continuous) गति होती रहती है, जिससे इनमें गतिज ऊर्जा उत्पन्न होती है। द्रव्य की गतिज प्रवृत्ति के कारण ही इत्र की शीशी खोलने पर उसकी सुगन्ध पूरे कमरे में फैल जाती है। इसी प्रकार जल में पोटैशियम परमैंगनेट का क्रिस्टल डालने पर सम्पूर्ण जल गुलाबी हो जाता है।
पदार्थ किसे कहते हैं

पदार्थ से जुड़े कुछ सवाल

प्रश्न: पदार्थ क्या है? पदार्थ किसे कहते है?

उत्तर: वह पदार्थ जिनमे द्रव्यमान और आयतन होता है, पदार्थ कहलाते है|

प्रश्न: पदार्थ की कितनी अवस्थाये होती है?

उत्तर: पदार्थ की तीन अवस्थाये होती है

प्रश्न: द्रव्यमान किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी वस्तु में उपस्थित द्रव्य की वास्तविक मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं

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इस लेख के बारे में:

तो आपने इस लेख में जाना की पदार्थ किसे कहते हैं? परिभाषा, प्रकार, अवस्था और परिवर्तन के बारे में। इस लेख को पढ़कर आपको कैसा लगा आप अपनी राय हमें कमेंट कर सकते है। इस लेख में सामान्य तौर पर किसी भी प्रकार की कोई गलती तो नहीं है लेकिन अगर किसी भी पाठक को लगता है कि इस लेख में कुछ गलत है तो कृपया कर हमे अवगत करे। आपके बहुमूल्य समय देने के लिए और इस लेख को पढने के लिए allhindi की पूरी टीम आपका दिल से आभार व्यक्त करती है।

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