क्रिया किसे कहते हैं- परिभाषा, भेद, प्रकार- कक्षा 5,6,7,8,9,10

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नमस्कार दोस्तों, Allhindi.co.in के एक नए लेख में आप सभी का स्वागत हैं आज की इस लेख में आप क्रिया के बारे में जानेंगे। क्रिया किसे कहेते हैं तथा क्रिया को समझना क्यों जरूरी है इस लेख को पढने के बाद आपको स्वयं पता चल जायेगा। इस लेख को बहुत ही सरल और बहुत ही आसान भाषा में समझाने की कोशिश की गयी हैं जिससे कक्षा 5 के विद्यार्थियों को यह आसानी से समझ में अया जाये।

क्रिया शब्द भेद का एक महत्व पूर्ण भाग है जिसे बहुत सारे विद्यार्थी या तो समझ नहीं पाते हैं या फिर नजरंदाज कर देते हैं जिससे वह एक विशेष चैप्टर को छोड़ देते हैं जिससे उन्हें आगे चल कर काफी दिक्कत होती है। लेकिन इस लेख को यदि आप ध्यान से पढ़ते है तो मुझे पूरा विश्वास हैं की आपको क्रिया की पूरी जानकारी इस लेख से मिल जाएगी।

क्रिया किसे कहते हैं

क्रिया किसे कहते हैं

क्रिया की परिभाषा: जब किसी शब्द से किसी काम के करने यह होने का बोध होता है तो वे शब्द क्रिया कहलाते हैं। या इन्हें हम इस तरह से भी परिभाषित कर सकते हैं कि जिन शब्दों से किसी काम के करने या होने का पता चलता हो उसे हम क्रिया कहते हैं। जैसे लड़ना, झगड़ना, नहाना, सुनना, पढ़ना लिखना इत्यादि यह सभी शब्द क्रिया है जो किसी काम को करने या होने को दर्शाते हैं।

उदाहरण: राम घर जा रहा है।
वे लोग आपसे मिल रहे है।
आप लोग घर जा रहे है।
मैं घर का काम कर रहा हूँ।
घोड़ा चना खा रहा हैं। 
आप घर पर जा रहे हैं।

इन सभी वाक्यो में मुख्य क्रिया (जाना,मिलना,जाना, करना, खाना, जाना) है। इन सभी वाक्यो सहायक क्रिया (है,हूँ,हो) इत्यादि है।

क्रिया के रूप से इस वाक्य में प्रयोग हुए संज्ञा या सर्वनाम के लिंग और वचन का भी पता चलता है। क्रिया के बहुत सारे रूप होते है। क्रियाओ में प्रत्यय जोड़कर और क्रियाओ को बदला जा सकता है।

क्रियाओ के सामान्य रूप के अंत मे ना लगा रहता हैं। जैसे: आना, खेलना, खाना-पीना, रहना, घूमना, पीना इत्यादि। जब किसी क्रियाओं के अंत से ना को हटा दिया जाता है।तो बाकी बचे शब्द को क्रिया की धातु कहते है।

क्रिया के भेद : 

क्रिया के भेद दो आधारों पर किए जाते हैं 1. कर्म के आधार पर 2. प्रयोग अथवा संरचना के आधार पर
कर्म के आधार पर क्रिया के भेद कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है (i) अकर्मक क्रिया (ii) सकर्मक क्रिया

अकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

अकर्मक क्रिया की परिभाषा: किसी वाक्य में जो क्रियाएँ बिना कर्म के होती हैं , वे अकर्मक क्रियाएँ कहलाती हैं । इस प्रकार के वाक्यो को अपने भाव को व्यक्त करने के लिए किसी कर्म की जरूरत नही पड़ती हैं। 

दूसरे शब्दों में: जब किसी वाक्यो में क्रिया के द्वारा किये गए कार्य का प्रभाव कर्म पे न पड़के कर्ता पे प्रभाव डालता है उसे अकर्मक क्रिया कहते है। इस प्रकार के वाक्यो में कर्म नही होता है। जैसे: हँसना, सोना, भागना, आना, जाना, उठना, बैठना, चलना, तैरना आदि अकर्मक क्रियाएँ हैं।

उदाहरण: बच्चे तैर रहे हैं।
वृद्ध बैठा है।
बच्चा हँसता है। 

आप ऊपर दिए गए वाक्यो में देख सकते है इन वाक्यो में कर्म की जरूरत नही पड़ रही है। अतः ये सभी क्रियायें अकर्मक क्रिया हैं। 

सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

सकर्मक क्रिया की परिभाषा:  सकर्मक का अर्थ होता है कर्म सहित या व्याकरण के साथ जब किसी वाक्य में कर्ता के द्वारा किए गए कार्यों का प्रभाव कर्म पर पड़ता है। इस प्रकार के वाक्यों में हमें कर्म की आवश्यकता होती है बिना कर्म के यह वाक्य अधूरे होते हैं तथा अपने भाव को पूर्णता प्रकट नहीं कर सकते हैं। 

पढ़ना, लिखना, खाना, पीना, धोना, सुखाना, भरना, बोना , काटना आदि सकर्मक क्रियाएँ हैं।
जैसे: किसान बीज बोता है। स्त्री पानी भर रही है। कुम्हार घड़े बनाता है। 

सकर्मक क्रिया के भेद:  सकर्मक क्रिया तीन प्रकार की होती है।

एककर्मक क्रिया किसे कहते हैं

एककर्मक क्रिया: जब किसी वाक्य में प्रिया के केवल एक कर्म पूरे होने का बोध होता है उससे पूर्ण एककर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे:
राम ने खाना खा लिया।
श्याम टीवी देख रहा है।
रोहन क्रिकेट खेल रहा है।

एककर्मक क्रिया की पहचान ‘क्या‘ शब्द लगाकर की जा सकती है।

द्विकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

द्विकर्मक क्रिया: द्विकर्मक का अर्थ होता है दो कार्यों सहित या दो कार्यों के साथ जब किसी वाक्य में किसी एक क्रिया के साथ 2 कर्मों के पूर्ण होने का पता चलता है ऐसे क्रिया को द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।

जैसे: राम ने सोहन को डंडे से मारा।
मेरे भाई ने सेव को चाकू से काटा।  
शिवम ने अपने पिता की हत्या चाकू से कर दी।

अपूर्ण क्रिया किसे कहते हैं

अपूर्ण क्रिया: जब किसी वाक्य में क्रिया तथा कर्म के होते हुए भी अपने वाक्य के पूर्व तो इस भाव को स्पष्ट ना करें ऐसी क्रियाओं को हम अपूर्ण क्रिया कहते हैं।
जैसे: तुम हो- तुम एक भारतीय नागरिक हो। मैं अगले वर्ष बन जाऊंगा। – मैं अगले वर्ष अध्यापक बन जाऊंगा।

सकर्मक व अकर्मक क्रिया में अंतर

Sr. N.अकर्मक क्रियासकर्मक क्रिया
1.अकर्मक क्रिया बिना कर्म के होती है।सकर्मक क्रिया में कर्म होता है।
2.यदि ‘ क्या ‘ अथवा ‘ किसको ‘ लगाकर प्रश्न करने पर यदि उत्तर न मिले तो क्रिया अकर्मक होती है।. यदि ‘ क्या ‘ अथवा ‘ किसको ‘ लगाकर प्रश्न करने पर यदि उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक होती है।
3.अकर्मक क्रिया का फल कर्ता पर पड़ता है ।सकर्मक क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है।

संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

जब कोई क्रिया दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनती है ऐसी क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं अथवा हम कह सकते हैं कि जब दो या दो से अधिक क्रियाओं को आपस में मिलाया जाता है तथा आपस में मिलाने के बाद वह क्रिया एक पूर्ण क्रिया का बोध कराती है ऐसी क्रियाओं को हम संयुक्त क्रिया कहते हैं। संयुक्त क्रिया में पहली क्रिया को मुख्य क्रिया माना जाता है।

जैसे: बच्चे मेले में से लौट आए।
अंजलि अचानक से रोने लगी।
वह अर्नवी के घर पहुंच गया।

ऊपर दिए गए वाक्यों में एक से अधिक प्रिया हैं जैसे लौट आए रोने लगी पहुंच गया यहां पर यह सभी क्रियाएं मिलकर एक ही कार्य को पूरा कर रहे हैं अतः इस प्रकार की क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं।

नामधातु क्रिया किसे कहते हैं

जब संज्ञा या विशेषण के साथ क्रिया को जोड़ा जाता है, संज्ञा और विशेषण को एक साथ जोड़ने से संयुक्त क्रिया बनती है उस से ही हम नामधातु क्रिया कहते हैं।
जैसे: उसे वहां जाना था। 
हमें गरीबों का सत्कार करना चाहिए।
तुम उसकी जमीन को हथियाना चाहते हो।

क्रिया को अच्छे से समझने के लिए विडियो

प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं

प्रेरणार्थक क्रिया: जब किसी वाक्य में कर्त्ता स्वयं किसी काम को नहीं करता है बल्कि वह कार्य कर्त्ता दूसरों से करवाता है। इस प्रकार के वाक्य में क्रिया प्रेरणार्थक क्रिया कहलाती है।

जैसे: मकान मालिक किराएदार से पानी मंगवाता है।
हत्यारा सोनू से झूठी गवाही दिलवाता है।
अध्यापक छात्रों से अपना कार्य करवाते हैं।

ऊपर दिए गए उदाहरणों से आप स्पष्ट रूप से देख पा रहे होंगे कि इस इन इस प्रकार के वाक्यों में करता स्वयं कार्य न कर कर दूसरों से कार्य करवा रहा है इसी प्रकार की क्रिया को हम प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।

प्रेरणार्थक क्रिया के प्रकार

प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया वह क्रिया होती है , जिसमें कर्ता स्वयं को कार्य करने की प्रेरणा देता है । जैसे: माँ बच्चे को खाना खिलाती है । 

द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है तो उसे द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं । जैसे: माँ भव्या से पत्र लिखवाती है। 

तात्कालिक क्रिया किसे कहते हैं

ऐसी वाक्य जिनमें एक क्रिया खत्म होने के बाद तुरंत दूसरे क्रिया प्रारंभ हो जाती है इस प्रकार के वाक्यों में उपयोग हुए क्रिया को हम तात्कालिक क्रिया कहते हैं।

वह पार्टी में आते ही नाचने लगा।
मैं जैसे ही घर आया बारिश शुरू हो गई।
उसके जाने से पहले ही घंटी लग चुकी थी।
मेरे जाते ही वह मिलने आया था।

दूसरे शब्दों में जब किसी वाक्य में एक कार्य खत्म होने के बाद तुरंत दूसरा कार्य शुरू हो जाए ऐसे वाक्यों में उपयोग क्रिया को हम तात्कालिक क्रिया कहते हैं।

पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं

पूर्वकालिक क्रिया की परिभाषा: पूर्णकालिक शब्द का अर्थ होता है पहले समय में किसी कार्य का होना। जब किसी वाक्य में मुख्य क्रिया से पहले ही कोई दूसरी क्रिया आ जाए तो उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं। पूर्वकालिक क्रिया मूल धातु में ‘कर’अथवा ‘करके’ लगाकर बनाई जाती है

जैसे: रवि मेरा पेन चुरा कर भाग गया।
रोहन ने भागकर ट्रेन पकड़ी।
अध्यापक ने मारकर समझाया।
विद्यार्थी ने सोचकर उत्तर दिया।
पुजारी ने स्नान करके पूजा की।
राखी ने घर पर पहुंच कर फोन किया।

ऊपर दिए गए वाक्यों में पूजा की तथा फोन किया मुख्य क्रिया है। इससे पहले नहा कर तथा पहुंचकर क्रियाएं हुई है अतः यह पूर्वकालिक क्रिया है।

सहायक क्रिया किसे कहते हैं

सहायक क्रिया: वाक्य में मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर क्रिया के अर्थ में विशेषता लाने व क्रिया का काल बताने का कार्य करने वाली क्रिया सहायक क्रिया कहलाती है ।
जैसे: बच्चे कक्षा से बाहर आ रहे हैं।
वे लोग घर जा रहे हैं।
मैं अपना पाठ याद कर रहा हूँ।

इससे सम्बंधित लेख: व्याकरण किसे कहते हैं- परिभाषा और प्रकार
विशेषण किसे कहते हैं

क्रिया से जुड़े कुछ सवाल और जवाब

प्रश्न: पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं?

उत्तर: पूर्णकालिक शब्द का अर्थ होता है पहले समय में किसी कार्य का होना। जब किसी वाक्य में मुख्य क्रिया से पहले ही कोई दूसरी क्रिया आ जाए तो उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं।

प्रश्न: सहायक क्रिया किसे कहते हैं

उत्तर: : वाक्य में मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर क्रिया के अर्थ में विशेषता लाने व क्रिया का काल बताने का कार्य करने वाली क्रिया सहायक क्रिया कहलाती है ।

प्रश्न: तात्कालिक क्रिया किसे कहते हैं

उत्तर: ऐसी वाक्य जिनमें एक क्रिया खत्म होने के बाद तुरंत दूसरे क्रिया प्रारंभ हो जाती है इस प्रकार के वाक्यों में उपयोग हुए क्रिया को हम तात्कालिक क्रिया कहते हैं।

प्रश्न:द्विकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

उत्तर: द्विकर्मक का अर्थ होता है दो कार्यों सहित या दो कार्यों के साथ जब किसी वाक्य में किसी एक क्रिया के साथ 2 कर्मों के पूर्ण होने का पता चलता है ऐसे क्रिया को द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।

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