गलन किसे कहते हैं? गलन और गलनांक की परिभाषा

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प्रिय पाठक (Friends & Students)! allhindi.co.in में आपका स्वागत है। उम्मीद करता हूँ आप सब लोग अच्छे होंगे। आज की इस नए लेख में आप गलन किसे कहते हैं ? इसके बारे में जानेंगे। इसके अलावा आप गलन की परिभाषा के बारे में हम बारीकी से समझेंगे। तो चलिए आज की इस लेख की शुरुआत करते है। और जानते है की गलन किसे कहते हैं?

गलन किसे कहते हैं ?

किसी ठोस को ऊष्मा देते रहने पर एक ऐसी स्थिति आती हैं, जब ऊष्मा में वृद्धि करने पर भी तापमान अपरिवर्तित रहता है तथा ठोस द्रव अवस्था में परिवर्तित होने लगता है तो ठोस के द्रव में परिवर्तित होने की क्रिया गलन कहलाती है।

गलन किसे कहते है
गलन किसे कहते है

इसे अगर सामान्य भाषा में समझे तो जब कोई भी ठोस को हम लगातार गर्म करते है तो कुछ निश्चित समय और तामपान से वह ठोस वस्तु पिघलने लगती है। इस पूरी प्रक्रिया को ही हम गलन कहते है। आइये इसे कुछ उदाहरण से समझते है।

जैसे आपने youtube पर बहुत सारे ऐसे विडियो को देखा होगा जिसमे वह व्यक्ति चांदी, सोना, जैसे कि ठोस पदार्थ को वह गर्म करते है, कुछ देर बाद आप देखते है कि वह ठोस पदार्थ पूरी तरह पिघल जाता है। । इस पूरे प्रक्रिया को रसायन की भाषा में गलन कहते हैं। और सामान्य भाषा में पिघलना कहते हैं।

गलनांक किसे कहते हैं

वह न्यूनतम ताप, जिस पर कोई ठोस, वायुमण्डलीय दाब पर द्रव में परिवर्तित हो जाता है, उस ठोस का गलनांक कहलाता है| प्रत्येक क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline solid) के लिए इसका मान निश्चित होता है।

अणुगतिज सिद्धान्त के आधार पर गलन की व्याख्या: ठोस को गर्म करने पर, अर्थात् उसका ताप बढ़ाने पर उसके कणों की गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है और कणों के मध्य को दूरी बढ़ने लगती है, जिससे उनके मध्य अन्तराकणीय आकर्षण बल कम होने लगता है। गर्म करते रहने पर एक ऐसी स्थिति आती है, जब ठोस के कण स्वतन्त्रतापूर्वक गति करने लगते हैं तथा क्रिस्टल जालक टूट जाता है और ठोस द्रव में परिवर्तित होने लगता है, यह क्रिया गलन कहलाती है। वह ताप जिस पर गलन क्रिया सम्पन्न होती है, गलनांक कहलाता है।

गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Melting) गलनांक पर ठोस को पुनः गर्म करने पर ताप में वृद्धि नहीं होती है, क्योंकि दी गई ऊष्मा ठोस को पिघलाने में अर्थात् अन्तराकणीय आकर्षण बलों को क्षीण करने में व्यय होती है। जब सम्पूर्ण ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, तो ताप पुनः बढ़ने लगता है। किसी ठोस के 1 ग्राम को उसके गलनांक पर द्रव में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा उस ठोस की गलन की गुप्त ऊष्मा कहलाती है।

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इस लेख के बारे में:

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