EMI क्या है? EMI Kya Hai

मनुष्य अपनी बड़ी आवश्यकताओं (जैसे घर लेना, शादी करने, किसी बिजनेस को शुरू करने) की पूर्ति के लिए फाइनेंसियल बैंक या कॉरपोरेट्स संस्थाओं से लोन लेते हैं। इन लोन को चुकाने के लिए फाइनेंशियल बैंक या कारपोरेट संस्थाओं के द्वारा बहुत सारी व्यवस्था बनाई गई है, इस व्यवस्था के अंतर्गत EMI भी शामिल है।

आज कि इस लेख में हम EMI से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात करेंगे जैसे EMI क्या है? EMI कैसे काम करता है? EMI के फायदे और नुकसान क्या है? EMI कैसे कैलकुलेट किया जाता है? अगर आप EMI के बारे में सही और सटीक जानकारी चाहते हैं इस पोस्ट को पूरा पढ़ें, तो चलिए आज के इस लेख को शुरू करते हैं-

EMI क्या है? (EMI Kya Hai)

EMI एक ऐसी मासिक किस्त व्यवस्था है, जो फाइनेंशियल बैंक या कारपोरेट संस्थाओं के द्वारा अपने दिए हुए लोन के पैसे को वापस लेने के लिए बनाया जाता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत हर महीने के एक निश्चित तिथि पर लोन लिए हुए व्यक्ति के द्वारा पहले से निर्धारित एक निश्चित धन चुकाना होता है।

आमतौर पर प्रत्येक EMI को मूलधन के आधार पर अलग-अलग अनुपातों के ब्याज और घटकों से बनाया जाता है।

EMI कितने प्रकार की होती है (EMI Kitne Prakar Ki Hoti hai)

EMI को बहुत सारे आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है जो इस प्रकार है-

  • Interest Based EMI
  • Tranche Based EMI
  • Flexibility Based EMI

Interest Based EMI: ब्याज दर के आधार पर EMI तीन प्रकार की होती हैं, जो आगे दी गई है-

Fixed Rate EMI

इस तरह के लोन में आपको पूरा EMI एक निश्चित ब्याज दर पर चुकाना पड़ता है। जिसके कारण इस लोन की मासिक EMI भी पूरी अवधि तक एक समान रहती है।

Floating Rate EMI

इस तरह के लोन में आमतौर पर ब्याज दर घटती-बढ़ती रहती है। इस लोन में कभी-कभी लोन धारा को फायदा हो जाता है तो कभी-कभी नुकसान।

No Cost EMI

जब कोई फाइनेंशियल बैंक या कारपोरेट संस्थाएं लोगों के बीच अपने उत्पादों को लाने तथा लोगों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए बिना अतिरिक्त शुल्क लिए लोन या कोई उत्पाद देते हैं तो ऐसे लोन को नो कॉस्ट EMI कहा जाता है। जैसे: कुछ कंपनियों के मोबाइल फोन, कुछ फाइनेंसियल बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड आदि।

Tranche Based EMI: Tranche के आधार पर EMI तीन प्रकार के होते हैं। जो इस प्रकार हैं-

Pre EMI 

Pre EMI में लोन धारक को केवल इंटरेस्ट देना रहता है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने अपना घर बनाने के लिए किसी बैंक से इस महीने में 40 लाख रुपए लोन Issue कराया लेकिन आप उन रुपए को अगले महीने निकालना चाहते हैं। इस महीने उस रुपए पर जो ब्याज आप पे करेंगे उसे ही Pre EMI कहा जाता है।

Disbursed Amount

मान लीजिए आपने अपना घर बनाने के लिए किसी बैंक से 60 लाख रुपए लोन Issue कराया। और आपने बैंक से सिर्फ 10 लाख रुपए ही विड्रॉल किए और आप यह चाहते हैं कि आप सिर्फ 10 लाख का EMI पे करें, तो इस प्रकार के EMI को Disbursed Amount कहा जाता है। इस EMI में जैसे-जैसे आप बैंक से लोन लेते जाते हैं, वैसे-वैसे आपकी EMI बढ़ती जाती है।

No EMI

मान लीजिए किसी जगह पर एक बिल्डर एक मकान तैयार कर रहा है और आप उस मकान को खरीदना चाहते हैं परंतु मकान अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। और बिल्डर को पैसे की आवश्यकता है तो बिल्डर आपके नाम पर बैंक से लोन लेता है। जब तक मकान पूरी तरह से तैयार नहीं होता है तब तक उस लोन का EMI बिल्डर के द्वारा भरा जाता है। इस प्रकार यह आपके लिए No EMI होता है।

Flexibility Based EMI: Flexibility के आधार पर EMI दो प्रकार के होते हैं।

Step Up EMI

खासतौर से यह EMI यंग जनरेशन के लोगों के लिए होता है। इस EMI में जैसे-जैसे लोन धारक की सैलरी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे EMI बढ़ती जाती है। जिसके कारण लोन धारक के ऊपर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है।

Step Down EMI

यह EMI खासतौर से उन लोगों के लिए होता है जो लोग 50 साल या उससे अधिक उम्र के हैं। इन लोगों के पास पर्याप्त धन होता है। परंतु रिटायरमेंट के बाद उनके पास धन की कमी होने लगती है इन्हीं सब कारणों को देखते हुए यह लोग सोचते हैं कि नौकरी करते हुए अधिक से अधिक धन चुका दिया जाए, ताकि बाद में ज्यादा दबाव न हो।

EMI कैसे काम करता है? ( EMI Kaise Kam Karta Hai )

मान लीजिए आपने लोन पर कोई प्रोडक्ट खरीदा जिसकी कीमत मार्केट में 80 हजार रुपए है। यह एक बहुत बड़ी धनराशि है जिसे एक साथ देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अब आपने जिस भी बैंक या संस्था के द्वारा आपने प्रोडक्ट को खरीदने के लिए लोन लिया है, वह अपने दिए गए लोन पर ब्याज की मांग करता है। ब्याज की पूर्ति के लिए वह बैंक या संस्था लोन की धनराशि को थोड़ा-थोड़ा करके मंथली बेसिस पर EMI के रूप में आपसे लेता है।

EMI के फायदे क्या है? ( EMI Ke Fayde Kya Hai )

खरीदने की आजादी: अगर आपके पास किसी प्रोडक्ट को खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं है तो EMI आपको किसी भी प्रोडक्ट को सीधे और सुरक्षित खरीदने की अनुमति देता है।

क्षमता: मान लीजिए आपको एक फोर व्हीलर गाड़ी खरीदनी है और आपके पास उस गाड़ी को खरीदने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। तो इस अवस्था में आप उस गाड़ी को लोन पर खरीद सकते हैं और लोन की भरपाई EMI के रूप में थोड़ा-थोड़ा कर सकते हैं।

EMI विकल्प: जब आप किसी फाइनेंसियल बैंक या कॉरपोरेट संस्थाओं से लोन लेते हैं तो यह फाइनेंशियल बैंक या कॉरपोरेट संस्थाएं आपको लोन चुकाने के लिए अलग-अलग तरह के EMI विकल्प देते हैं। जिसमें से कुछ विकल्प तो काफी हद तक लोन धारक के लिए फायदेमंद होते हैं। जैसे- नो कॉस्ट EMI

नो ब्रोकरेज चार्ज: अगर कोई व्यक्ति किसी बैंक से लोन लेता हैं तो उस लोन की पूर्ति के लिए जो EMI लोन धारक के द्वारा दिया जाता है, उसमें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क (ब्रोकरेज चार्ज) नहीं होता है।

EMI के नुकसान क्या है? (EMI Ke Nuksan Kya Hai)

लंबी अवधि ऋण: EMI को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि लोन धारक लंबे समय तक लोन की EMI भरता रहे जिससे लोन के ऊपर का ब्याज बैंकों को मिलता रहे।

अधिक ब्याज भुगतान: अगर आप किसी बैंक से किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो उस लोन पर ब्याज की दर बहुत अधिक लगाई जाती है। जिससे EMI की अवधि बढ़ जाती हैं।

EMI पर जुर्माना: हम सभी जानते हैं कि EMI महीने के एक निश्चित तिथि से पहले जमा की जाती है। अगर लोन धारक के द्वारा EMI चुकाने में देरी होती है तो उस EMI पर जुर्माना के रूप में अतिरिक्त शुल्क लगता है।

EMI को प्रभावित करने वाले कारक ( EMI Ko Prabhavit Karne Wale Karak )

मूलधन: यह वह धनराशि होती है जिसे किसी व्यक्ति के द्वारा किसी फाइनेंशियल बैंक या कॉरपोरेट्स संस्था से लोन के रूप में ली जाती है। लोन की EMI मूलधन पर निर्भर रहती है। अगर मूलधन अधिक होगा, तो EMI बढ़ेगी। और अगर मूलधन कम होगा, तो EMI कम होगी।

ब्याज की दर: यह लोन धारक के द्वारा लोन पर दिया गया एक प्रकार का अतिरिक्त शुल्क होता है। यह शुल्क बैंक या कॉर्पोरेट संस्थाओं के ऊपर निर्भर करता है।

लोन की अवधि: यह बैंक या कारपोरेट संस्थाओं के द्वारा लोन धारक को लोन चुकाने के लिए दिया गया समय होता है।

EMI कैलकुलेटर क्या है? (EMI Calculator Kya Hai)

EMI कैलकुलेटर एक प्रकार का डिजिटल टूल है जिसका प्रयोग एक निश्चित अवधि के लिए मूलधन पर ब्याज की दर की गणना करने के लिए किया जाता है। 

EMI कैलकुलेट करने का फार्मूला क्या है? (EMI Calculate Karne Ka Formula Kya Hai)

EMI से जुड़े हुए प्रश्न:

प्रश्न: EMI  का फुल फॉर्म क्या है?

उत्तर: EMI का फुल फॉर्म Equated Monthly Installment होता है।

प्रश्न: EMI का हिंदी अर्थ क्या होता है?

उत्तर: EMI का हिंदी में अर्थ समान मासिक किस्त होता है।

प्रश्न: EMI नियंत्रण के 3 तरीके क्या है?

उत्तर: EMI को कम करने या पूरी तरह से खत्म करने के लिए फिल्टरिंग, ग्राउंडिंग और शिल्डिंग की सहायता ली जाती है।

प्रश्न: EMI कैसे कैलकुलेट की जाती है?

उत्तर: EMI डिजिटल कैलकुलेटर से कैलकुलेट की जाती है।

प्रश्न: EMI नहीं चुकाने पर क्या होता है?

उत्तर: अगर लोन धारक फाइनेंसियल बैंकों तथा कॉरपोरेट संस्थाओं के द्वारा दिए गए समय पर लोन नहीं चुकाता है, तो बैंक EMI पर जुर्माना के रूप में अतिरिक्त शुल्क लेते हैं।

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