डिविडेंड क्या है | Dividend Kya Hai

अगर आप शेयर मार्केट से नियमित रूप से पैसे कमाना चाहते हैं। शेयर मार्केट से पैसे कमाने के बहुत सारे तरीके हैं- जैसे किसी कंपनी के शेयर को खरीद कर उस कंपनी के द्वारा मिलने वाले डिविडेंड। अब आपके मन में भी यह चल रहा होगा की आखिर ये डिविडेंड क्या है (Dividend kya hai) और यह इससे पैसे कैसे कमाए। इसके अलावा आप जानेंगे की

डिविडेंड क्या है डिविडेंड कितने प्रकार के होते है 
डिविडेंड का क्या काम होता है 
डिविडेंड साल में कितनी बार मिलता है
डिविडेंड के फायदे और नुकसान क्या हैं

डिविडेंड क्या है

डिविडेंड क्या है ( Dividend kya hai ) 

जब भी हम किसी कंपनी में निवेश करते हैं और अगर वह कंपनी अपने लाभ का कुछ हिस्सा निवेशकों में बाटती है, तो लाभ का जो हिस्सा निवेशकों को मिलता है, उसे ही हम डिविडेंड कहते हैं।

डिविडेंड कब और कैसे मिलता है ( Dividend kab aur kaise milta Hai )

जब भी कोई कंपनी लाभ कमाती है तो वह उस कमाए हुए लाभ  का दो तरह से उपयोग कर सकती है।

पहला वह उस कमाए हुए लाभ को किसी कंपनी मे Reinvest करके ताकि कंपनी को अगर फ्यूचर में बढ़ाना हो, तो वो इस लाभ का प्रयोग कर सके या फिर कोई कंपनी खरीदना  हो या कोई ऐसी चीज करनी हो जिसमें बड़ी धनराशि की जरूरत पड़ने वाला हो तो कंपनी उसे लाभ को अपने पास रख सकती है।

इसी लाभ को यूज करने का दूसरा तरीका है कि अपने निवेशक को डिविडेंड Pay करके। अगर कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर चाहें तो उस लाभ के कुछ हिस्से को डिविडेंड के रूप में अपने निवेशक में बाट सकते हैं। अधिकतर कंपनियां डिविडेंड को अपनी कंपनी के सारे Payout को पूरा करने के बाद शेष बचे लाभ में से तय करती है।

किसी कंपनी के द्वारा अपने निवेशकों को दिए जाने वाले फायदे

लाभांश (Dividend): किसी कंपनी के निवेशकों के लिए डिविडेंड दो तरह से Profitable होते हैं। पहला यह कि निवेश किया हुआ पूरा पैसा सुरक्षित रहता है और दूसरा की उस निवेश पैसे के माध्यम से अतिरिक्त आय भी मिलता रहता है। आमतौर पर डिविडेंड देने वाली कंपनियां profitable और ज्यादा मजबूत होती हैं। और उनसे भविष्य में अच्छे प्रदर्शन की संभावनाएं भी बन जाती है जिससे निवेशकों को एक अच्छी आय की संभावना बनी रहती है।

दुगुना लाभ (Double Benefits): कभी-कभी कंपनियां अपने निवेशकों को दोगुना लाभ प्रदान करती हैं। सबसे पहले निवेशकों को लंबे समय तक डिविडेंड इनकम की प्राप्ति होती रहती है। और दूसरे निवेशकों  को उनके शेयर के लिए अतिरिक्त आय मिलता रहता है इससे निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को भी बढ़ावा मिलता है।

लगातार आय (Consistent Income): प्राय: कुछ कंपनियां अपने निवेशकों को लगातार डिविडेंड देते हैं जिससे निवेशकों को अधिक पैसे जुटाने में मदद मिलती है।

मजबूत कंपनियां (Strong Companies): आमतौर पर डिविडेंड देने वाली कंपनियां लाभ से भरपूर होती है। यह हम कह सकते हैं कि डिविडेंड देने वाली कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत और प्रॉफिटेबल होती हैं। कंपनी के बारे में यह सारे तथ्य निवेशकों को कंपनी के प्रति इन्वेस्टमेंट योग्य बनाता है।

कम अस्थिरता (Low Volatility): डिविडेंड देने वाली अधिकतर कंपनियां फाइनेंसियली रूप से मजबूत और स्थिर होती हैं।

 डिविडेंड के फायदे ( Dividend ke fayde )

  • डिविडेंड कंपनी के द्वारा निर्धारित निवेशकों के लिए एक अच्छे इनकम का एक स्रोत है।
  • डिविडेंड से किसी कंपनी के निवेशकों को उस कंपनी के बारे में जानकारी मिलती रहती है। कि वह कंपनी भविष्य में लाभेबल है या नहीं।
  • रेगुलर डिविडेंड देने वाली कंपनियां निवेशकों के लिए स्थिर इनकम एवं विश्वास की ओर संकेत करती है।
  • किसी कंपनी के डिविडेंड से उसके निवेशकों को कंपनी के निर्णयों एवं कार्यक्रमों के बारे में उचित एवं सटीक जानकारी मिलती रहती हैं।
  • किसी कंपनी के द्वारा निवेशकों को मिलने वाली धनराशि को वह किसी अन्य कंपनी में भी निवेश कर सकता है।

डिविडेंड के नुकसान (Dividend ke nuksan) 

  • किसी कंपनी के द्वारा डिविडेंड देने से उस कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर काफी असर पड़ता है।
  • डिविडेंड देने से कंपनी के लाभ का कुछ हिस्सा चला जाता है जिससे कंपनी एक्सपेंड करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • अगर किसी कंपनी के पास डिविडेंड देने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है और वह फिर भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डिविडेंड पे करता है तो यह कंपनी के लिए खतरा हो सकता है।
  • कभी-कभी कंपनियां अपने निवेशकों को डिविडेंड देने के बजाय उनके शेयर को स्थायीरिजर्व करने का फैसला ले लेती है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है।
  • किसी निवेशक को जब डिविडेंड रिसीव होता है तो उसे अपने डिविडेंड का कुछ भाग टैक्स के रूप में पे करना पड़ता है जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। 

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Sabse Jyada Dividend Dene wali company सबसे ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनी 

अगर सही रूप में देखा जाए तो वही कंपनी ज्यादा डिविडेंड देती है, जो एक बड़े लेवल पर लाभ की कमाई करती हैं और ज्यादा profitable है। क्योंकि घाटा में चलने वाली कंपनी तो डिविडेंड दे ही नहीं सकती है क्योंकि ऐसी कंपनियां पहले से ही लॉस में चल रही है। और जो Growing कंपनी होती हैं वह अपने ज्यादातर लाभ को बिजनेस में ही निवेश करती है ताकि वह जल्दी से जल्दी अपने बिजनेस को और बड़ा  कर सके।

Dividend kitne prakar ke hote Hain ( डिविडेंड कितने प्रकार के होते हैं )

डिविडेंड मुख्य रूप से 6 प्रकार के होते हैं

  • Cash Dividend 
  • Stock Dividend 
  • Property Dividend 
  • Scrip Dividend 
  • Special Dividend 
  • Liquidation Dividend  

Cash Dividend kya Hai

जब किसी कंपनी को लाभ होता है और वह कंपनी अपने निवेशकों को डिविडेंड पे करना चाहती हैं। तो अगर उसके पास पर्याप्त कैश उपलब्ध है तो इस अवस्था में कंपनी अपना भुगतान कैश के रूप में करती है। यह डिविडेंड डायरेक्ट निवेशक के बैंक अकाउंट में भेज दिया जाता है।

Stock Dividend kya hai

Stock dividend: किसी कंपनी के द्वारा इस तरह के डिविडेंड देने का अनाउंसमेंट तब किया जाता है जब कंपनी के पास कैश की कमी हो। और अपने निवेशकों को डिविडेंड देना आवश्यक हो। इसके अंतर्गत निवेशकों के द्वारा रखे गए शेयर के अतिरिक्त कंपनी द्वारा शेयर दिए जाते हैं। और इन शेयर के लिए निवेशकों को किसी प्रकार का भुगतान नहीं करना पड़ता है।

Property Dividend kya hai

Property dividend: अगर किसी कंपनी द्वारा अपने निवेशकों को डिविडेंड देना अति आवश्यक है और कंपनी के पास पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है तो ऐसी अवस्था में कंपनी अपने प्रॉपर्टी को बेचकर उस से प्राप्त धन से अपने निवेशक को डिविडेंड देती है इस प्रकार के डिविडेंड को प्रॉपर्टी डिविडेंड्स कहा जाता है।

Scrip dividend kya hai

Scrip dividend: अगर किसी कंपनी के पास अपने निवेशकों को डिविडेंड देने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। तो वह अपने निवेशकों को ट्रांसफरेबल एग्रीमेंट जारी करती है। एग्रीमेंट में या मेंशन किया जाता है कि भविष्य में आने वाले किस डेट पर आपको डिविडेंड की भुगतान की जाएगी।

इस तरह के एग्रीमेंट कंपनी द्वारा तक जारी किए जाते हैं जब कंपनी के पास पर्याप्त लिक्विडिटी नहीं होती है। और उसे अपने असेट्स को कैश में परिवर्तित करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता होती है।

Special dividend kya hai

Special Dividend : जब किसी कंपनी को किसी स्कीम या प्रोडक्ट के माध्यम से अत्यधिक लाभ होता है तो कंपनी इस लाभ के कुछ भाग को अपने निवेशकों के साथ शेयर करती है। कंपनी के द्वारा दिया गया इस प्रकार का डिविडेंड स्पेशल डिविडेंड कहा जाता है। स्पेशल डिविडेंड जनरल डिविडेंड की तुलना में अधिक होता है। यह डिविडेंड रेगुलर पेमेंट पॉलिसी के अंतर्गत ना कर डायरेक्ट कंपनी द्वारा दिया जाता है।

Liquidation Dividend kya hai

Liquidation dividend: जब कोई कंपनी पूरी तरह से बंद होने वाली रहती हैं तब कंपनी अपने निवेशकों को डिविडेंड के रूप में Cash या Assets देती है। इसके भुगतान के लिए कंपनी अपने इकट्ठा किए हुए इनकम से करती है। इस तरह के डिविडेंड कंपनी अपनी सारी जिम्मेदारियां जैसे बैंकों के लोन को पूरा करने के बाद ही करती है।

मान लीजिए कंपनी के बंद होने के समय कंपनी के पास पर्याप्त संपत्ति या इनकम नहीं है जिससे वह अपने बैंकों के लोन एवं अन्य जिम्मेदारियों को पूरा कर पाए। इस अवस्था में कंपनी अपने निवेशकों  को डिविडेंड पे नहीं करती है।

डिविडेंड Time-Frequency के आधार पर दो तरह के होते हैं-

  • Interim Dividend 
  • Final Dividend  

इन दोनों में बहुत छोटा सा डिफरेंस है।

फाइनल डिविडेंड क्या है ( Final Dividend Kya Hai )

जब कोई कंपनी अपने फाइनल एनुअल एकाउंटिंग स्टेटमेंट के आधार पर साल के अंत में जो डिविडेंड अपने निवेशकों को देती है, उसे फाइनल डिविडेंड कहते हैं।

फाइनल डिविडेंड कब दिया जाता है (Final dividend kab Diya jata hai )

फाइनल डिविडेंड किसी निवेशक को तब मिलता है जब फाइनेंसियल ईयर के खत्म होने के बाद Annual General Meeting (AGM) में यह डिक्लेअर किया जाता है, कि सारे इक्विटी शेयर को डिविडेंड मिलने वाला है। मतलब जब किसी कंपनी के फाइनल एकाउंटिंग स्टेटमेंट बन जाते हैं और उन्हें पता चल जाता है कि उन्हें उस फाइनल ईयर में कितना लाभ हुआ है तब कंपनी फाइनल डिविडेंड को Announce करती है।

उदाहरण: मान लीजिए आपने किसी कंपनी में 500 शेयर खरीदा और कंपनी ने फाइनल ईयर में 15 रूपये प्रति शेयर डिक्लेअर किया है तो आपको टोटल 7500 रूपये का डिविडेंड मिलेगा।

इंटरिम डिविडेंड क्या है (Interim Dividend Kya Hai)

अगर कभी ऐसा हुआ कि कोई कंपनी अपने क्वार्टर टाइम में ही अच्छे खासे लाभ क्या रही है, तो हो सकता है कि कंपनी साल के बीच में ही डिविडेंड डिक्लेअर करे, उसे ही हम इंटरिम डिविडेंड कहते हैं।

इंटरिम डिविडेंड कब दिया जाता है (Interim dividend kab Diya jata hai)

यह डिविडेंड कंपनी कभी भी डिक्लेअर कर सकती है। आमतौर पर यह क्वार्टर रिजल्ट्स या सेमी क्वार्टर रिजल्ट के बाद ही डिक्लेअर होता है‌। इसमें फाइनल डिविडेंड की तरह फाइनल ईयर खत्म होने का वेट नहीं करना पड़ता है, और इसमें एजीएम (एनुअल जनरल मीटिंग) भी नहीं की जाती है।

डिविडेंड देने वाली कंपनी लिस्ट (Dividend Dene wali company list)

  • गैलेक्सी
  • यूनो मिंडा लिमिटेड
  • टीडी पावर लिमिटेड
  • AK कैपिटल सर्विसेज
  • स्टील सिटी सिक्योरिटीज
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स
  • Esab इंडिया लिमिटेड
  • श्रीराम पिस्टन एंड रिंग्स लिमिटेड

Dividend Eligibility 

आप डिविडेंड के लिए एलिजिबल है या नहीं। यह बहुत सारे फैक्टर पर निर्भर करता है। जैसे कि आप उस कंपनी में कितने वर्षों से इन्वेस्ट कर रहे हैं या अपने उस कंपनी के शेयर किस डेट पर खरीदे थे। तथा उस कंपनी की डिविडेंड पॉलिसी क्या है इन सब फैक्टर को ध्यान में रखकर कंपनी के बोर्ड ऑफ मेंबर और डायरेक्टर एलिजिबिलिटी चेक करते हैं, और उसके बाद डिविडेंड रिलीज करते हैं।

अगर आपने किसी कंपनी में निवेश किया है, और आप यह जानना चाहते हैं कि डिविडेंड लेने के लिए आप एलिजिबल है या नहीं। तो आपको कंपनी के निम्नलिखित डेट से नियमित रूप से जानकारी लेते रहना होगा।

  • Declaration date
  • Ex dividend date
  • Record date
  • Payment date

Declaration Date  Kya Hota Hai (डिक्लेरेशन डेट क्या होता है)

यह वह डेट है जब किसी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्ट डिविडेंड को अपना अप्रूव्ड देते है, और अनाउंस करते हैं कि इस साल वह डिविडेंड Pay करने वाले हैं।

इस डिक्लेरेशन डेट में डिविडेंड का Ex dividend date,  Record Date और Payment date भी बता दिया जाता है।

एक्स डिविडेंड डेट क्या होता है (Ex Dividend Date Kya Hota Hai)

रिकॉर्ड डेट के 2 दिन पहले के डेट को एक्स डिविडेंड डेट कहते हैं। जो निवेशक एक्स डिविडेंड डेट या उसके बाद शेयर खरीदते हैं, तो उन्हें डिविडेंड नहीं मिलता है। इसका मतलब है कि अगर आपको डिविडेंड चाहिए तो आपको उस कंपनी के शेयर एक्स डिविडेंड डेट से पहले ही खरीदने होंगे।

उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर किसी कंपनी का रिकॉर्ड डिविडेंड डेट 10 सितंबर है। तो उसका एक्स डिविडेंड डेट 8 अगस्त को होगा।

रिकॉर्ड डेट क्या होता है (Record Date  Kya Hota Hai)

इस डेट को कंपनी अनाउंस करती है कि डिविडेंड के लिए कौन से निवेशक एलिजिबल हैं और कौन से नहीं। तो जिस निवेशक का नाम रिकॉर्ड डेट मे होता है उसे कंपनी के द्वारा डिविडेंड मिलता ही है। अगर किसी ने रिकॉर्ड डेट के दिन ही उस कंपनी के शेयर को खरीदा है। तो वह इस डिविडेंड के लिए एलिजिबल नहीं होता है।

पेमेंट डेट क्या होता है (Payment Date  Kya Hota Hai)

इस डेट को कंपनी एलिजिबल निवेशकों को डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूट कर देती है।

मान लीजिए Interim Dividend पेमेंट डेट, अनाउंसमेंट डेट के 30 दिनों के बाद आती है। या मान लीजिए फाइनल डिविडेंड एजीएम (एनुअल जनरल मीटिंग) के 30 दिनों के बाद आती है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर किसी XYZ कंपनी ने 28 फरवरी को अनाउंसमेंट डेट किया कि वह डिविडेंड Pay करने वाले हैं। और 15 मार्च का उसका रिकॉर्ड डेट सेट किया, तो इस अवस्था में 13 मार्च उसकी एक्स डिविडेंड डेट हो जाएगी। 28 मार्च उसकी पेमेंट डेट हो जाएगी।

Declaration Date Ex Dividend DateRecord  DatePayment  Date
28 फरवरी13 मार्च15 मार्च 28 मार्च 

डिविडेंड पे करने पर कंपनी के शेयर, फाइनेंशियल हेल्थ का प्रभाव ( Dividend pay karne par company ke share financial health ka prabhav )

एक निवेशक के रूप में जब हम किसी कंपनी में निवेश करते हैं, और हमें डिविडेंड मिलता है तो बहुत अच्छा लगता है कि चलो कोई इनकम तो है जो हमें हमारी निवेशमेंट के बदले मिल रही है।

अगर देखा जाए तो कंपनी अपनी लाभ को डिविडेंड के रूप में ना देकर उसे Retain करके फ्यूचर में कंपनी के बड़ा ation के लिए यूज कर सकती हैं। लेकिन अगर कंपनी डिविडेंड दे रही है तो वह एक प्रकार से अपने लाभ को कम कर रही हैं। जिसकी वजह से कंपनी की इक्विटी भी डिक्रीज हो जाती है, और कैश फ्लो स्टेटमेंट में यह एक तरह का आउटफ्लो ही है। इस कारण फाइनेंसियल फ्लो नीचे गिरने लगता है। डिविडेंड देने से कंपनी की वैल्यू के ऊपर तो असर नहीं पड़ता है। लेकिन उसके शेयर प्राइस पर जरूर असर पड़ता है।

क्या कंपनी के लिए डिविडेंड पे करना सही है या नही (Kya company ke liye dividend pay karna sahi hai ya nahin)

डिविडेंड पे करना कहीं ना कहीं किसी कंपनी के इक्विटी पर असर डालती है। इस लेख के शुरुआत में ही हमने बताया है कि डिविडेंड और कुछ नहीं कंपनी के लाभ का ही एक हिस्सा होता है। जिसे कंपनी अपने निवेशकों में बाट  करती हैं।

जैसा ही कंपनी डिविडेंड डिक्लेयर करती हैं उसके शेयर प्राइस बढ़ जाते हैं क्योंकि अनाउंसमेंट डेट के बाद निवेशक ्स डिविडेंड पे करने वाली कंपनी के स्टॉक में निवेश करने लगते हैं, जिसकी वजह से उसके शेयर वैल्यू प्राइस बढ़ जाते हैं। परंतु जैसे ही रिकॉर्ड डेट को यह डिक्लेअर होता है कि कौन सा निवेशक डिविडेंड के लिए एलिजिबल है, उसके बाद उस कंपनी के शेयर प्राइस में कमी भी आ सकता है। वह निवेशक ्स जो इसमें सिर्फ डिविडेंड के लिए एंटर हुए थे वह अब उस कंपनी के शेयर सेल करने लगते हैं। यह जरूरी नहीं है कि हर कंपनी के साथ ऐसा ही हो परंतु यह एक संभावना व्यक्त की जा सकती है। जो कंपनी को फेस करना पड़ सकता है अगर हम इस हिसाब से सोचे हैं तो डिविडेंड पे करना कहीं ना कहीं कंपनी के लिए रिस्की हो सकता है ।

कंपनी डिविडेंड पे क्यों करती है Company dividend pay kyon Karti Hai

ऐसे बहुत से कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से कंपनी डिविडेंड पे करती है। चलिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानते हैं-

  • निवेशक पर ट्रस्ट बनाने के लिए ताकि वह लंबे समय तक निवेशक  रहे और डिविडेंड मिलने की वजह से फ्यूचर में और भी निवेश करें।
  • निवेशक को डिविडेंड के रूप में सम्मान देने से, उसकी कम्पनी के प्रति रूचि बढ़ने लगती है तथा वह अधिक मात्रा में निवेश करने लगता है।
  • कोई कंपनी डिविडेंड पे करती है तो ऐसा माना जाता है कि वह कंपनी अच्छा ग्रो कर रही है क्योंकि तभी तो वह डिविडेंड पे करना एफोर्ड कर पा रही है।
  • डिविडेंड स्टॉक में रेगुलर निवेश करने वाले निवेशक ्स को कंपनी डिविडेंड पे करने में इंटरेस्ट इसलिए लेती है क्योंकि डिविडेंड इनकम कुछ हद तक टैक्स फ्री होती है।
  • कंपनी निवेशकों को डिविडेंड इसलिए भी पे करती है क्योंकि इसमें कंपनी अपना कुछ नहीं जाता है, यह सिर्फ कंपनी के लाभ का कुछ हिस्सा होता है।

डिविडेंड यील्ड क्या होता है Dividend Yield Kya hota Hai

डिविडेंड यील्ड हमें यह बताता है की कंपनी का डिविडेंड प्रति शेयर करंट शेयर प्राइस के कितना गुना है। मान लीजिए एक्स वाई जेड कोई कंपनी है जिसके 100 शेयर आपने खरीदे हैं और उस कंपनी ने ₹5 प्रति शेयर डिविडेंड अनाउंस किया है तो आपका टोटल डिविडेंड ₹500 हो जाएगा और अगर मान लेते हैं कि इस कंपनी के करंट शेयर प्राइस हैं ₹100 प्रति शेयर तो इसका मतलब डिविडेंड यील्ड होगा एनुअल डिविडेंड पर शेयर डिवाइडेड बाय करंट मार्केट प्राइस ऑफ़ 1 शेयर इन टू 100

तो अगर हम इस कंपनी में हैं निवेश करते हैं तो तो 5 परसेंट गिटार डिविडेंड के थ्रू मिल सकता है जैसे-जैसे कंपनी की शेयर प्राइस अधिक होगी, डिविडेंड यील्ड कम‌ होगी। इसके विपरीत भी हो सकता है जैसे-जैसे कंपनी की शेयर प्राइस कम होगी, वैसे वैसे डिविडेंड यील्ड अधिक होगी।

इसी कारण से बहुत से लोग धोखा खा जाते हैं की कंपनी डिविडेंड तो बहुत अच्छे दे रही हैं और लोग इसको अवॉइड करने लगते है। और ध्यान नहीं देते हैं। अगर आप एक निवेशक  है तो आपको शेयर का पास्ट प्राइस भी देखनी जरूरी होती है। और यह जानना जरूरी होता है कि आखिर कंपनी के लाभ बढ़ जाने की वजह से कंपनी डिविडेंड ज्यादा दे रही है या शेयर प्राइस घट जाने की वजह से।

डिविडेंड यील्ड फॉर्मूला (Dividend Yield Formula)

डिविडेंड यील्ड रेशियो क्या होता है (Dividend Yield Ratio Kya Hota Hai)

डिविडेंड यील्ड रेशियो एक ऐसा गणितीय सिद्धांत है जिसके द्वारा दो डिविडेंड पेइंग कंपनी का तुलना किया जाता हैं कि कौन सी कंपनी अपने शेयर प्राइस के अनुसार ज्यादा डिविडेंड दे रही है।

डिविडेंड यील्ड रेशियो का प्रयोग कौन करता है Dividend ratio ka prayog kaun kaun karta hai

डिविडेंड यील्ड रेशियो अधिकतर उन निवेशकों के लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है जो लोग ज्यादातर डिविडेंड स्टॉक में रेगुलर निवेश करते हैं। जिससे प्रयोग से वो किसी दो डिविडेंड पेइंग कंपनी के डिविडेंड की तुलना कर सकते हैं कि कौन सी कंपनी अपने शेयर प्राइस के अनुसार ज्यादा डिविडेंड दे रही है। 

डिविडेंड पेऑउट रेशियो क्या होता है (Dividend Payout Ratio Kya Hota Hai)

डिविडेंड पेऑउट रेशियो हमें कंपनी के Paid डिविडेंड और नेट लाभ के बीच का रिलेशन बताता है। डिविडेंड पेऑउट रेशियो हमें यह बताता है कि नेट लाभ में से कितना प्रतिशत, निवेशकों में डिविडेंड के रूप में डिस्ट्रीब्यूटर हुआ है और कितना प्रतिशत रिजर्व के रूप में रखा गया है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी कंपनी का डिविडेंड पेआउट रेशियो 40 प्रतिशत है। मतलब उस कंपनी के नेट लाभ का 40 प्रतिशत डिविडेंड पे करने में गया है। और बाकी बचा 60% उन्होंने कंपनी में रिटेन किया है जिसे वो अपने किसी फ्यूचर प्लान के लिए रखते हैं।

डिविडेंड पेऑउट रेशियो कब देखा जाता है (Dividend payout ratio kab dekha jata hai)

यह रेशियो किसी कंपनी में तब देखा जाता है जब किसी कंपनी में हमें यह देखना हो कि उस कंपनी की डिविडेंड पे करने में कितनी एबिलिटी है और उस कंपनी की Priorities क्या है, और कंपनी अपने लाभ का कितना भाग रिटेन करती है और कितना भाग डिविडेंड के रूप में पे करती है।

डिविडेंड इनकम पर कितना टैक्स लगता है (Dividend income per Kitna tax lagta hai)

मार्च 2020 तक डिविडेंड इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता था, क्योंकि जब कोई कंपनी डिविडेंड पे करती थी तो वह पहले ही DDT (डिविडेंड डिसटीब्यूशन टैक्स) पे कर देती थी इसलिए निवेशकों को दस लाख के कम के डिविडेंड पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था।

परंतु 1 अप्रैल 2020 से रूल को पूरी तरह से बदल दिया गया। अगर निवेशकों को कोई भी डिविडेंड रिसीव होता है तो डिविडेंड के ऊपर 10% टैक्स देना होता है क्योंकि पहले गवर्नमेंट कंपनी से डीडीटी लेती थी वह कंपनियों ने डीडीटी देना बंद कर दिया है। इसलिए अगर किसी भी निवेशक  को पांच हजार से ऊपर डिविडेंड रिसीव होता है, तो उस पर आपको 10% टीडीएस टैक्स ऑलरेडी कट होकर रिसीव होगा।

परंतु बीच मे कोविड-19 के आने के कारण 14 मई 2020 से 3 मार्च 2021 तक इसी टीडीएस टैक्स को 10% से घटाकर 7.5% कर दिया गया था। लेकिन फिर से मार्केट खुल जाने के कारण TDS टैक्स को फिर से पहले की तरह 10% हो चुका है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने किसी कंपनी से 6000 डिविडेंड इनकम रिसीव किया, तो चूंकी प्राप्त डिविडेंड 5000 से अधिक है। डिविडेंड आपको 10% टीडीएस कट होकर मिलेगा।

डिविडेंड पॉलिसी क्या है (Dividend policy kya hai)

डिविडेंड पॉलिसी Rules और Guidelines की एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत यह निर्धारित किया जाता है कि कोई कंपनी अपने लाभ का कितना भाग अपने निवेशक को डिविडेंड के रूप में देगी। डिविडेंड पॉलिसी के बारे में और अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

प्रश्न: डिविडेंड का मतलब क्या होता है

उत्तर: डिविडेंड का हिंदी मतलब लाभांश होता है।

प्रश्न: डिविडेंड साल में कितनी बार मिलता है

उत्तर: यह कंपनी के लाभ एवं कंपनी के रूल एंड गाइडलाइंस पर निर्भर करता है कि वह कंपनी साल में कितनी बार डिविडेंड पे करती है। कुछ कंपनियां साल में एक बार डिविडेंड पे करती हैं और कुछ कंपनियां अधिक लाभ होने के कारण साल में दो या तीन बार डिविडेंड पर करती हैं।

प्रश्न: सबसे ज्यादा डिविडेंड कौन सा शेयर देता है

उत्तर: टाटा स्टील के शेयर सबसे ज्यादा डिविडेंड देते हैं। क्योंकि टाटा स्टील सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनियों में से एक है। टाटा स्टील अपने निवेशकों को बनाए रखने एवं उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए डिविडेंड देती रहती है। टाटा स्टील सबसे ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियों की लिस्ट में पहले स्थान पर हैं। क्योंकि यह अपने निवेशकों को सबसे ज्यादा डिविडेंड देती है।

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