कंप्यूटर के प्रकार | Computer ke Prakaar

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कंप्यूटर के प्रकार-नमस्कार दोस्तों, आज की इस लेख में आप सभी का स्वागत है। आज की इस लेख में आपको कंप्यूटर के प्रकार के बारे में जानने को मिलेगा। इस लेख में आप एनालॉग कम्प्यूटर, डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer) , हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer) , माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) , डेस्कटॉप कम्प्यूटर (Desktop Computer) , लैपटॉप (Laptop) , पामटॉप (Palmtop) , टैबलेट पर्सनल कम्प्यूटर (Tablet Personal Computer) , सुपर कम्प्यूटर (Super Computer) आदि जैसे अनेको कंप्यूटर के बारे में जानेंगे।

कंप्यूटर के प्रकार | Computer ke Prakaar

हम सभी लोग अपने जीवन में कभी न कभी कंप्यूटर का प्रयोग तो किया ही होगा| लेकिन क्या आप जानते है की कंप्यूटर कितने प्रकार के होते है आज की इस लेख में आप इसी के बारे में जानने वाले है इसके पिछले लेख में आपने कंप्युटर का जनक , कंप्यूटर किसे कहते है इसके बारे मे अवश्य पढ़ा होगा|

कम्प्यूटर का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के कार्यों को पूर्ण करने के लिए किया जाता है। सभी कम्प्यूटरों का मूल डिज़ाइन समान होने के बाद भी कम्प्यूटर अपने उद्देश्य एवं क्षमता के अनुसार अनेक प्रकार के होते हैं। अतः कम्प्यूटरों को इनके डिज़ाइन, आकार व क्षमता तथा उद्देश्य के आधार पर वर्गीकृत करना ही सुगम होगा।

हम मुख्यतः तीन आधारों पर कम्प्यूटरों के प्रकार के बारे में जानेंगे|

  1. अनुप्रयोगों के आधार पर (On the Basis of Applications)
  2. आकार और क्षमता के आधार पर (On the Basis of Size and Capacity)
  3. उद्देश्य के आधार पर (On the Basis of Purpose)

अनुप्रयोगों के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

अनुप्रयोगों के आधार पर कम्प्यूटर तीन प्रकार के होते हैं, इनका संक्षिप्त परिचय निम्नवत् हैं

(i) एनालॉग कम्प्यूटर

ये ऐसे कम्प्यूटर होते हैं, जो इनपुट के रूप में डेटा या आँकड़ों के स्थान पर कोई गुणवाचक सूचना (Qualitative Information) लेते हैं और आउटपुट भी गुणवाचक ही प्रदान करते हैं। इसे समझने के लिए अपने घर के फ्रिज या टीवी के साथ लगे स्टेबलाइज़र पर ध्यान दीजिए। इसमें लगा हुआ मीटर या संकेतक हमें यह बताता है कि इनपुट के रूप में वोल्टेज कितना है और आउटपुट कितना आ रहा है। एनालॉग कम्प्यूटर वोल्टेज का उतार-चढ़ाव उसकी सुई (या संकेतक) के घूमने से पता चलता है, जिसे ठीक-ठीक संख्याओं में बदला जा सकता है।

एनालॉग कम्प्यूटर भी इनपुट (Input) के रूप में ऐसी ही चीजें ग्रहण करता है, जिन्हें लगातार नापा जा सके; जैसे-तापमान (Temperature) , दबाव (Pressure) , आयतन (Volume) , वोल्टेज (Voltage) , प्रतिरोध (Resistance) , गति (Speed) , त्वरण (Acceleration) , वज़न (Weight) आदि। दूसरे शब्दों में, एनालॉग कम्प्यूटर में इनपुट लगातार सी.पी.यू. में जाता रहता है, जहाँ उसके ऊपर क्रियाएँ की जाती हैं और आउटपुट भी लगातार आता रहता है। ऐसे कम्प्यूटर का उपयोग मुख्यतः शोध और उत्पादन के क्षेत्रों में होता है, अतः ये कम संख्या में पाए जाते हैं। उदाहरण, स्पीडोमीटर, भूकम्प सूचक यन्त्र आदि।

(ii) डिजिटल कम्प्यूटर

अंकों की गणना करने के लिए डिजिटल कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है। ये इनपुट के रूप में संख्याएँ या आँकड़े लेते हैं, जहाँ उन पर अंकगणितीय क्रियाएँ की जाती हैं तथा आउटपुट के रूप में हमें आँकड़े ही प्रदान करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि इनके लिए प्रत्येक सूचना को अंकों में बदला जा सकता है, इस कारण इनकी शुद्धता भी अधिक होती है। इन कम्प्यूटरों का प्रयोग वैज्ञानिक तथा व्यापारिक सभी तरह के कार्यों में किया जाता है। इनकी उपयोगिता भी बहुत होती है, क्योंकि एक ही कम्प्यूटर पर सभी तरह के कार्य किए जा सकते हैं इसलिए आजकल अधिकतर स्थानों पर डिजिटल कम्प्यूटर ही पाए जाते हैं। उदाहरण, डेस्कटॉप कम्प्यूटर, लैपटॉप आदि।

(iii) हाइब्रिड कम्प्यूटर

कम्प्यूटर एनालॉग तथा डिजिटल दोनों प्रकार के कम्प्यूटरों के मिले-जुले रूप होते हैं। इनमें इनपुट के रूप में प्राप्त होने वाली कोई भी सूचना लगातार आँकड़ों में बदलकर दिखाई जाती है तथा आउटपुट एनालॉग के साथ-साथ अंकीय (Numerical) भी होता है। ऐसे कम्प्यूटरों का उपयोग कारखानों, मशीनों आदि में बड़ी संख्या में किया जाता है, लेकिन उपयोगिता में ये डिजिटल कम्प्यूटरों का मुकाबला नहीं कर सकते। उदाहरण, ECG और DIALYSIS मशीन, मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)

Computer ke Prakaarकंप्यूटर के प्रकार
कंप्यूटर के प्रकार

2. आकार और क्षमता के आधार पर (On the Basis of Size and Capacity)

आकार तथा क्षमता के आधार पर कम्प्यूटर को मुख्यत: चार वर्गों में बाँटा जाता है, इन वर्गों के कम्प्यूटरों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् हैं

माइक्रो कम्प्यूटर

ये आकार में बहुत छोटे होते हैं और माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) के साथ इनपुट / आउटपुट (Input / Output) तथा भण्डारण उपकरण (Storage Device) जोड़कर तैयार किए जाते हैं। माइक्रोप्रोसेसर वास्तव में एक सी.पी.यू. होता है, जो एक छोटी—सी चिप पर समा जाता है। ये आकार में इतने छोटे होते हैं कि एक मेज पर भी रखे जा सकते हैं। इन पर एक बार में एक ही व्यक्ति काम कर सकता है। इनकी मुख्य मैमोरी का आकार 16 मेगाबाइट से लेकर 256 मेगाबाइट या और अधिक भी हो सकता है।

माइक्रो कम्प्यूटर कई प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं—

डेस्कटॉप कम्प्यूटर

यह पर्सनल कम्प्यूटर का सबसे अधिक उपयोग होने वाला रूप (Form) है। इस तथ्य के बावजूद कि PCs को छोटा करके आज लैपटॉप और पामटॉप का आकार दे दिया है, फिर भी अधिकांश घरों और व्यापारिक स्थानों पर आपको डेस्कटॉप ही मिलेंगे, क्योंकि ये सस्ते, टिकाऊ और ज्यादा चलने वाले होते हैं।

लैपटॉप

(b) विगत् कुछ वर्षों में हुए तकनीकी विकास ने माइक्रो कम्प्यूटरों का आकार इतना सूक्ष्म कर दिया है कि उन्हें सरलतापूर्वक इधर-उधर ले जाया जा सकता है और साधारण व्यक्ति भी उनको खरीदकर, उपयोग में ला सकता है। ऐसे कम्प्यूटरों को लैपटॉप कहा जाता है। लैपटॉप को कभी-कभी नोटबुक (Notebook) भी कहा जाता है।

पामटॉप

यह लैपटॉप की तरह पोर्टेबल पर्सनल कम्प्यूटर है। यह लैपटॉप से भी हल्का और छोटा होता है। यह हैण्डहेल्ड ऑपरेटिंग प्रणाली का इस्तेमाल करता है।

टैबलेट पर्सनल कम्प्यूटर

टैबलेट और लैपटॉप एक तरह से समान हैं परन्तु टैबलेट PC, नोटबुक कम्प्यूटर से ज्यादा सुविधाजनक है। ये दोनों ही पोटेंबल हैं परन्तु प्रयुक्त सॉफ्टवेयर, स्क्रीन आदि की विभिन्नता से दोनों में अन्तर है। टैबलेट PC की स्क्रीन पर यूज़र बिना कीबोर्ड की सहायता से लिख सकते हैं परन्तु नोटबुक पर नहीं।

पर्सनल डिजिटल असिस्टैन्ट

पर्सनल डिजिटल असिस्टैन्ट एक पोर्टेबल कम्प्यूटर ही है, लेकिन यह सभी कार्य नहीं कर सकता। मुख्यतः इसका उपयोग छोटे आँकड़ों और सूचनाओं; जैसे-फोन नम्बर, ई-मेल, पता आदि के भण्डारण में किया जाता है।

वर्कस्टेशन

यह अभियान्त्रिकी, तकनीकी और ग्राफिक्स के कार्यों के साथ-साथ कम्प्यूटर के एकल व्यक्ति के साथ पारस्परिक व्यवहार में भी प्रयोग होता है।

मिनी कम्प्यूटर

ये आकार में माइक्रो कम्प्यूटर से कुछ बड़े और क्षमता में बहुत अधिक होते हैं। इनकी मुख्य मैमोरी का आकार 64 मेगाबाइट से लेकर 512 मेगाबाइट या और अधिक भी हो सकता है। इन पर एक साथ कई लोग कार्य कर सकते हैं और एक साथ एक से ज्यादा प्रोग्राम चल सकते हैं। इन कम्प्यूटरों में आवश्यकतानुसार डिस्क ड्राइव, लाइन प्रिण्टर आदि अलग से जोड़े जा सकते हैं। इनका मूल्य साधारण तथा बड़ी कम्पनियों द्वारा वहन करने योग्य होता है। इनका उपयोग शोध, विद्यालयों और इंजीनियरिंग के कार्यों में किया जाता है। उदाहरण, CDC 1700, SDS-92

मेनफ्रेम कम्प्यूटर

ये आकार में मिनी कम्प्यूटर से काफी बड़े और क्षमता में भी बहुत अधिक होते हैं। इनकी मुख्य मैमोरी का आकार 256 मेगाबाइट से लेकर 2 गीगाबाइट तक होता है। इन पर एक साथ सैकड़ों व्यक्ति कार्य कर सकते हैं। इन कम्प्यूटरों के लिए एयरकण्डीशनिंग अनिवार्य होती है, ताकि तापमान 20 ° C से 25 ° C तक बना रहे। इनमें ऑनलाइन डेटा स्टोरेज की विशेष सुविधा होती है।

इन कम्प्यूटरों का मूल्य बहुत अधिक होता है। इन कम्प्यूटरों को सैटेलाइट के माध्यम से जोड़कर एक देशव्यापी या विश्वव्यापी नेटवर्क बनाया जा सकता है। इस प्रकार के कम्प्यूटरों का उपयोग एयरलाइनों में टिकटिंग, प्रसारण, विज्ञापन, विक्रय, केन्द्रीकृत वेतन-गणना प्रणाली, उत्पादन नियोजन एवं नियन्त्रण आदि महत्त्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। उदाहरण, IBM ZSeries, System Z9

सुपर कम्प्यूटर

ये कम्प्यूटर आकार में विशाल और गति में मेनफ्रेम कम्प्यूटरों से भी सैंकड़ों-हजारों गुना तेज होते हैं। इनमें समान्तर प्रोसेसिंग (Parallel Processing) की क्षमता होती है, जिसमें कई गणना अलग-अलग चरणों में करने के स्थान पर एक साथ की जाती है कि जल्दी पूर्ण हो जाए। ये ऐसे कार्यों में प्रयोग किए जाते हैं, जिनमें लम्बी और जटिल गणनाएँ करनी पड़ती हैं; जैसे-मौसम अनुमान, अन्तरिक्षयान, उपग्रह प्रक्षेपण, मिसाइल निर्माण, परमाणु विस्फोट आदि।

इनकी कीमत भी करोड़ों रूपयों में होती है। सुपर कम्प्यूटर बनाने वाली प्रमुख कम्पनियों के नाम इस प्रकार हैं-क्रे रिसर्च (CRAY Research) , आई.टी.ए. सिस्टम्स (I.T.A. Systems) , हिताची (Hitachi) , एन.ई.सी. (N.E.C.) आदि। इनके द्वारा बनाए गए कुछ प्रमुख सुपर कम्प्यूटर्स CRAY 1, CRAY 2, CRAY X-MP, CRAY 3, I.T.A. आदि हैं। भारत के प्रथम सुपर कम्प्यूटर का नाम ‘परम’ (PARAM) है। इसका विकास C-DAC ने किया था। इसका विकसित रूप ‘परम-10000’ भी तैयार कर लिया गया है।

उद्देश्य के आधार पर (On the Basis of Purpose)

प्रत्येक कम्प्यूटर की स्थापना का कोई विशेष उद्देश्य होता है। उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटर को दो वर्गों में बाँटा जाता है, जो निम्नवत् है

सामान्य उद्देशीय कम्प्यूटर

ये ऐसे कम्प्यूटर होते हैं, जिनमें प्रायः सभी प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है। दूसरे शब्दों में, ऐसे कम्प्यूटर पर प्रायः सभी प्रोग्राम चलाए जा सकते हैं और विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा सकते हैं; जैसे-पत्र या दस्तावेज तैयार करना, गणनाएँ करना, छोटे डेटाबेस तैयार करना, आदि। आजकल पाए जाने वाले अधिकांश कम्प्यूटर इसी प्रकार के होते हैं। ऐसे कम्प्यूटरों का मूल्य कम और क्षमताएँ सीमित होती हैं।

विशेष उद्देशीय कम्प्यूटर

ये ऐसे कम्प्यूटर होते हैं, जो किसी विशेष कार्य को पूर्ण करने के लिए तैयार किए जाते हैं और कार्य की आवश्यकतानुसार ही उसमें-सी । पी । यू आदि आन्तरिक अवयव तथा बाहरी उपकरण जोड़े जाते हैं। कई बार इनमें एक से अधिक प्रोसेसर भी जोड़ दिए जाते हैं। उदाहरण, मौसम का अनुमान लगाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला कम्प्यूटर इस उद्देश्य से बनाया जाता है कि वह अधिक-से-अधिक गणनाएँ कम-से-कम समय में कर सके।

मल्टीमीडिया कम्प्यूटर भी विशेष उद्देशीय कम्प्यूटर होते हैं। जिनका उपयोग संगीत तथा फिल्में तैयार करने या सम्पादित करने में किया जाता है। इनके अतिरिक्त जनगणना, उपग्रह प्रक्षेपण, शोध, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, खनन, यातायात नियन्त्रण, मोबाइल सेवा आदि में विशेष उद्देशीय कम्प्यूटरों का उपयोग किया जाता है।

इस लेख के अंत में:

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