Bitcoin क्या है | Bitcoin Kya Hai

बिटकॉइन 21वीं सदी में पैसा बनाने के लिए बनाया गया एक ऐसा टोकन है जो डिजिटल क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति के रूप में उभर कर आया है। यह डिजिटल टोकन इंडस्ट्रियल एवं फाइनेंसियल संस्थाओं में निवेश का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। बिटकॉइन दुनियाभर के उपयोगकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा पॉपुलर डिजिटल करेंसी है। यह सबसे ज्यादा बिजनेस में उपयोगी डिजिटल टोकन है। बिटकॉइन को समझकर या जानकारी लेकर जिन लोगों ने निवेश किया है बिटकॉइन ने उन्हें एक अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है। तो आइए जानते हैं बिटकॉइन क्या है (Bitcoin Kya Hai) इसका इतिहास क्या है? इसकी विशेषताएं क्या है?

Bitcoin Kya Hai
Bitcoin Kya Hai

बिटकॉइन क्या है? (Bitcoin Kya Hai)

बिटकॉइन विश्व का सबसे पहला और पूरे विश्व में सबसे ज्यादा पॉपुलर क्रिप्टो करेंसी है। हालांकि डिजिटल करेंसी को बनाने के लिए इससे पहले भी कई कोशिशें की गई, परंतु सफल नहीं हुई। यहां तक कि बिटकॉइन को बनाने में भी शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष एवं प्रयास करना पड़ा था।

यह सामूहिक रूप से कंप्यूटर नेटवर्क पर आधारित एक दूसरे के बीच भुगतान के लिए कंप्यूटर इंक्रिप्शन के द्वारा सुरक्षित किया गया एक कंप्यूटरीकृत करेंसी है है।

वास्तव में बिटकॉइन का कोई भौतिक स्वरूप नहीं है, यह एक डिजिटल वर्चुअल करेंसी है। वर्चुअल करेंसी ऐसी करेंसी होती है जिसे आप ना तो देख सकते और ना ही छू सकते हैं। इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। यह सामान्य बाजार एवं लोगों के बीच में चलने वाले सिक्के और नोट की तरह नहीं है। जिसे छुआ या देखा जा सके। यह केवल डिजिटल स्टोर पर पाई जाती है। अगर किसी व्यक्ति के पास बिटकॉइन है तो वह कॉइन का प्रयोग किसी को बेचने या खरीदने, इन्वेस्ट करने, या ट्रेडिंग करने का काम कर सकता है। इसे क्रिप्टो करेंसी की भाषा में Bitcoin (BTC) के नाम से भी जाना जाता है।

आज के समय में बिटकॉइन एक बड़ी मात्रा में दुनिया भर में अलग-अलग प्लेटफार्म पर खरीदारी करने में, इन्वेस्टिंग के रूप में तथा कुछ कुछ देशों में सेकेंडरी पेमेंट के रूप में भी स्वीकार किया जा रहा है।

बिटकॉइन की विशेषताएं

  • बिटकॉइन की सबसे खास बात यह है कि यह क्रिप्टो करेंसी मार्केट में में आने वाली पहली क्रिप्टो कॉइन थी।
  • पहला क्रिप्टो करेंसी के विकसित होने से हजारों प्रतिस्पर्धा योजनाओं को निर्माण करने के लिए प्रेरित किया है।
  • बिटकॉइन ट्रांजैक्शन को डिजिटल रूप से वेरिफिकेशन करने के लिए क्रिप्टोग्राफी टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है।
  • यह पूरे विश्व में लाखों लोगों के लिए एक पूरी तरह से नया उद्योग को जन्म देने में सफल रहा है। जिसमें लोग बिटकॉइन एवं अन्य क्रिप्टो करेंसी का उपयोग निवेश और व्यापार में करते हैं।
  • विश्व में पूरा क्रिप्टो करेंसी मार्केट लगभग अब 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य का है। बिटकॉइन एक ऐसा क्रिप्टो करेंसी है जो दुनिया में कहीं भी (जिन देशों में क्रिप्टो कॉइन प्रतिबंधित है उन देशों को छोड़कर) बैंक एवं वित्तीय सेवा कंपनियों के मध्यस्थता के बिना भेजा एवं प्राप्त किया जा सकता है
  • बिटकॉइन एक लंबे समय से संपूर्ण क्रिप्टो करेंसी मार्केट में अपने ऊर्जा के कारण शीर्ष पर बना हुआ है।
  • बिटकॉइन की मात्रा सीमित है इसलिए इसके मूल्य के बढ़ने एवं घटने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

बिटकॉइन का मालिक कौन है? (Bitcoin Ka Malik Kaun Hai)

बिटकॉइन का संस्थापक सतोशी नाकामोटो को माना जाता है। सतोशी नाकामोटो के पहचान के बारे में कोई भी सही डिटेल किसी के भी पास नहीं है। मतलब सतोशी नाकामोटो के बारे में कोई नहीं जानता है। ऐसा माना जाता है कि सतोशी नाकामोटो एक गुमनाम व्यक्ति या एक समूह के द्वारा दिया गया उपनाम है।

बिटकॉइन के बारे में यह कहा जाता है कि 31 अक्टूबर 2008 में सतोशी नाकामोटो ने इसे पहली बार बिटकॉइन को ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर से वाइट पेपर के रूप में जारी किया था। जिसमें पियर टू पियर ऑनलाइन करेंसी के लेनदेन के बारे में जानकारी दी गई थी। इसमें यह शर्त रखा गया था कि इसमें लेनदेन की प्रक्रिया एक डिसेंट्रलाइज्ड बहीखाता के रूप में किया जाएगा, जिसे ब्लॉक कहा जाएगा। और यह बहीखाता क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिथम्स के द्वारा सुरक्षित किया जाएगा और बाद में इस पूरे सिस्टम को ब्लॉकचेन के नाम से जाना जाने लगा।

इसके ठीक 2 महीने बाद 3 जनवरी 2009 को नाकामोटो ने कंप्यूटर नेटवर्क पर पहले ब्लॉक का खनन किया। इस ब्लॉक को जेनेसिस ब्लॉक के रूप में जाना जाता है। और इस प्रकार दुनिया के पहले क्रिप्टो करेंसी का जन्म हुआ। दुनिया के पहले क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन की कीमत $0 थी। उस समय जितने भी बिटकॉइन प्राप्त किए गए थे उनमें से अधिकांश बिटकॉइन माइनिंग के माध्यम से प्राप्त किए गए थे। माइनिंग करने में कुछ मामूली शक्तिशाली उपकरण जैसे पर्सनल कंप्यूटर और माइनिंग सॉफ्टवेयर की आवश्यकता थी। इसलिए इन बिटकॉइन्स की कीमत बहुत ही कम थी।

पहली बार बिटकॉइन का बाजार मे लेनदेन 22 मई 2010 को तब हुआ जब बिटकॉइन प्रोग्रामर लास्जलो हनईक्ज ने दो पिज़्ज़ा खरीदने के लिए दस हजार बिटकॉइन का उपयोग किया था। इस घटना को विश्व के इतिहास में ‘बिटकॉइन पिज़्ज़ा डे’ के रूप में जाना जाता है। बिटकॉइन ने पहली बार ट्रेडिंग की शुरुआत जुलाई 2010 में की, उस समय बिटकॉइन की कीमत लगभग 0.0008 डॉलर से 0.08 डॉलर के बीच थी।

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बिटकॉइन का प्रमुख डेवलपर कौन है?

हालांकि बिटकॉइन के मूल आविष्कारक एवं इसके पहले कार्यान्वयन के लेखक के रूप में सतोशी नाकामोटो माने जाते हैं। फिर भी नाकामोटो ने नेटवर्क अलर्ट कुंजी और कंट्रोल कोड का सारा नियंत्रण एवं अधिकार को Gavin Andresen को दे दिया। बाद में गेविन एंड्रेसन बिटकॉइन फाउंडेशन के प्रमुख डेवलपर बन गए। गेविन एंड्रेसन ने वर्षों से बिटकॉइन से संबंधित कमजोरियों एवं लोगों की परेशानियों को दूर करके और नई नई सुविधाओं को जोड़कर क्रिप्टो करेंसी के सॉफ्टवेयर को और बेहतर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बिटकॉइन डेवलपर लिस्ट

बिटकॉइन के कंट्रोल कोड के Github (an internet hosting service for software development and version control using Git) लिस्ट में अब तक 750 से भी अधिक योगदान देने वालों के नाम दर्ज हैं।

टॉप 5 बिटकॉइन डेवलपर्स

  • Wladimir J.
  • Pieter Wuille
  • Jonas Schnelli
  • Van Der Laan
  • Marco Falke

बिटकॉइन कैसे काम करता है? (Bitcoin Kaise Kam Karta Hai)

  • सर्वप्रथम बिटकॉइन आपके कंप्यूटर या मोबाइल में बिटकॉइन वॉलेट स्थापित करता है।जिसमें आप बिटकॉइन को आसानी से रख सकते हैं।
  • बिटकॉइन वॉलेट एक ईमेल की तरह काम करता है फर्क बस इतना है कि इसका उपयोग यूजर केवल एक बार ही कर सकता है।
  • बिटकॉइन वॉलेट ब्लॉकचेन पर आधारित एक पब्लिक लेजर अकाउंट है जिस पर पूरा बिटकॉइन नेटवर्क निर्भर रहता है।
  • बिटकॉइन वॉलेट पासवर्ड को बहुत ही गुप्त रखा जाता है क्योंकि या पासवर्ड बिटकॉइन के लेन देन प्रयोग किया जाता है।
  • बिटकॉइन वॉलेट ब्लॉकचेन की मदद से बिटकॉइन लेनदेन से संबंधित राशि की गणना एवं लेनदेन को डिजिटल हस्ताक्षर कर सत्यापित करता है।
  • एक बार डिजिटल हस्ताक्षर सत्यापित होने के बाद लेनदेन की प्रक्रिया किसी भी अन्य यूजर के द्वारा बदलने से रोकता है।
  • अंत में लेनदेन की पूरी प्रक्रिया को आसान और तेजी तेजी के साथ पूरा कर देता है।

बिटकॉइन के फायदे क्या है?

  • बिटकॉइन एक डिसेंट्रलाइज्ड क्रिप्टो करेंसी है, मतलब इस पर किसी भी देश के सरकार या वित्तीय संस्थाओं का कोई अधिकार नहीं है। तथा कोई भी देश इसमें होने वाले लेनदेन के बारे में जानकारी नहीं मांग सकता है।
  • बिटकॉइन का लेनदेन ऑनलाइन पियर टू पियर होता है, मतलब इसमें लेनदेन सीधे खरीदार एवं बेचने वाले के बीच स्वतंत्र रूप से होता है इसमें किसी भी प्रकार के ब्रोकर की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इसका लेनदेन एक डिजिटल भुगतान व्यवस्था के द्वारा किया जाता है, जिसे बदला नहीं जा सकता है।
  • बिटकॉइन यूजर के पास कोई भी परमानेंट अकाउंट, सामाजिक कोड या नाम नहीं होता है मतलब इसमें खरीदने वाले और बेचने वाले सभी गुमनाम होते हैं।
  • बाजार में प्रचलित डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य बैंकिंग वेबसाइटों या एप्लीकेशन से लेनदेन करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। परंतु बिटकॉइन के लेनदेन में किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • आमतौर पर बाजार में चलने वाले डेबिट या क्रेडिट कार्ड की कुछ न कुछ लिमिट होती है, परंतु इसमें किसी भी प्रकार की लिमिट नहीं है।
  • खरीदने या बेचने वालों की पहचान के अलावा बिटकॉइन नेटवर्क यूज़र लेनदेन के बारे में सब कुछ आसानी से जान सकता है।
  • बिटकॉइन को बड़े पैमाने पर नियंत्रित कर पाना लगभग असंभव है। इसलिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जा सकता है।

बिटकॉइन के नुकसान क्या है? (Bitcoin Ke Nuksan Kya Hai)

  • बिटकॉइन एक डिसेंट्रलाइज्ड क्रिप्टो करेंसी है जिसके कारण इसके ऊपर किसी भी देश के सरकार का कोई नियंत्रण एवं अधिकार नहीं है। इसलिए बिटकॉइन को अभी तक कानूनी मान्यता नहीं मिल पायी है। हालांकि कुछ देशों ने इसको मान्यता दी।
  • बिटकॉइन एक कंप्यूटर निर्मित क्रिप्टो कॉइन है। कंप्यूटर नेटवर्क में आए दिन तकनीकी बदलाव होता रहता है, जिसके कारण इसके अन्दर वायरस या क्रैश होने की संभावना बनी रहती है।
  • एक बिटकॉइन के माइनिंग में अत्यधिक मात्रा में बिजली की खपत होती है और बिजली को प्राकृतिक संसाधनों के द्वारा बनाया जाता है। जिससे आने वाले समय में बिटकॉइन के कारण प्रकृति को भारी नुकसान हो सकता है।
  • बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी है। जो ऑनलाइन कंप्यूटर नेटवर्क पर आधारित डिजिटल क्रिप्टो वॉलेट में रहता है। जिसे हैक किया जा सकता है। और यूजर को भारी नुकसान हो सकता है।
  • बिटकॉइन पर किसी भी देश के सरकार का अधिकार न होने के कारण कोई भी यूज़र इसे ज्यादा मात्रा में स्टोर करके रख सकता है, और इन बिटकॉइन का उपयोग कालाबाजारी एवं गलत तरीकों में कर सकता है।
  • बिटकॉइन का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह हमेशा  बदलती (अस्थिर) एवं घटती-बढ़ती (अनिश्चित) रहती हैं। जिसके कारण इसकी कीमत का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।

1 बिटकॉइन माइन करने में कितना खर्च होता है?

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक बिटकॉइन माइनिंग में लगभग 1173 किलोवाट प्रति घंटे बिजली लगती है। जो अमेरिका के एक सामान्य घर में 6 सप्ताह तक बिजली दे सकती है। एक अन्य रिपोर्ट की गणना में यह सामने आया है कि प्रतिवर्ष बिटकॉइन द्वारा आवश्यक ऊर्जा खपत फिनलैंड (जिसकी आबादी 5.5 मिलियन लगभग 55 लाख है) के वार्षिक प्रति घंटा ऊर्जा उपयोग से कहीं अधिक है।

बिटकॉइन इतना महंगा क्यों है?

एक बिटकॉइन को माइनिंग करके उसे ब्लॉक में सुरक्षित करने में माइनर्स के द्वारा अत्यधिक शक्तिशाली कंप्यूटर एवं कंप्यूटर नेटवर्क, महंगे उपकरण, ऊर्जा की अत्यधिक एवं उच्चतम खपत तथा अन्य संसाधनों के अलावा बहुत ज्यादा समय भी खर्च करना पड़ता है। हजारों लाखों माइनर्स में से कोई एक माइनर ही बिटकॉइन की माइनिंग करके उसे ब्लॉक में सुरक्षित करने में सफल हो पाता है।

माइनर द्वारा बिटकॉइन की माइनिंग करके उसे ब्लॉक में सुरक्षित करने के लिए पुरस्कार के रुप में बिटकॉइन दी जाती है। चूंकि माइनर द्वारा माइनिंग करने में अत्यधिक धन खर्च करना पड़ता है अतः वह पुरस्कार में प्राप्त बिटकॉइन को ज्यादा से ज्यादा डॉलर में बेचता है। यही कारण है कि बिटकॉइन इतना महंगा होता है।

बिटकॉइन के पीछे क्या वैल्यू है

बिटकॉइन पहली एवं सबसे पापुलर डिसेंट्रलाइज्ड एवं पियर टू पियर डिजिटल करेंसी है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसका उपयोग बिटकॉइन के मूल्यों को डिसेंट्रलाइज्ड के रूप में स्टोर करने में किया जाता है। आमतौर पर यह यूजर को भौतिक संपत्ति एवं अपने खाते की इकाई के रूप में स्वामित्व अधिकार प्रदान करता है। हालांकि स्टोर ऑफ वैल्यू फंक्शन पर बहुत ज्यादा बहस हो चुकी है। फिर भी कई क्रिप्टो डेवलपर्स एवं अर्थशास्त्रियों का मानना है कि क्रिप्टो करेंसी को बड़े पैमाने पर अपनाने पर यह हमें एक नई आधुनिक फाइनेंशियल वर्ल्ड में ले जाएगा, जहां ट्रांजैक्शन की मात्रा छोटी इकाइयों में दर्ज की जाएगी।

बिटकॉइन की सबसे छोटी इकाई 0.00000001 BTC सतोशी है। बिटकॉइन को बनाने के कारण इसका नामकरण सतोशी नाकामोटो के नाम पर सतोशी या संक्षेप में सैट कहा जाता है। इस समय के बिटकॉइन के आधार पर एक सतोशी की कीमत लगभग 0.00048 डॉलर के बराबर है।

सभी बिटकॉइन का मालिक कौन है?

कुछ सालों पहले, सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनियों ने यह विचार किया कि बिटकॉइन को वे अपने बैलेंस शीट पर रख सकती है, यह विचार बहुत ही ज्यादा हास्यप्रद लग रहा था। क्रिप्टो करेंसी को किसी भी कंपनी व्यवसाय द्वारा अपनाए जाने के लिए बहुत अस्थिर माना जाता है वारेन बुफेट सहित कई अन्य शीर्ष निवेशकों ने इस संपत्ति को ‘Bubble waiting to pop’ कह दिया।

2020 के बाद ऐसा लगता है कि यह नकारात्मक भावना पूरी तरह से टूट गई है। क्योंकि बहुत सारे कारपोरेट बिजनेसमैन बिटकॉइन खरीद रहे हैं। विशेष रुप से बिजनेस इंटेलिजेंस फॉर माइक्रोस्ट्रेटजी 9 अगस्त और सितंबर 2020 में लगभग 425 मिलियन डॉलर के बिटकॉइन खरीद लिए। तब से अब तक कई अन्य निर्माता बिटकॉइन खरीद रहे हैं।

इंटेलिजेंस फॉर माइक्रोस्ट्रेटजी के पास सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली किसी भी कंपनी की तुलना में सबसे अधिक बिटकॉइन पोर्टफोलियो है। बिजनेस एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म ने बिटकॉइन को Primary Reserve Assets के रूप में स्वीकार किया है। और यह कंपनी आक्रामक रूप से 2021 और 2022 से क्रिप्टो करेंसी खरीद रहा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 30 अगस्त 2022 तक कंपनी के रिजर्व में लगभग 129699 बिटकॉइन थे, जो केवल लगभग 2.5 बिलीयन डॉलर से भी अधिक के बराबर है।

अन्य दूसरे कारपोरेट होल्डर जैसे Marathon Digital holdings के पास 10,054 बिटकॉइन, Coinbase के पास 9000 बिटकॉइन, Square Inc. के पास 8027 बिटकॉइन तथा Hut 8 Mining Corp. के पास 7078 बिटकॉइन है।

सबसे ज्यादा क्रिप्टो (बिटकॉइन) किसके पास है?

बिटकॉइन की कीमत पहले से निर्धारित नहीं किया गया है, अर्थात बिटकॉइन को सार्वजनिक रूप में उपलब्ध होने से पहले डेवलपर्स के बीच कोई सिक्का खनन या वितरित नहीं किया गया है। हालांकि शुरुआती दिनों में बिटकॉइन का अस्तित्व के पहले, माइनर्स के बीच कंपटीशन आज की अपेक्षा बहुत कम थी, जिससे शुरुआती दिनों में माइनर्स को नियमित खनन के माध्यम से अत्यधिक मात्रा में सिक्के जमा करने की अनुमति मिली। ऐसा माना जाता है कि अकेले सतोशी नाकामोतो के पास एक लाख से अधिक बिटकॉइन हैं।

बिटकॉइन का भविष्य क्या है?

जब बिटकॉइन की खोज हुई तब एक बिटकॉइन की कीमत लगभग 0.0008 डॉलर से 0.08 डॉलर के बीच थी। उस समय बिटकॉइन के बारे में जानकारी बहुत ही कम लोगों को थी। हम यह भी कह सकते हैं कि बिटकॉइन का भविष्य शुरुआती दिनों में कुछ अच्छा नहीं था। परंतु जैसे-जैसे बिटकॉइन के बारे में समाज एवं लोगों को जानकारी मिलने लगी वैसे-वैसे बिटकॉइन लोग एवं समाज के बीच बहुत तेजी के साथ लोकप्रिय होता चला गया।

कुछ देशों के द्वारा बिटकॉइन को कानूनी मान्यता तथा एक सेकेंडरी पेमेंट के रूप में स्वीकार करने के बाद भारत और विश्व भर में बिटकॉइन से खरीदारी एवं बिक्री, इन्वेस्टिंग, ट्रेडिंग की मात्रा और लोकप्रियता में वृद्धि हुई है।  इस लेख को लिखने तक एक बिटकॉइन की वर्तमान कीमत लगभग 30,336.08 डॉलर तक है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की क्रिप्टो करेंसी का भविष्य में उपयोग अधिक से अधिक मात्रा में होने की संभावना है।

भारत में बिटकॉइन का भविष्य क्या है?

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा भारत में क्रिप्टो करेंसी को RBI के द्वारा प्रतिबंधित करने एवं क्रिप्टो कॉइन में इन्वेस्ट करने वाले निवेशकों को जुर्माना एवं जेल की सजा के प्रतिबंध को पूरी तरह से निरस्त करने के बाद भारत में कुछ व्यवसायिक लोग ने बिटकॉइन में रूचि दिखाना प्रारंभ कर दिया है।

दुनिया में बिटकॉइन इतनी तेजी से लोकप्रिय हो रही है और इसकी कीमत इतनी तेजी से बढ़ रही हैं, कि भारत के लोगों का बिटकॉइन के प्रति रूचि दिखने लगा है। धीरे-धीरे भारत के लोग भी अब बिटकॉइन में निवेश करना शुरू कर दिया है। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह संभावना व्यक्त की जा सकती है कि भविष्य में भारत में बिटकॉइन मार्केट बढ़ सकता है।

क्या बिटकॉइन भारत में वैध है? बिटकॉइन इंडिया में लीगल है या नहीं?

बिटकॉइन या क्रिप्टो करेंसी की अस्थिरता और अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के द्वारा बिटकॉइन को न तो मान्यता दी गई है और न ही प्रतिबंधित किया गया है।

अभी इस लेख को लिखने तक भारत सरकार के द्वारा बिटकॉइन या किसी भी क्रिप्टो करेंसी को वैध मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

लोग बिटकॉइन को क्यों पसंद करते हैं

बिटकॉइन को कई देशों ने ऑनलाइन पेमेंट के रूप में भी स्वीकार किया जाने लगा है। दुनिया में ऐसे हजारों कंपनियां एवं वेबसाइट उभर कर सामने आये है जो प्लेन की टिकट होटल, रूम, इलेक्ट्रॉनिक्स समान, इलेक्ट्रिक कार एवं अन्य बहुत सारी चीजों के लिए बिटकॉइन को ऑनलाइन पेमेंट के रूप में स्वीकार करने लगी हैं।

इन्हीं सब विशेषताओं के कारण बिटकॉइन की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे लोग बिटकॉइन की तरह हो अत्यधिक आकर्षित हो रहे हैं तथा बिटकॉइन को स्वीकार कर इसे निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।

क्रिप्टो (बिटकॉइन) को किस देश ने अपनाया है?

मध्य अमेरिका में स्थित एल साल्वाडोर के राष्ट्रपति Nayib Bukele के द्वारा बिटकॉइन को कानूनी रूप से वैध स्वीकार करने के बाद बिटकॉइन दिन प्रतिदिन और अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है।

एल साल्वाडोर के राष्ट्रपति Nayib Bukele ने लगभग अपने देश के नागरिकों, The IMF (International Monetary Fund), The Bank of America एवं कई अन्य लोगों की आलोचनाओं को नकारते हुए सितंबर 2021 में इसे कानूनी वैध करार देते हुए लागू कर दिया। इसमें Nayib Bukele ने बिटकॉइन सिटी बनाने की योजना की घोषणा की। जो पूरी तरह से केवल बिटकॉइन माइनिंग पर आधारित शहर है।

बिटकॉइन को मान्यता देने वाला दूसरा देश कौन है?

सेंट्रल अफ्रीका देश के सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक ने विश्व की सबसे डिजिटल करेंसी बिटकॉइन को अपनी कानूनी करेंसी के रूप में मान्यता दे दी है। इस प्रकार बिटकॉइन को कानूनी करेंसी के रूप में मान्यता देने वाला यह विश्व का दूसरा देश बन गया है।

बिटकॉइन नेटवर्क कैसे सुरक्षित है?

बिटकॉइन नेटवर्क को एक जटिल क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिथ्म के द्वारा सुरक्षित किया गया है। बिटकॉइन, नेटवर्क की सुरक्षा के लिए SHA-256 (कंप्यूटर नेटवर्क पर आधारित एल्गोरिथ्म है) क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिथ्म का प्रयोग करता है। जो Hashing Algorithm SHA-2 Family से संबंधित है। जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से बहुत ही सुरक्षित एवं जटिल एल्गोरिथ्म है। जिसे क्रैक कर पाना या हैक कर पाना लगभग असंभव है। नेटवर्क के सुरक्षा की दृष्टि से जिसका उपयोग नेटवर्क के फोर्क बिटकॉइन कैश (BCH) के साथ-साथ बहुत सारे दूसरे क्रिप्टो करेंसी डेवलपर्स के द्वारा भी किया जाता है। 

बिटकॉइन की तकनीक कैसे उन्नत है? (How is Bitcoins technology upgraded)

क्रिप्टो करेंसी में Hard Fork एक परिवर्तन होने वाला व्यवस्था है जो पहले से ही अमान्य ब्लॉक या लेनदेन की प्रक्रिया को वैध बनाता है। और इसीलिए इसे सभी यूजर्स को अपग्रेड करने की आवश्यकता होती है। मतलब यदि दो व्यक्ति इस बात पर सहमत हैं की होने वाला लेनदेन वैध है तो Hard Fork इस लेनदेन को दोनों व्यक्तियों के लिए मान्य बना सकता है, परंतु किसी तीसरे व्यक्ति के लिए या मान्य नहीं बना सकता है।

क्रिप्टो करेंसी में Soft Fork बिटकॉइन व्यवस्था में एक बदलाव है। जिसमें केवल पहले के वैध ब्लॉक या लेनदेन को अमान्य कर दिया जाता है। हालांकि पुराने नोड्स (कंप्यूटर से जुड़ा हुआ बिटकॉइन नेटवर्क में प्रयोग किया जाने वाला एक ऐसा क्लाइंट जो उस नेटवर्क में परफॉर्म करके लेन देन को मान्य और कॉइन को फैलाने का कार्य करता है) नए ब्लॉकों को मान्य मानते हैं। इस प्रकार नए नियमों को लागू करने के लिए तथा बिटकॉइन को अपग्रेड करने वाले अधिकांश माइनर्स की आवश्यकता पड़ती है।

बिटकॉइन एक बुरा विचार क्यों है?

पिछले कुछ दशकों से लोग अपनी उर्जा की खपत और जलवायु परिवर्तन के कारण व्यक्तिगत प्रभाव के बारे में अत्यधिक उत्सुक एवं चिंतित हो गए हैं। जबसे बिटकॉइन के उर्जा खपत के बारे में संभावित नकारात्मक प्रभाव की खबरें मार्केट में आने लगी हैं। तो कई सारे देश बिटकॉइन के बारे में चिंतित हो गए और कुछ देशों ने तो इसकी आलोचना भी की। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक बिटकॉइन माइनिंग में लगभग 1173 किलोवाट प्रति घंटे बिजली लगती है। जो अमेरिका के एक सामान्य घर में 6 सप्ताह तक बिजली दे सकती है। एक अन्य रिपोर्ट की गणना में यह सामने आया है कि प्रतिवर्ष बिटकॉइन द्वारा आवश्यक ऊर्जा खपत फिनलैंड (जिसकी आबादी 5.5 मिलियन लगभग 55 लाख है) के वार्षिक प्रति घंटा ऊर्जा उपयोग से कहीं अधिक है।

इस रिपोर्ट ने तो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज से लेकर पर्यावरण विभाग के उच्च अधिकारियों तक को चिंतित कर दिया है। मई 2021 में, टेस्ला के CEO एवं मालिक एलन मस्क ने यहां तक कह दिया कि टेस्ला क्रिप्टो करेंसी के रूप में भुगतान स्वीकार नहीं करेगी। यह कदम एलन मस्क द्वारा पर्यावरण को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से की गई। कुछ देशों ने पर्यावरण को दृष्टि में रखते हुए इसकी बहुत अधिक आलोचना की है।

Bitcoin से जुड़े प्रश्न:

प्रश्न: 2009 में बिटकॉइन की कीमत क्या थी?

उत्तर: 2009 में जब बिटकॉइन लांच हुआ तब इसकी कीमत लगभग 0.0008 डॉलर से 0.08 डॉलर के बीच थी।

प्रश्न: दुनिया के पहले क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन की कीमत क्या थी?

उत्तर: दुनिया के पहले क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन की कीमत $0.0008 थी। भारतीय करेंसी इसकी कीमत लगभग 0.060 रूपये थी, मतलब 10 पैसे से भी कम।

प्रश्न: 1 बिटकॉइन की कीमत कितनी होती है

उत्तर: बिटकॉइन की कीमत कभी भी एक समान नहीं रहता है। यह हर पल बदलता रहता है। फिर भी 1 बिटकॉइन की वर्तमान (इस लेख को लिखने के समय) में कीमत लगभग 30,336.08 डॉलर है।

प्रश्न: दुनिया में कुल कितने बिटकॉइन है?

उत्तर: क्रिप्टो करेंसी मार्केट में बिटकॉइन की सप्लाई लिमिटेड है। बिटकॉइन सॉफ्टवेयर के द्वारा इसकी सप्लाई को सीमित कर दिया गया है और कभी भी यह मार्केट में 21 मिलियन (21,000,000) सिक्कों से अधिक नहीं होगी।

प्रश्न: बिटकॉइन ने पहली बार ट्रेडिंग की शुरुआत कब की?

उत्तर: बिटकॉइन ने पहली बार ट्रेडिंग की शुरुआत जुलाई 2010 में की।

प्रश्न: बिटकॉइन की सबसे छोटी इकाई कौन सी है?

उत्तर: बिटकॉइन की सबसे छोटी इकाई 0.00000001 BTC है। बिटकॉइन को बनाने के कारण इसका नामकरण सतोशी नाकामोटो के नाम पर सतोशी या संक्षेप में सैट कहा जाता है।

प्रश्न: टोटल बिटकॉइन कितने हैं?

उत्तर: पूरे विश्व में बिटकॉइन की संख्या लगभग एक करोड़ से भी अधिक मानी जा रही है।

प्रश्न: बिटकॉइन कैसे बनाते हैं?

उत्तर: बिटकॉइन के नए सिक्के माइनिंग के रूप में की जाने वाली प्रक्रिया के दौरान बनाए जाते हैं। और उससे लेनदेन के द्वारा पूरे नेटवर्क में फैलाया जाता है। नए सिक्के माइनर्स के द्वारा उठाए जाते हैं और ब्लॉक में पैक किए जाते हैं। जो क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिथ्म द्वारा सुरक्षित होते हैं।

प्रश्न: क्या बिटकॉइन की कीमत पूरी दुनिया में समान है?

उत्तर: हां, बिटकॉइन की कीमत दुनिया के अलग-अलग देशों में उस देश की मूल करेंसी के अनुसार अलग-अलग है।

प्रश्न: 1 बिटकॉइन की सबसे ज्यादा कीमत क्या थी?

उत्तर: बिटकॉइन की कीमत एक समान नहीं रहती है। जिसके कारण इसकी सही कीमत का अंदाजा लगा पाना लगभग असंभव है। परंतु इस लेख को लिखने तक 1 बिटकॉइन की सबसे ज्यादा कीमत लगभग 60,322 डॉलर, भारतीय मुद्रा में लगभग 44 लाख रुपए है।

प्रश्न: 1 बिटकॉइन में कितने रुपए होते हैं

उत्तर: वर्तमान में (इस लेख को लिखे जाने तक) 1 बिटकॉइन की भारत में कीमत लगभग INR 32.81 लाख है।

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