हाइब्रिड फंड क्या है | Hybrid Fund Kya Hai

नमस्कार दोस्तों, हम सभी ने कभी न कभी फण्ड के बारे में सुना हैं आज की इस लेख में हम फण्ड से जुड़े उसके एक भाग के बारे में जानेंगे| तो आइये आज की इस लेख की शुरुवात करते हैं और जानते हैं हाइब्रिड फण्ड क्या हैं

हाइब्रिड फंड क्या है? ( Hybrid Fund Kya Hai )

इक्विटी फंड और डेट फंड की तरह हाइब्रिड फंड भी एक प्रकार का म्यूच्यूअल फंड है। यह इक्विटी और डेट फंड के मिलने से बनता है, मतलब यह आपको इक्विटी और डेट दोनों तरह के मार्केट में निश्चित अनुपात में निवेश करने की अनुमति देता है।

चूंकि यहां इक्विटी और डेट दोनों प्रकार के मार्केट में निवेश कर स्थिरता देता है, इसलिए इसे बैलेंस्ड फंड भी कहा जाता है।

हाइब्रिड फंड कैसे काम करते हैं? ( Hybrid Fund Kaise Kam Karte Hain )

हाइब्रिड फंड अपने निवेशकों को लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न देने का प्रयास करता है। इसमें फंड मैनेजर अच्छे रिटर्न के उद्देश्य से कंपनियों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठा करता है, और उसमें निवेश करने के लिए एक पोर्टफोलियो बनाता है।

हाइब्रिड फंड को फंड मैनेजर अलग-अलग अनुपात में इक्विटी (जैसे इक्विटी शेयर) और डेट (जैसे गवर्नमेंट सिक्योरिटीज एंड बॉन्ड्स, कॉरपोरेट्स बॉन्ड्स) इंस्ट्रूमेंट में निवेश करता है।

हाइब्रिड फंड के फंड मैनेजर अपने निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने के लिए इस फंड को कम जोखिम और अच्छा रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं।

हाइब्रिड फंड कितने प्रकार के होते हैं? ( Hybrid Fund Kitne Prakar Ke Hote Hai )

बाजार नियामक सेबी ने सात हाइब्रिड स्कीम्स बनाकर इन्हें साफ तौर पर परिभाषित कर दिया है। जो इस प्रकार हैं-

कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड 

इस तरह के हाइब्रिड फंड में फंड का 75% से 90% निवेश डेट इंस्ट्रूमेंट में तथा 10% से 25% तक का निवेश इक्विटी या इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट में किया जाता है।

यह उन निवेशकों के लिए सही है जो कम रिस्क लेकर डेट और इक्विटी दोनों में निवेश कर अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं।

बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड

इस हाइब्रिड फंड का मुख्य उद्देश्य रिस्क और रिटर्न को बैलेंस करना होता है। इस फंड में रिस्क और रिटर्न को बनाए रखने के लिए 40% और 60% के अनुपात में इक्विटी और डेट में निवेश करना होता है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर आप 40% इक्विटी में निवेश करते हैं तो 60% आपको डेट में निवेश करना होगा और अगर आप 60% इक्विटी में निवेश करते हैं तो 40% आपको डेट में निवेश करना होगा।

इस फंड काम मुख्य उद्देश्य इक्विटी फंड के द्वारा अधिक से अधिक रिटर्न देना तथा डेट फंड के द्वारा कम से कम रिस्क लेना होता है।

यह उन निवेशकों के लिए सही होता है जो एक बैलेंस पोर्टफोलियो में निवेश करना चाहते हैं।

अग्रेसिव हाइब्रिड फंड 

इस तरह के हाइब्रिड फंड में फंड का 65% से 80% निवेश इक्विटी और इक्विटी संबंधित सिक्योरिटीज में तथा 20% से 35% तक का निवेश डेट से संबंधित इंस्ट्रूमेंट में किया जाता है।

निवेशकों के लिए फंड थोड़ा रिस्की नहीं माना जाता है क्योंकि इस फंड का ज्यादातर भाग इक्विटी और इक्विटी संबंधित इंस्ट्रूमेंट में निवेश किया जाता है।

यह उन निवेशकों के लिए सही है जो हाई रिस्क लेकर हाई रिटर्न चाहते हैं तथा अपने पैसे का कुछ भाग डेट में सुरक्षित निवेश करना चाहता हैं।

डायनेमिक ऐसेट एलोकेशन फंड 

इसे बैलेंस्ड एडवांटेज फंड के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह एक डायनेमिक तरीके से इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करता है। इसके साथ साथ ऐसेट एलोकेशन पर इनके ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं है और मार्केट के शर्तों के अनुसार यह अपने फंड को इक्विटी एंड डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश कर सकते हैं।

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड आपके पोर्टफोलियो को अलग-अलग कंपनी में निवेश का ऑफर करते हैं क्योंकि यह बैलेंस्ड पोर्टफोलियो पर काम करता है। दूसरे हाइब्रिड फंड तुलना में इस फंड में इक्विटी और डेट दोनों में समान निवेश होने के कारण रिस्क भी कम होता है।

अगर फंड मैनेजर को लगता है कि इक्विटी मार्केट में ज्यादा उतार-चढ़ाव रहेगा तो वह फंड का ज्यादातर भाग डेट फंड में निवेश करता है। और अगर फंड मैनेजर को लगता है कि इक्विटी मार्केट ज्यादा रिटर्न दे सकती है तो वह फंड का ज्यादातर भाग इक्विटी में निवेश करता है।

यह उन निवेशकों के लिए अच्छा होता है जो डायनेमिक रुप से अपने एसेट्स को इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करना चाहते हैं।

मल्टी ऐसेट एलोकेशन फंड 

इसमें फंड को तीन अलग-अलग एसेट्स क्लासेस में निवेश करना आवश्यक होता है। इसके साथ साथ प्रत्येक एसेट क्लास में अपने फंड का 10% भाग निवेश करना अनिवार्य होता है।

इसमें फंड मैनेजर निवेश के लिए तीसरा एसेट्स क्लास अपने अनुसार चुन सकता है। जैसे- गोल्ड

आर्बिट्राज फंड

इसमें फंड का अधिकतर लगभग 65% भाग इक्विटी और इक्विटी से संबंधित सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है। आर्बिट्राज फंड आर्बिट्राज अपॉर्चुनिटी में अपना निवेश करते हैं।

उदाहरण के लिए मान लीजिए मार्केट में दो अलग-अलग इक्विटी सिक्योरिटीज की कीमत अलग-अलग चल रही है, तो यह उन दोनों इक्विटी सिक्योरिटी के बीच का डिफरेंस निकालकर निवेश करते है।

इसमें रिस्क बहुत ही कम होता है क्योंकि इसमें फंड मैनेजर को खरीद और बिक्री की कीमत पहले से ही ज्ञात होता है।

इक्विटी सेविंग फंड

इक्विटी सेविंग फंड, हाइब्रिड सेविंग फंड की एक सब कैटेगरी है। इसमें इक्विटी सेविंग फंड अपने फंड का कुछ भाग इक्विटी में, कुछ भाग डेट में तथा कुछ भाग आर्बिट्राज अपॉर्चुनिटी में निवेश करते हैं।

यह उन निवेशकों के लिए सही माना जाता है जो इक्विटी से अधिक रिटर्न पाना चाहते हैं तथा अपने फंड का कुछ भाग डेट और आर्बिट्राज में सुरक्षित रखना चाहते हैं।

हाइब्रिड फंड के फायदे क्या है? ( Hybrid Fund Ke Fayde Kya Hai )\

  • रिस्क कम रिटर्न ज्यादा: आमतौर पर हाइब्रिड फंड इक्विटी और डेट दोनों इंस्ट्रूमेंट में निवेश किए जाते हैं, इसलिए इसमें रिस्क कम और रिटर्न ज्यादा मिलने की संभावना होती है। क्योंकि इक्विटी ज्यादा रिटर्न देता है, डेट रिस्क को कम करता है।
  • विशेषज्ञ फंड मैनेजर: हाइब्रिड फंड में फंड मैनेजर मार्केट के बारे में जानकारी लेकर ही पोर्टफोलियो तैयार करता है और निवेश करता है। जब भी फंड मैनेजर को लगता है कि इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होने की संभावना है तो फंड का ज्यादातर भाग डेट में निवेश करता है और जब फंड मैनेजर को लगता है इक्विटी मार्केट ज्यादा रिटर्न दे सकता है तो फंड का ज्यादातर भाग इक्विटी मार्केट में निवेश करता है।
  • डायवर्सिफिकेशन: हाइब्रिड फंड में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आप इक्विटी और डेट दोनों में अलग-अलग निवेश कर सकते हैं। और दोनों से अच्छी खासी रिटर्न भी ले सकते हैं।
  • विभिन्न क्लास में निवेश की सुविधा: हाइब्रिड फंड निवेशक को इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट के अलग-अलग क्लास में निवेश करने की सुविधा देता है। जैसे- इक्विटी और इक्विटी से संबंधित सिक्योरिटीज, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, गोल्ड आदि।

हाइब्रिड फंड के नुकसान क्या है? ( Hybrid Fund Ke Nuksan Kya Hai )

  • मार्केट रिस्क: चूंकि हाइब्रिड फंड का कुछ भाग इक्विटी और इक्विटी से संबंधित सिक्योरिटीज में भी निवेश किया जाता है, और इक्विटी मार्केट ज्यादातर अस्थिर रहता है इसलिए कभी-कभी निवेशक को नुकसान की भी संभावना बन जाती है।
  • सही फंड न चुनना: आमतौर पर फंड मैनेजर किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उस कंपनी के पिछले प्रदर्शन के बारे में जानकारी ले लेते हैं परंतु किसी भी कंपनी की पिछली जानकारी से उसके भविष्य का सटीक और सही आकलन कर पाना थोड़ा मुश्किल है। इस प्रकार कभी-कभी नुकसान भी हो जाता है।
  • क्रेडिट रिस्क: अगर हाइब्रिड फंड का फंड मैनेजर कम क्रेडिट रेटिंग वाले इंस्ट्रूमेंट चुनता है, और भविष्य में कंपनी दिवालिया हो जाती है दिवालिया हो जाती है, तो नुकसान की संभावना बन जाता है।
  • ब्याज दर रिस्क: किसी भी कंपनी की ब्याज दर उसके इंस्ट्रूमेंट के कीमतों पर निर्भर करता है। अगर किसी कंपनी के इंस्ट्रूमेंट की कीमत अधिक होती है तो उस पर ब्याज दर भी अधिक लगता है।

हाइब्रिड फंड की विशेषताएं Hybrid Fund Ki Visheshtayein )

  • हाइब्रिड फंड इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करके रिस्क को कम कर देते हैं।
  • हाइब्रिड फंड अपने फंड का अधिकतर भाग इक्विटी से रिलेटेड सिक्योरिटीज में निवेश करता है इसलिए इस पर हाई रिटर्न भी मिलता है।
  • हाइब्रिड फंड के द्वारा अपने फंड का कुछ भाग डेट रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट में निवेश करने से सुरक्षित भी रहता है।
  • हाइब्रिड फंड अपने निवेशकों को एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो देता है, जिसके कारण रिटर्न अच्छा मिलता है।

हाइब्रिड फंड में किसे निवेश करना चाहिए? ( Hybrid Fund Me Kise Nivesh Karna Chahiye )

जो निवेशक कम रिस्क लेकर अधिक रिटर्न पाना चाहते हैं उनके लिए हाइब्रिड फंड निवेश का सबसे सही विकल्प है। फिनकैप के डायरेक्टर ए० के० निगम का कहना है कि अगर आप कंजरवेटिव रूढ़िवादी निवेशक है और डायरेक्ट इक्विटी रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, इस अवस्था में हाइब्रिड फंड आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। इसमें म्यूच्यूअल फंड के दूसरे कैटेगरी की तुलना में रिस्क कम होता है और बेहतर रिटर्न भी मिलता है।

क्या हाइब्रिड फंड में निवेश करना अच्छा है? ( Kya Hybrid Fund Me Nivesh Karna Surakshit Hai )

हाइब्रिड फंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपने फंड को इक्विटी और डेट दोनों एसेट्स में निवेश करती है। कभी-कभी यह गोल्ड में भी पैसा लगाती है। मतलब इसमें निवेशक को इक्विटी, डेट और गोल्ड में पैसा लगाने का मौका मिलता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर इक्विटी मार्केट ऊपर नीचे होता है तो डेट और गोल्ड का रिटर्न बैलेंस कर लेता है, उसी प्रकार अगर डेट में रिटर्न कम होता है तो इक्विटी रिटर्न उसे बैलेंस कर लेता है।

हाइब्रिड फंड में निवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? ( Hybrid Fund Me Nivesh Karte Samay Kin Bato Ka Dhyan Rakhna Chahiye )

अगर आप हाइब्रिड फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं तो हाइब्रिड फंड में निवेश करने से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

  • रिस्क का सही आकलन: हाइब्रिड फंड में इक्विटी में निवेश करने के कारण रिस्क हमेशा बना रहता है। इसलिए हाइब्रिड फंड में निवेश करने से पहले उसकी स्कीम से जुड़ी रिस्क को अच्छे से समझ ले उसके बाद ही निवेश करें।
  • रिटर्न का सही आकलन: हाइब्रिड फंड आपको निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं देता है, क्योंकि इस फंड का कुछ भाग इक्विटी में भी निवेश किया जाता है और इक्विटी मार्केट अस्थिर होता है। इसलिए अगर आप हाइब्रिड फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको उस स्कीम से जुड़ी रिटर्न का सही आकलन कर लेना चाहिए।
  • टाइम पीरियड: अगर आप हाइब्रिड फंड में निवेश करने जा रहे हैं तो आपके लिए यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है की अच्छा रिटर्न पाने के लिए कितने समय अवधि के लिए निवेश किया जाए। आमतौर पर हाइब्रिड मीडियम टर्म (3 से 5 वर्ष के लिए) में निवेश सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।
  • लागत: हाइब्रिड फंड में निवेश करने से पहले आपको एक्सपेंस रेश्यो के बारे में सही जानकारी ले लेनी चाहिए।

सही हाइब्रिड फंड कैसे चुने? ( Sahi Hybrid Fund Kaise Chune )

आमतौर पर हाइब्रिड फंड अलग-अलग प्रकार के होते हैं इसलिए किसी भी हाइब्रिड फंड में निवेश करने से पहले अपने रिस्क सहने की क्षमता तथा फाइनेंसियल लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही निवेश करना चाहिए।

अगर आप अधिक रिस्क लेकर कम समय में ज्यादा रिटर्न पाना चाहते हैं, तो अग्रेसिव हाइब्रिड फंड एक सही विकल्प है। और अगर आप कम रिस्क लेकर अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं तो कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड एक सही विकल्प है। और अगर आप एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो चाहते हैं तो आपके लिए बैलेंस हाइब्रिड फंड एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

हाइब्रिड फंड पर कितना टैक्स लगता है? ( Hybrid Fund Par Kitna Tax Lagta Hai )

हाइब्रिड फंड पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हाइब्रिड फंड का कितना भाग इक्विटी और डेट में निवेश किया जा रहा है। यदि हाइब्रिड फंड अपने फंड का अधिक भाग इक्विटी में निवेश करता है, तो इसे इक्विटी स्कीम की तरह देखा जाता है और इसके ऊपर इक्विटी के समान टैक्स लगता है।

अगर हाइब्रिड फंड अपने फंड का अधिक भाग डेट में निवेश करता है तो इसे डेट स्कीम की तरह देखा जाता है और इसके ऊपर डेट के समान टैक्स लगता है।

इस प्रकार हाइब्रिड फंड में निवेश करने से पहले निवेशक को यह जांच कर लेना चाहिए कि आपकी स्कीम इक्विटी स्कीम है, डेट स्कीम।

हाइब्रिड फंड पर टैक्स

अगर आप हाइब्रिड फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपको तीन प्रकार के टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है। जो इस प्रकार हैं-

लोंग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG)

लोंग टर्म कैपिटल गेन टैक्स इक्विटी और डेट दोनों के लिए अलग-अलग होता है। इक्विटी हाइब्रिड फंड के लिए LTCG निवेश किए गए तिथि से एक वर्ष बाद प्राप्त लाभ पर लागू होता है। जबकि डेट हाइब्रिड फंड LTCG निवेश किए गए तिथि से 3 वर्ष के बाद प्राप्त लाभ पर लागू होता है।

इक्विटी फंड के लिए LTCG 10% तथा डेट फंड के लिए LTCG 20% लगता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG)

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी इक्विटी और डेट दोनों के लिए अलग-अलग होता है। इसमें इक्विटी के लिए STCG 15% लगता है। जबकि डेट के लिए 25% टैक्स लगता है।

डिविडेंड इनकम पर टैक्स

अगर आप हाइब्रिड फंड की Income Distribution Capital Withdrawal (IDCW) या डिविडेंड पेआउट स्कीम चुनते हैं। तो आपको डिविडेंड पर टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। डिविडेंड आपके निवेश किए हुए पूंजी में जोड़ दिया जाता है और उसके बाद नियमानुसार उस पर टैक्स लगाया जाता है।

प्रश्न: हाइब्रिड फंड अपने फंड को कहां निवेश करते हैं?उत्तर: हाइब्रिड फंड एक से अधिक एसेट्स क्लास में निवेश करते हैं इसमें इक्विटी और डेट एसेट्स शामिल है। कई कंपनियां तो सोने में भी पैसा लगाते हैं।

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