समास किसे कहते हैं, परिभाषा तथा भेद- कक्षा 5,6,7,8,9,10

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नमस्कार दोस्तो, आज की इस लेख में आप सभी का स्वागत हैं आज की इस लेख में आप समास किसे कहते हैं इसके बारे में जानेंगे।इस लेख में आप समास की परिभाषा, समास के भेद और समास के उदाहरण को जानेंगे| इस लेख में आप समास के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे।

समास किसे कहते हैं

समास की परिभाषा: समास शब्द का शाब्दिक अर्थ है संग्रह, सम्मेलन, संक्षेप मिश्रण इत्यादि। समास का तात्पर्य संक्षिप्तीकरण से होता है। जब दो या दो से अधिक शब्दों को जोड़कर एक नया तथा छोटा शब्द बनाया जाता हैं तो उसे समास कहा जाता है।

समास किसे कहते हैं

दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि जहां पर कम से कम शब्दों का प्रयोग करके अधिक अर्थ को या अधिक अर्थ वाले शब्दों को प्रकट किया जा सकता है उसे समास कहते हैं।

बहुत सी भाषाओं में समास का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है जैसे संस्कृत जर्मन तथा और भी भारतीय भाषाएं। समास रचना में दो पद होते हैं, पहले पद को पूर्व पद कहते हैं तथा दूसरे पद को उत्तर पद कहते हैं। जब यह दोनों पद आपस में मिलते हैं तो वह समस्त पद कहलाता है।

समास के उदाहरण
राजा का महल- राजमहल
रसोई के लिए घर – रसोईघर

समस्त पद: जब किसी शब्द को समास के नियमों से बनाया जाता है तो वह समस्त पद कहलाता है। समस्त पद को सामासिक शब्द भी कहते हैं।

पूर्व पद तथा उत्तर पद: सामासिक शब्द के पहले पद को पूर्व पद कहते हैं। तथा दूसरे या अंतिम पद को उत्तर पर कहा जाता है। 

समास विग्रह किसे कहते हैं

समास विग्रह: जब किसी सामासिक शब्दों के बीच के संबंध को स्पष्ट किया जाता है उसे समास विग्रह कहते हैं या फिर इसे हम इस तरह से भी परिभाषित कर सकते हैं कि जब समस्त पद के सभी पद को अलग कर दिया जाता है तो उसे समास विग्रह कहते हैं

जैसे भाई-बहन भाई और बहन 
माता -पिता माता और पिता
पति -पत्नी पति और पत्नी

समास के भेद

समास के मुख्य तथ्य भेद होते हैं

  1. तत्पुरुष समास
  2. अव्ययीभाव समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद समास
  6. बहुव्रीहि समास

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं

तत्पुरुष समास की परिभाषा: वह समास जिसका उत्तर पद प्रधान होता है वह समास करते वक्त बीच की विभक्ति लुप्त हो जाती है उसे हम तत्पुरुष समास कहते हैं।इस समास में अंतर्गत आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लुप्त होता है।

तत्पुरुष समास के उदाहरण

मूर्ति को बनाने वाला- मूर्तिकार
काल को जीतने वाला- कालजयी
राजा को धोखा देने वाल- राजद्रोही
खुद को मारने वाला- आत्मघाती
मांस को खाने वाला- मांसाहारी
शाक को खाने वाला- शाकाहारी 

तत्पुरुष समास के भेद

कारक चिन्ह के अंतर्गत तत्पुरुष समास के छः भेद हो जाते है।

  1. कर्म तत्पुरुष समास
  2. करण तत्पुरुष समास
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास
  4. अपादान तत्पुरुष समास
  5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास
  6. अधिकरण तत्पुरुष समास

कर्म तत्पुरुष- यह समास ‘को’ चिन्ह के लोप से बनता है।जैसे: ग्रंथकार : ग्रन्थ को लिखने वाला

करण तत्पुरुष- वह समास जिसमें दो कारक चिन्हों के अभाव से वह शब्द बनता हो उसे करण तत्पुरुष समास कहते हैं।जैसे: वाल्मिकिरचित : वाल्मीकि के द्वारा रचित

सम्प्रदान तत्पुरुष-  इस समास में कारक चिन्ह ‘के लिए’ का लोप हो जाता है। जैसे: सत्याग्रह : सत्य के लिए आग्रह

अपादान तत्पुरुष- इस समास में  कारक चिन्ह ‘से’ का लोप होता हैं। जैसे: पथभ्रष्ट: पथ से भ्रष्ट

सम्बन्ध तत्पुरुष- सम्बन्ध कारक के चिन्ह ‘का’, ‘के’ व ‘की’ का लोप होता है वहां सम्बन्ध तत्पुरुष समास होता है।जैसे- राजसभा- राजा की सभा

अधिकरण तत्पुरुष- इस समास में कारक चिन्ह ‘में’ और ‘पर’ का लोप होता है। जैसे: जलसमाधि- जल में समाधि

अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं

अव्ययीभाव समास की परिभाषा: जिस समास में पूर्व पद (पहला पद) अव्यय हो, तथा उस पूर्व पद के जुड़ने से समस्त पद भी अव्यय बन जाए ऐसे समास को अव्ययीभाव समास कहते हैं। इस समास में पहला पद प्रधान होता है। यह वाक्य में क्रिया विशेषण का कार्य करता है। अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर,  आदि आते हैं।

अव्यय– जिन शब्दों पर लिंग, कारक, काल आदि शब्दों से भी कोई प्रभाव न हो जो अपरिवर्तित रहें वे शब्द अव्यय कहलाते हैं। 

अव्ययीभाव समास के उदाहरण-

आजन्म: जन्म से लेकर
यथामति : मति के अनुसार
प्रतिदिन : दिन-दिन

जैसा कि ऊपर लिखे गए उदाहरणों में यादें पा रहे होंगे किस समास में पूर्व पद पहले पद में आ,यथा, प्रति आदि आते हैं। 

यथाशक्ति : शक्ति के अनुसार
अनजाने : बिना जाने

ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा कि आप देख सकते हैं कि प्रथम पद में ‘यथा’, ‘अन’ आदि आते हैं जो कि अव्यय हैं एवं समास होने पर ‘के’ चिन्ह का लोप हो रहा है।

घर-घर : प्रत्येक घर
निस्संदेह : संदेह रहित
प्रत्यक्ष : आँखों के सामने
बेखटके : बिना खटके

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं कि प्रथम पद में ‘नि’, ‘प्र’, ‘बे’ आदि प्रयोग हो रहे हैं जो अव्यय हैं एवं शब्द के साथ जुड़ने के बाद पूरा शब्द अव्यय हो जाता है। अतः यह अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आयेंगे।

इस लेख को भी पढ़े: क्रिया की परिभाषा एवम् प्रकार

कर्मधारय समास किसे कहते हैं?

वह समास जिसका प्रथम पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता हो। उसे कर्मधारय समास कहते हैं। दूसरे शब्दों में प्रथम पद उपमान तथा दूसरा उपमेय हो उसे हम कर्मधारय समास कहते हैं।कर्मधारय समास का अंतिम शब्द प्रधान होता है तो था जब उन्हें अलग किया जाता है तो दोनों पदों के बीच की सामान है जो रूपी में से किन्हीं एक शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

जब कर्मधारय समास के किसी शब्द को विग्रह किया जाता है तो दोनों पदों के बीच ‘है जो’ या ‘के समान’ जुड़ जाते हैं। उसे कर्मधारय समास कहते है।

कर्मधारय समास के उदाहरण

चरणकमल = कमल के समान चरण
नीलगगन =नीला है जो गगन
चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं कि दिए गए समास पदों में पूर्व पद एवं उतर पद में विशेषण व विशेष्य या उपमान एवं उपमेय का सम्बन्ध है। अतः ये उदाहरण कर्मधारय समास के अंतर्गत आयेंगे।

पीताम्बर =पीत है जो अम्बर
महात्मा =महान है जो आत्मा
लालमणि = लाल है जो मणि
महादेव = महान है जो देव

ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आप देख सकते हैं पूर्व पद उत्तर पद की या तो विशेषता बता रहा है या फिर दोनों पदों में उपमेय एवं उपमान का सम्बन्ध है।जैसे: पीताम्बर में आप देख सकते हैं कि वस्त्र के पीले होने कि विशेषता बताई जा रही है, लालमणि में मणि के लाल होने कि विशेषता बताई जा रही है। अतः यह उदाहरण कर्मधारय सामास के अंतर्गत आयेंगे।

द्विगु समास किसे कहते हैं

द्विगु समास की परिभाषा: जिस समास का पहला शब्द संख्यावाचक विशेषण हो तथा अन्य समस्त पद समूह का बोध कराता हूं उसे द्विगु समास कहते हैं।

द्विगु समास के उदाहरण:

दोपहर- दो पहरों का समाहार
शताब्दी- सौ सालों का समूह
पंचतंत्र- पांच तंत्रों का समाहार
सप्ताह- सात दिनों का समूह

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं कि सभी शब्दों में पूर्वपद एक संख्यावाचक विशेषण है एवं समस्तपद किसी न किसी समूह या फिर समाहार का बोध करा रहा है। जैसे दोपहर में पहला पद है ‘दो’ जो एक संख्यावाचक विशेषण है एवं समस्तपद दोपहर दो पहरों के समाहार का बोध करा रहा है। अतः यह उदाहरण द्विगु समास के अंतर्गत आयेंगे।

चौराहा : चार राहों का समूह
त्रिकोण : तीन कोणों का समूह
तिरंगा : तीन रंगों का समूह
त्रिफला : तीन फलों का समूह

ऊपर दिए गए उदाहरणों में आप देख सकते हैं कि सभी शब्दों में पूर्वपद एक संख्यावाचक विशेषण है एवं समस्तपद किसी समूह य समाहार का बोध करा रहा है।

जैसे चौराहा का पहला वर्ण है चौ जिसका मतलब होता है चार। चार एक संख्यावाचक विशेषण है। चोराहा बने पर समस्तपद चार राहों के समूह का बोध करा रहा है। हम देख सकते की तिरंगा में पहला वर्ण है ति जिसका मतलब तीन होता है। यह शब्द एक संख्यावाची विशेषण शब्द है। अतः यह उदाहरण द्विगु समास के अंतर्गत आयेंगे।

द्वंद समास किसे कहते हैं

द्वंद समास की परिभाषा: जब किसी समस्त पदों में दोनों पद प्रधान है तथा दोनों पदों को मिलाते समय और अथवा या एवं आदि शब्द हो ऐसे समास को द्वंद समास कहते हैं द्वंद समास में योजक चिन्ह नहीं होता है।

द्वंद समास के उदाहरण-

अन्न-जल : अन्न और जल 
अपना-पराया : अपना और पराया
राजा-रंक : राजा और रंक

जैसा कि हम जानते हैं द्वंद्व समास होने के लिए दोनों पदों का प्रधान होना जरुरी है एवं समास बनाने पर योजक चिन्ह लुप्त हो जाने चाहिए। अब हम ऊपर दिए गए उदाहरणों को देखते हैं। होने ऊपर दिए गए उदाहरणनों में देखा यहाँ अन्न जल, अपना पराया , राजा रंक जैसे शब्दों ने मिलकर अन्न और जल, अपना और पराया एवं राजा और रंक बनाया। इन शब्दों का समास बनने पर और योजक चिन्ह का लोप हो गया।

अन्न-जल इस समस्तपद का समास विग्रह होगा अन्न और जल। जैसा कि हम देख सकते है कि समास होने पर और योजक लुप्त हो रहा है एवं दोनों पद ही प्रधान हैं। अतः ये उदाहरण द्वंद्व समास के अंतर्गत आयेंगे।

देश-विदेश : देश और विदेश
रात-दिन : रात और दिन
भला-बुरा : भला और बुरा
छोटा-बड़ा : छोटा और बड़ा

जैसा कि हम ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं कि देश-विदेश, रात-दिन, भला-बुरा, छोटा-बड़ा आदि शब्दों में दोनों पद प्रधान हैं एवं जब ये दोनों पद मिलते हैं तो ‘और’ योजक लुप्त हो जाता है।ये विशेषताएं द्वंद्व समास कि होती है अतः ये उदाहरण द्वंद्व समास के अंतर्गत आयेंगे।

बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं

बहुव्रीहि समास की परिभाषा: वह समास जिसके समस्त पदों में कोई भी पद प्रधान पद के रूप में ना हो तथा समस्त पद मिल कर किसी अन्य पद की ओर संकेत करते हो वह  बहुव्रीहि समास कहलाता है।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण:

गजानन- गज से आनन वाला
त्रिलोचन- तीन आँखों वाला
दशानन- दस हैं आनन जिसके
चतुर्भुज- चार हैं भुजाएं जिसकी

उदाहरण-गजानन- गज से आनन वाला (गणेश )

जैसा कि आपने देखा ऊपर दिए गए शब्द में कोई भी पद प्रधान नहीं हैं। दोनों ही पद मिलकर किसी तीसरे पद की और संकेत कर रहे हैं। हम देख सकते हैं की पूर्व पद एवं उत्तर पद मिलकर गणेश की तरफ इशारा कर रहे हैं। गणेश का गज   के सामान आनन् होता है। हम यह भी जानते हैं की जब दोनों पद प्रधान नहीं होते तो वहां बहुव्रीहि समास होता है। यह उदाहरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

चतुर्भुज- चार हैं भुजाएं जिसकी (विष्णु)

ऊपर दिए गये उदाहरण में आप देख सकते हैं कि समस्तपद में से कोई भी एक पद प्रधान नहीं है एवं दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद कि और इशारा कर रहे हैं। हम जानते हैं की विष्णु भगवान की चार भुजाएं होती हैं और ये दोनों पद मिलकर भगवान विष्णु की तरफ इशारा कर रहे हैं। हम यह भी जानते हैं की जब दोनों पद प्रधान नहीं होते तो वहां बहुव्रीहि समास होता है।अतः यह उदाहरण बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

त्रिलोचन- तीन आँखों वाला (शिव)

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं कि पूर्व पद एवं उत्तर पद में से कोई भी पद प्रधान नहीं है और ये दोनों पद मिलनेके बाद किसी दुसरे ही पद कि और संकेत कर रहे हैं। हम यह भी जानते हैं की जब दोनों पद प्रधान नहीं होते तो वहां बहुव्रीहि समास होता है। यह उदाहरण भी बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

दशानन- दस हैं आनन जिसके (रावण)

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं कि पूर्व पद एवं उत्तर पद ‘दस‘ एवं ‘आनन‘ में से कोई भी पद प्रधान नहीं है और ये दोनों पद मिलने के बाद किसी दुसरे ही पद दशानन जो कि रावण का एक नाम है उसकी और संकेत कर रहे हैं। हम यह भी जानते हैं की जब दोनों पद प्रधान नहीं होते तो वहां बहुव्रीहि समास होता है। यह उदाहरण भी बहुव्रीहि समास के अंतर्गत आएगा।

प्रश्न: बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं

उत्तर: वह समास जिसके समस्त पदों में कोई भी पद प्रधान पद के रूप में ना हो तथा समस्त पद मिल कर किसी अन्य पद की ओर संकेत करते हो वह  बहुव्रीहि समास कहलाता है।

प्रश्न: द्वंद समास किसे कहते हैं

उत्तर: जब किसी समस्त पदों में दोनों पद प्रधान है तथा दोनों पदों को मिलाते समय और अथवा या एवं आदि शब्द हो ऐसे समास को द्वंद समास कहते हैं द्वंद समास में योजक चिन्ह नहीं होता है।

प्रश्न: कर्मधारय समास किसे कहते हैं?

उत्तर: वह समास जिसका प्रथम पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता हो। उसे कर्मधारय समास कहते हैं। दूसरे शब्दों में प्रथम पद उपमान तथा दूसरा उपमेय हो उसे हम कर्मधारय समास कहते हैं।

इस लेख के बारे में

आज की इस लेख में आपने समास किसे कहते हैं इसके बारे में जाना| इसके अलावा आपने जाना की समास के भेद और भी बहुत कुछ| उम्मीद करता हूँ की आपको यह लेख पसंद आई होगी|

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