पूर्णांक संख्या किसे कहते है?

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आज की इस लेख में आपको पूर्णांक संख्या के बारे में बताया है। इस लेख के अंतर्गत पूर्णांक संख्या किसे कहते है, पूर्णांक संख्याओ को संख्या रेखा पर दर्शाना इन सभी के बारे में विस्तृत तरीके से जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

पूर्णांक संख्या किसे कहते है?

पूर्णांक का शाब्दिक अर्थ: पूर्णांक का शाब्दिक अर्थ हैपूर्ण + अंक। अर्थात् ऐसा अंक जो पूर्ण हो (दशमलव या भाग के रूप में ना हों) ।
पूर्णांक (Integers) :शून्य सहित सभी धन और ऋण संख्याओं के समूह को, पूर्णांक संख्या कहते हैं।
                                                      अथवा
प्राकृतिक संख्याओं में शून्य तथा ऋणात्मक संख्याओं को सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती है, उन्हें पूर्णांक संख्याएँ कहते हैं। 4, 3, 2, 1, 0, 1, 2, 3, 4, …। इन सभी संख्याओं को पूर्णांक कहते हैं। पूर्णांक संख्याओं को ‘I’ से प्रदर्शित करते हैं।

पूर्णांकों की आवश्यकता:

पूर्णांकों की आवश्यकता: हम सभी जानते हैं कि छोटी पूर्ण संख्याओं में से बड़ी पूर्ण संख्याओं को घटाया नहीं जा सकता है। आइए इन्हे कुछ उदाहरण के माध्यम से समझते है। 

उदाहरण: यदि 27 में से 13 को घटाना हो, तो क्या प्राप्त होगा?

हल: 27–13 = 14 (जो एक पूर्ण संख्या है) किंतु यदि 13 में से 27 को घटाना हो, तो क्या प्राप्त होगा?  
       13–27 = — (जो एक पूर्ण संख्या नहीं है)

अर्थात छोटी पूर्ण संख्या में से बड़ी पूर्ण संख्या को घटाया नहीं जा सकता है।

पूर्णांक संख्या किसे कहते है

पूर्णांकों का संग्रह:

 छोटी पूर्ण संख्याओं में से बड़ी पूर्ण संख्याओं को घटाने की आवश्यकता पड़ने के कारण ही पूर्ण संख्याओं का विस्तार किया गया। इसके लिए प्राकृतिक संख्याओं 1, 2, 3, 4, 5, …… के संगत1, 2, 4, 5, …… नई संख्याएँ बन गई। इस प्रकार पूर्ण संख्याओं का विस्तारित संग्रह पूर्णांकों का संग्रह कहलाया।

धन पूर्णांक:प्राकृतिक संख्याओं (+1, +2, +3, +4, +5, +6, ।) को धन पूर्णांक कहते हैं। प्रायः इनके पूर्व धन चिन्हों को नहीं लिखा जाता है। अतः संख्याएँ (1, 2, 3, 4, 5, ……) धन पूर्णांक हैं।

ऋण पूर्णांक:प्राकृतिक संख्याओं (-1, -2, -3, -4, ……) के संगत संख्याओं (-1, -2, -3, -4, ……) को ऋण पूर्णांक कहते हैं।

अथवा
(-1, -2, -3, -4, ……) को ऋण पूर्णांक कहते हैं।

कुछ याद रखने वाली बाते :

  1. शून्य (0) एक ऐसा पूर्णांक है जो न तो धनात्मक है और न ऋणात्मक।
  2. प्रत्येक धन पूर्णांक के संगत एक ऋण पूर्णांक होता है और इन दोनों का योगफल शून्य होता है।

दिशा निर्धारण:
Chart banana hai

संख्या रेखा पर पूर्णांकों का निरूपण:

  1. एक संख्या रेखा खींचते हैं।
    उदाहरण:
  2. लगभग बीच में बिंदु O लेकर इसके दोनों और परस्पर समान दूरी पर चिन्हित करते हैं।
    उदाहरण:
  3. बिंदु O को शून्य निरूपित करके इसकेइसके बायीं ओर क्रमागत बिंदुओं1, 2, 3, 4, …। को अंकित कीजिये।
    उदाहरण:
  4. इसके विपरीत बिंदु उसे दायीं ओर क्रमागत बिंदुओं +1, +2, +3, +4, ……… को अंकित कर दीजिये।
    उदाहरण:
  5. इस प्रकार सभी पूर्णांक संख्याएँ संख्यारेखा पर निरूपित हैं।

पूर्णाकों की तुलना:

  1. दो पूर्णांकों में जो संख्या रेखा पर दायीं ओर होता है वह अपने बायीं ओर के पूर्णांक से बड़ा होता है।
  2. प्रत्येक धनात्मक पूर्णांक समस्त ऋणात्मक पूर्णांकों से बड़ा होता है।
  3. शून्य (0) प्रत्येक धनात्मक पूर्णांक से छोटा होता है।
  4. शून्य (0) प्रत्येक ऋणात्मक पूर्णांक से बड़ा होता है।

संख्या रेखा पर वितरित पूर्णांकों के जोड़े (युग्म) :

चार्ट बनाना है।

 योगात्मक प्रतिलोम:किसी पूर्णांक a के संगत विपरीत चिह्न वाले पूर्णांक (a) को उसका योगात्मक प्रतिलोम कहते हैं।

उदाहरण:24 का योगात्मक प्रतिलोम =24

स्मरणीय बिंदु:

  1.  शून्य (0) का योगात्मक प्रतिलोम शून्य (0) ही होता है. 
  2. बड़े पूर्णांक का योगात्मक प्रतिलोम, छोटे पूर्णांक के योगात्मक प्रतिलोम से छोटा होता है।
    उदाहरण:5>3 किंतु5<3

किन्हीं दो संख्याओं का योगात्मक प्रतिलोम होने का प्रतिबंध:

यदि दो पूर्णांकों a तथा b का योग शून्य (0) अर्थात (+a) + (a) = 0 हो, तो a और b को परस्पर योगात्मक प्रतिलोम कहते हैं।
उदाहरण:79 का योगात्मक प्रतिलोम =79
अतः 79–79 = 0

 

प्रश्न:- पूर्णांकों का निरपेक्ष मान क्या है? 

पूर्णांकों का निरपेक्ष मान (Absolute Value):- किसी पूर्णांक (+a) और (-a ) दोनों का निरपेक्ष मान a ही होता है।

पूर्णांकों के निरपेक्ष मान को परिमाण भी कहा जाता है।

पूर्णांकों का निरपेक्ष मान कैसे निकाला जाता है? 

उत्तर:- किसी संख्या का निरपेक्ष मान निकालने के लिए सबसे पहले उस संख्या को “ । । ” बॉक्स में रख देते हैं। और उसके बाद बराबर चिह्न लगा कर उस संख्या को लिखते हैं  न कि उसके चिन्ह को।

पूर्णांक +a के निरपेक्ष मान को ।+a। और पूर्णांक -a के निरपेक्ष मान को ।-a। भी लिखते हैं।

अतः ।-a। = a = ।+a।

उदाहरणार्थ:- पूर्णांक संख्या -16, +21 का निरपेक्ष मान ज्ञात कीजिए।

हल:- पूर्णांक संख्या -16 का निरपेक्ष मान = ।-16। = 16

पूर्णांक संख्या +21 का निरपेक्ष मान =  ।+21। = 21

पूर्णांकों पर संक्रियाएं:-

पूर्णांकों का योग:- 1. दो धनात्मक पूर्णांकों का योगफल धनात्मक पूर्णांक होता है।

उदाहरणार्थ:- (+11) + (+46) = 55

  1. दो ऋणात्मक पूर्णांकों का योगफल ऋणात्मक पूर्णांक होता है।

उदाहरणार्थ:- (-31) + (-16) = -47

संख्या रेखा की सहायता से समान चिन्ह वाले पूर्णांकों को जोड़ना:- समान चिन्हों के दो पूर्णांकों के योगफल के लिए जोड़ी जाने वाली संख्याओं के निरपेक्ष मानों के योगफल के पूर्व वही चिन्ह लगाते हैं, जो जोड़े जाने वाले   पूर्णांकों का है।

उदाहरणार्थ:- चित्र बनाना है।

संख्या रेखा की सहायता से असमान चिन्हों के पूर्णांकों को जोड़ना:- असमान चिन्हों वाले पूर्णांकों का योगफल जोड़े जाने वाले पूर्णांकों के संख्यात्मक मानों के अंतर के पूर्व बड़े संख्यात्मक मान वाले पूर्णांक का चिन्ह लगाकर प्राप्त किया जाता है।

उदाहरणार्थ:- चित्र बनाना है।

पूर्णांकों पर योग-संक्रिया के प्रगुण:-

योग का संवरक प्रगुण:- यदि a तथा b दो पूर्णांक हों और a + b = c; तो c भी पूर्णांक संख्या होती है। यह योग संक्रिया का संवरक प्रगुण है।

ड़ते हैं। इस प्रकार,

a – b = a + (-b)

उदाहरणार्थ:- 1. उपरोक्त सूत्र का प्रयोग करते हुए (+3) + (-23) का मान बताइए।

हल:- (+3) + (-23) = 3 – 23 = -20

  1. उपरोक्त सूत्र का प्रयोग करते हुए (-5) – (+8) का मान बताइए।

हल:- (-5) – (+8) = -5 – 8 = -13

घटाने की संक्रिया के प्रगुण

घटाने की संवरक प्रगुण :- यदि a और b दो पूर्णांक है तो a – b = a + ( -b ) भी एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांकों में घटाने की प्रगुण संवरक है।

उदाहरणार्थ:- (-4) – 5 = (-4) – (+5)

घटाने की क्रम-विनिमेय प्रगुण:- यदि a तथा b दो पूर्णांक है, तो ( a – b ) ≠ ( b – a )

अतः पूर्णांकों में घटाने की संक्रिया क्रम-विनिमेय का पालन नहीं करती है।

उदाहरणार्थ:- (+8) – (+10) =  8 – 10 = – 2

(+10) – (+8) = 10 – 8 = 2

अतः (+8) – (+10) ≠ (+10) – (+8)

तत्समक अवयव:- यदि a कोई पूर्णांक है तो a – 0 =  a परंतु 0 – a = – a इस प्रकार a – 0 ≠ 0 – a अर्थात् शून्य पूर्णांकों में घटाने का तत्समक अवयव नहीं है।

उदाहरणार्थ:- 0 – 17 = -17

17 – 0 = 17

अतः  0 – 17 ≠ 17 – 0

पूर्ण संख्या और पूर्णांकों की तुलना

1.पूर्णांकों में शून्य का पूर्ववर्ती -1 है, परंतु पूर्ण संख्या में शून्य का पूर्ववर्ती नहीं होता है।

  1. पूर्णांकों में घटाना संवरक है, परंतु पूर्ण संख्या में यह सत्य नहीं है।

पूर्णांको पर गुणन संक्रिया:- 1. एक धनात्मक और एक ऋणात्मक पूर्णांक का गुणनफल ऋणात्मक पूर्णांक होता है।

उदाहरणार्थ:-(-2) × (+5) = -10

  1. एक धनात्मक और एक ऋणात्मक पूर्णांक का गुणनफल ज्ञात करने के लिए दोनों पूर्णांकों के निरपेक्ष मानों के गुणनफल के पूर्व ऋण चिन्ह लगाते हैं।

उदाहरणार्थ:- (+7) × (-13) = -91

  1. दो धनात्मक अथवा दो ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल धनात्मक पूर्णांक होता है।

उदाहरणार्थ:- (+21) × (+3) = 63

(-9) × (-14) = 126

संख्या रेखा की सहायता से पूर्णांकों का गुणा :- चार्ट बनाना है

गुणन संक्रिया के प्रगुण

गुणन का संवरक प्रगुण:- किन्ही दो पूर्णांकों का गुणनफल भी एक पूर्णांक होता है, यह गुणन का संवरक प्रगुण है।

अथवा

यदि a तथा b दो पूर्णांक है, तो a × b भी पूर्णांक होता है, यह गुणन का संवरक प्रगुण है।

उदाहरणार्थ:- (-3) × (8) = -24 (एक पूर्णांक है।)

गुणन का क्रम-विनिमेय प्रगुण:- किन्ही दो पूर्णांकों के गुणन-संक्रिया में पूर्णांकों के क्रम को बदलने पर गुणनफल नहीं बदलता है, यह गुणन का क्रम विनिमेय नियम है।

अथवा

यदि a तथा b दो पूर्णांक संख्याएं हों तो a × b = b × a; यह गुणन संक्रिया का क्रम-विनिमेय प्रगुण कहते हैं।

उदाहरणार्थ:- (+4) × (-3) = -12

(-3) × (+4) = -12

शून्य का गुणन प्रगुण:- किसी पूर्णांक में शून्य से गुणा करने पर गुणनफल हमेशा शून्य होता है।

अथवा

यदि a कोई पूर्णांक संख्या हो तो a × 0 = 0 × a = 0; इसे शून्य का गुणन प्रगुण कहते है।

उदाहरणार्थ:- (-3) × 0 = 0

गुणन का तत्समक अवयव:- किसी पूर्णांक में 1 से गुणा करने पर गुणनफल वही पूर्णांक आता है।  इसीलिए एक को गुणन का तत्समक अवयव कहते हैं।

अथवा

यदि a कोई पूर्णांक संख्या हो, तो a × 1 = 1 + a = a , को गुणन का तत्समक अवयव कहते हैं

उदाहरणार्थ:- 5 × 1 = 5

योगात्मक प्रतिलोम क्या है? या योगात्मक प्रतिलोम किसे कहते हैं?

योगात्मक प्रतिलोम:- किसी भी धनात्मक पूर्णांक के संगत एक ऋणात्मक पूर्णांक होता है, जिसे एक दूसरे का योगात्मक प्रतिलोम कहते हैं।

उदाहरणार्थ:- पूर्णांक +a का योगात्मक प्रतिलोम -a होता है। जबकि पूर्णांक -a का योगात्मक प्रतिलोम +a होता है।

शून्य का योगात्मक प्रतिलोम क्या होता है?

शून्य का योगात्मक प्रतिलोम शून्य होता है।

योगात्मक प्रतिलोम कैसे निकाला जाता है?

योगात्मक प्रतिलोम निकालने का तरीका:- किसी पूर्णांक का ऋणात्मक अथवा योगात्मक प्रतिलोम प्राप्त करने के लिए उसमें -1 से गुणा करते हैं।

उदाहरणार्थ:- 5 का योगात्मक प्रतिलोम = 5 × (-1) = -5

(-23) का योगात्मक प्रतिलोम = (-23) × (-1) = 23

योग का साहचर्य प्रगुण:- यदि a , b तथा c कोई तीन पूर्णांक संख्याएं हो तो ( a × b ) × c = a × ( b × c) = a × b × c यह गुणन संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।

उदाहरणार्थ:- {(-2) × (+3)} × 5 = (-6) × 5 = -30

(-2) × {(+3) × (+5)} = (-2) × 15 = -30

गुणन संक्रिया का योग पर वितरण:- यदि a , b तथा c पूर्णांक संख्याएं हो, तो a × ( b + c) = a × b + a × c; इसे गुणन संक्रिया का योग पर वितरण प्रगुण कहते हैं।

अथवा

पहला पूर्णांक × ( दूसरा पूर्णांक + तीसरा पूर्णांक ) = पहला पूर्णांक × दूसरा पूर्णांक + पहला पूर्णांक × तीसरा पूर्णांक

उदाहरणार्थ:- -11 × (3+7) = -11 × 3 + (-11) × 7

गुणन संक्रिया का अंतर (घटाना) पर वितरण:- यदि a , b तथा c पूर्ण संख्याएं हो तो a × ( b – c) = a × b – a × c; इसे गुणन संक्रिया का अंतर (घटाना) पर वितरण प्रगुण कहते हैं।

अथवा

पहला पूर्णांक × ( दूसरा पूर्णांक – तीसरा पूर्णांक ) = पहला पूर्णांक × दूसरा पूर्णांक – पहला पूर्णांक × तीसरा पूर्णांक

उदाहरणार्थ:- 5 × (9-2) = 5 × 9 – 5 × 2

भाजक संख्या क्या है? अथवा भाजक संख्या किसे कहते हैं?

भाजक संख्या:- किसी भी संख्या में जिस संख्या से भाग दिया जाता है, उसे भाजक संख्या कहते हैं।

भाज्य संख्या क्या है अथवा भाज्य संख्या किसे कहते हैं?

भाज्य संख्या:- भाजक संख्या से जिस संख्या में भाग देते हैं, उसे भाज्य संख्या कहते हैं।

चार्ट बनाना है

पूर्णांकों में भाग संक्रिया:- 1. यदि भाज्य और भाजक समान चिन्हों ( अर्थात दोनों धन अथवा दोनों ऋण ) के हो तो भागफल धनात्मक होता है।

उदाहरणार्थ:- 20 ÷ 4 = 5

(-15) ÷ (-3) = 5

  1. यदि भाज्य और भाजक विपरीत चिन्हों के हो, तो भागफल ऋणात्मक होता है।

उदाहरणार्थ:- (-16) ÷ 4 = -4

42 ÷(-6) = -7

भाग संक्रिया के प्रगुण:- 1. यदि a और b दो पूर्णांक है तो  a ÷ b सदैव पूर्णांक नहीं होता है।

उदाहरणार्थ:- 17 ÷ 3 = ? (पूर्णांक नही है)

  1. किसी शून्येत्तर पूर्णांक में उसी पूर्णांक से भाग देने पर भागफल सदैव एक होता है।

अथवा

प्रत्येक शून्येतर पूर्णांक a के लिए a ÷ a = 1 होता है।

उदाहरणार्थ:- 8 ÷ 8 = 1

 

  1. किसी पूर्णांक में 1 से भाग देने पर भागफल वही पूर्णांक होता है।

अथवा

प्रत्येक शून्येतर पूर्णांक a के लिए a ÷ 1 = a होता है।

उदाहरणार्थ:- 19 ÷ 1 = 1

  1. प्रत्येक शून्येतर पूर्णांक a के लिए a ÷ (-1) = – a , a ÷ (-a) = -1 तथा (-a) ÷ a = – 1 है

उदाहरणार्थ:-  17 ÷ (-1) = -17

17 ÷ (-17) = -1

(-17) ÷ 17 = -1

  1. पूर्णांक शून्य में किसी शून्येतर पूर्णांक से भाग देने पर भागफल शून्य आता है।

अथवा

किसी शून्येतर पूर्णांक a के लिए 0 ÷ a = 0 है

उदाहरणार्थ:- 0 ÷ 15 = 0

  1. किसी पूर्णांक में शून्य ‘0’ से भाग परिभाषित नहीं है।

अथवा

a ÷ 0 परिभाषित नहीं है।

घातांक या घात की आवश्यकता:– प्रायः हमें एक संख्या को उसी संख्या से कई बार गुणा करना पड़ता है, जिसे लिखने या पढ़ने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसीलिए घातांक या घात की आवश्यकता पड़ी।

घातांक का शाब्दिक अर्थ:- घातांक का शाब्दिक अर्थ है- घात + अंक अर्थात घात के रूप मे लिख जाने वाला अंक।

पूर्णाकों के घात:- किसी संख्या को बार-बार लिखने तथा समय को सुरक्षित रखने हेतु, उस संख्या के ऊपर, वह संख्या लिखते हैं जितनी बार वो आया है, इस प्रकार उस संख्या के ऊपर लिखी जाने वाली संख्या को, घात कहते हैं।

घात को घातांक के नाम से भी जाना जाता है।

या

यदि an दिया हो तो a को आधार और n को घात कहते है।

Chart banana h

उदाहरणार्थ:- संख्याओं 5×5×5×5×5×5×5×5×5 को घातांक के रूप में लिखिए।

हल:- चूँकि संख्या 5 का गुणा 9 बार किया गया है।

अतः घातांक के रूप मे इसे 59 के रूप मे लिखते है।

स्मरणीय बिंदु:- 1. (-1)विषम धन पूर्णांक = – 1

  1. (-1)सम धन पूर्णांक = 1

कोष्ठकों की आवश्यकता:- गणित में जैसे-जैसे मानव की अभिरुचि बढ़ने लगी वैसे वैसे मानव के जीवन में  समस्याएं भी बढ़ने लगी। इन्हीं समस्याओं को हल करने के लिए कोष्ठकों का प्रयोग किया जाने लगा।

कोष्ठकों का प्रयोग क्यों करते हैं?

कोष्ठकों का प्रयोग:- गणना में अशुद्धियों से बचने के लिए कोष्ठकों का प्रयोग करते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण कोष्ठक निम्नलिखित हैं-

प्रतीक                         नाम

                  रेखा कोष्ठक

(   )                          छोटा कोष्ठक

{   }                          मँझला कोष्ठक

[   ]                           बड़ा कोष्ठक

 

रेखा कोष्ठक क्या है? या रेखा कोष्ठक किसे कहते हैं?

रेखा कोष्ठक:- कभी-कभी कोष्ठक के लिए एक अन्य प्रकार के प्रतीक ‘—’ का प्रयोग किया जाता है इसे रेखा कोष्ठक कहते है।

रेखा कोष्ठक को दंड कोष्टक भी कहा जाता है।

रेखा कोष्ठक का प्रयोग किस कोष्ठक में किया जाता है?

रेखा कोष्ठक का प्रयोग:- रेखा कोष्ठक का प्रयोग प्रायः छोटा कोष्ठक के अंदर किया जाता है।

किसी भी कोष्ठक का बायां और दायां भाग क्या व्यक्त करता है?

प्रत्येक कोष्ठक का बायां भाग कोष्ठक का प्रारंभ और दायाँ भाग कोष्ठक का अंत व्यक्त करता है।

कोष्ठकों का सरलीकरण कैसे किया जाता है?

कोष्ठकों का सरलीकरण  निम्न तरीके से किया जाता है-

1.क्रमानुसार रेखा कोष्ठक, छोटा कोष्ठक, मंझला कोष्ठक तथा बड़ा कोष्ठक हटाकर सरलीकरण की क्रिया की जाती है। नियम यह है कि कोष्ठक चाहे जिस क्रम में लगे हो सबसे पहले अंदर के कोष्ठक को क्रम से हटाकर क्रिया संपन्न की जाती है।

2.कोष्ठक के पूर्व ‘+’ चिन्ह होता है तो कोष्टक हटाने पर कोष्टक के अंदर ‘+’ और ‘-’ चिन्ह जैसे के तैसे रहते हैं।

  1. इसी प्रकार यदि कोष्ठक के पूर्व ‘-’ ऋण चिन्ह हो तो कोष्ठक के हटाने पर उसके अंदर के ‘+’ और ‘-’ चिन्ह एक दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। अर्थात धन ऋण बन जाता और ऋण धन बन जाता है।

4.यदि कोष्ठक के पहले या बाद में कोई संख्या हो और उस संख्या तथा कोष्ठक के बीच में कोई चिन्ह न हो तो वहां पर गुणा का चिन्ह समझना चाहिए।

  1. प्रत्येक कोष्ठक को हटाने से पूर्व उसके अंदर की संख्याओं का सरलीकरण कर लेना चाहिए।

बोडमास का नियम क्या है? या BODMAS Theory किसे कहते हैं? 

BODMAS Theory:-

B      =      Brackets               कोष्ठक          (   )

O     =      Of                          का                का

D     =       Division                भाग               ÷

M    =       Multiplication         गुणा              ×

A     =       Addition                योग               +

S     =       Substraction         घटाना/अंतर     –

 

कोष्ठकों के सरलीकरण में कोकाभागुयोघ नियम का पालन अधिक सुविधाजनक रहता है जहाँ

को      =      कोष्ठक

का      =      का

भा      =      भाग

गु       =      गुणा

यो      =      योग

घ       =      घटाना दाहरणार्थ:- (+9) + (-6) = +3 (एक पूर्णांक है।)

योग का क्रम-विनिमेय प्रगुण:- यदि a तथा b दो पूर्णांक हों, और a + b = b + a हो, तो यह योग संक्रिया का क्रम-विनिमेय प्रगुण हैं।

उदाहरणार्थ:- (-6) + (+2) = – 6 + 2 = – 4

(+2) + (-6) = 2 – 6 = – 4

योग का तत्समक अवयव:- यदि a कोई पूर्णांक हो , तो a + 0 = 0 + a = a अर्थात प्रत्येक पूर्णांक का शून्य के साथ योगफल उसी पूर्णांक के बराबर होता है। इसी कारण शून्य (0) को योग का तत्समक अवयव कहते हैं। यह शून्य का योग प्रगुण है।

उदाहरणार्थ:- (-13) + 0 = -13

योग का साहचर्य प्रगुण:- यदि a , b तथा c कोई तीन पूर्णांक हो, तो ( a + b ) + c = a + ( b + c) = a + b + c; यह योग संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।

उदाहरणार्थ:- {(+25) + (-5)} + (+7) =  (+25) + {(-5) + (+7)}

पूर्णांकों का घटाना:- यदि a तथा b पूर्णांक है तो a – b प्राप्त करने के लिए a में b का योगात्मक प्रतिलोम (-b) जो

इस लेख के बारे में:

आज की इस लेख के बारे में आपने पढ़ा की पूर्णांक संख्या किसे कहते है? और इसके बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त कर ली है। उम्मीद करता हूँ की आपको यह लेख अच्छे से समझ आ गया होगा। अगर इस लेख से जुड़े कोई सवाल या कुछ और पूछना चाहते है तो आप हमे comment  कर सकते है और अपने सवालों के जवाब हमारे Experts देंगे।

 

 

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