(B.A. 1st) निबन्ध किसे कहते हैं, प्रकार, विशेषताए | Nibandh kise kahate hain

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नमस्कार दोस्तों, allhindi.co.in के एक नए लेख में आपका स्वागत है। आज की इस नए लेख में आप जानेंगे कि निबन्ध किसे कहते हैं।तथा निबन्ध की पूरी विस्तृत जानकारी आपको इस लेख में प्राप्त होगी। इसके पिछले लेख में हमने भाषा और व्याकरण किसे कहते हैं इसके बारे में जाना था| तो आइए आज की इस लेख में हम जाने निबन्ध किसे कहते हैं और निबंध का क्या अर्थ होता है?

यह प्रश्न अक्सर स्नातक कर रहे  छात्र एवं छात्राओं के भी परिक्षाओं में पूछे जाते हैं यदि आप इस प्रश्न का उत्तर परीक्षा में लिखना चाहते हैं तो आप नीचे दिए गए हेडिंग्स के साथ इस प्रश्न का जवाब लिख सकते हैं? आइये जानते हैं की B.A. 1st year में किस तरह से इससे जुड़े सवाल प्रश्न पत्र में आते हैं

निबन्ध किसे कहते हैं

जब किसी विषय पर अच्छी तरह से जानकरी हासिल करने के बाद उसे क्रमवार तरीके से लिखा जाता हैं तो उसे निबंध कहते हैं। निबन्ध को अंग्रेजी में ‘एसे’ (Essay) के लिए प्रयोग किया जाता है। ‘एसे’ (essay) का अर्थ है- प्रयत्न या प्रयास, कहने का तात्पर्य यह है कि विचारों व भावनाओं की अभिव्यक्ति का प्रयास ही ‘निबन्ध’ है। अलग अलग विद्वानों ने निबंध की परिभाषाओं पर अलग अलग मत प्रस्तुत किये हैं|

निबन्ध किसे कहते हैं
निबंध किसे कहते हैं

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का मत है कि-‘निबन्ध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात् व्यक्तिगत विशेषता हो। “निबन्ध शब्द लेख और प्रबन्ध का पयार्य है।

 ‘डॉ 0 मातादीन शर्मा का मत है-‘ निबन्ध मानव अनुभूतियों का नीड़ है, जिसमें मानसिक विचारों और भावों को व्यक्त करने वाले विहंग कूकते हैं। वाक्यों की वह शृंखला, सुसंगठित रचना निबन्ध है जिसमें लेखक का व्यक्तित्व जल के अन्तस्थल में रविरश्मियों के बिम्ब-सा चमकता क्षण में प्रत्यक्ष और परोक्ष होता है-स्पष्टता सरलता और भाव से युक्त हो।” 

प्रो 0 जयनाथ नलिन ने निबन्ध पर विचार करते हुए लिखा है कि-‘ निबन्ध स्वाधीन चिन्तन और निश्छल अनुभूतियों का सरस, सजीव और मर्यादित गद्यात्मक प्रकाशन है।

“निबन्ध किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है और अपने अभीष्ट विषय के सम्बन्ध में विचार व्यक्त करने की लेखक को पूरी स्वतन्त्रता रहती है। जैसा कि विलियम हेजलिट ने लिखा है कि ‘ निबन्धकार का काम यह दिखाना नहीं है जो कभी हुआ नहीं, न ही उसका प्रस्तुतीकरण करना, जिसका हमने सपना भी नहीं देखा, बल्कि वह दिखाना है जो रोज हमारी आंखों के सामने से गुजरता है और जिसके बारे में हम ख्याल भी नहीं करते क्योंकि हमारे पास यह अर्न्तज्ञान नहीं होता या बुद्धि की वह पकड़ नहीं होती जो उन्हें सम्भाल सके।”

निबंध का अर्थ

निबन्ध शब्द पूर्ण रूप से स्वदेशी है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है। नि + बन्ध ‘जिसका अर्थ होता है एकत्रीकरण अथवा बाँधना।’ अमरकोश ‘में भली प्रकार बँधी हुई रचना को निबन्ध कहा गया है। वास्तव में निबन्ध अपने वास्तविक अर्थ के विपरीत एक बन्धहीन विधा है।

निबन्ध के सम्बन्ध में निम्नलिखित कुछ निष्कर्ष

  1. निबन्ध विचारपूर्ण रचना है, किन्तु इसमें हृदय की भाव सत्ता का ही साम्राज्य होता है। 
  2. निबन्ध आधुनिक गद्य की एक विधा है जिसका प्रारम्भ अंग्रेजी निबन्धों के प्रभाव के फल स्वरुप हुआ। संस्कृत निबन्ध परम्परा से उसका सम्बन्ध नहीं है।
  3. लेखक के व्यक्तित्व के अनुरूप निबन्ध शिथिल, व्यतिक्रम हो सकता है तथा व्यवस्थित, सुसम्बद्ध एवं सुगठित भी। 
  4. निबन्ध में लेखक का निजीपन या व्यक्तित्व निश्चित रूप से विशिष्टता व्यक्त करता है किन्तु उसके विषय के निरुपण में कोई बाधा नहीं पड़ती। 
  5. निबन्ध में संक्षिप्तता, लघुता और पूर्णता होती है।
  6. रोचकता, सजीवता, भाषा की प्रौढ़ता और शैली की प्राञ्जलता निबन्ध के लिए आवश्यक है। 
  7. निबन्ध का विषय सीमित नहीं होता है। किसी भी विषय पर निबन्ध रचना की जा सकती है।
  8. निबन्ध का उद्देश्य है, अल्प समय में, संक्षिप्त रूप में विषय के प्रति लेखक के भावुक हृदय की सहज प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति।

निबन्ध के प्रकार

विषय शैली और लेखक के दृष्टिकोण के विचार से निबन्ध को कई प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है। निबन्ध मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं

  1. विचारात्मक
  2. वर्णनात्मक
  3. आत्मव्यजक
  4. भावात्मक
  5. कथात्मक

विचारात्मक निबन्ध किसे कहते हैं

किसी प्रतिपाद्य विषय का विवेचन जिसमें लेखक अनेक तर्कों और दृष्टान्तों द्वारा किसी सिद्धान्त की सत्यता का प्रतिपादन करता है, उसे विचारात्मक निबन्ध कहते हैं। इसका सम्बन्ध मुख्यतया बुद्धि से होता है, किन्तु बुद्धि के साथ-2 हृदय की सरसता का योग होता है। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ऐसे निबन्ध को शुद्ध साहित्यिक निबन्ध मानते हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और डॉ 0 श्याम सुन्दरदास के निबन्ध इसके उदाहरण हैं।

वर्णनात्मक निबन्ध किसे कहते हैं

वर्णनात्मक निबन्धों में लेखक अपने द्वारा देखी गयी या सुनी हुई वस्तुओं स्थिति प्रकृति या कृति को वर्णन द्वारा पाठकों तक पहुँचाता है। यात्रा, समारोह, स्थान, मेले और दृश्य आदि पर लिखे गये निबन्ध इसी श्रेणी में आते हैं। वर्णनात्मक निबन्धों में सूक्ष्म और अन्तर्भेदी दृष्टि होती है। इस प्रकार के निबन्धों में संश्लिष्ट, सांगोपांग, यथार्थ और विवरणपूर्ण वर्णन होता है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें स्पष्टता और व्यापकता होती है। इसमें शब्दों का उचित प्रयोग होता है।

भावात्मक निबन्ध किसे कहते हैं

निबन्ध-भावात्मक निबन्धों में लेखक अपने हर्ष प्रेम, विस्मय आदि भावों की अभिव्यक्ति करता है। किसी स्थान विशेष में उसकी जो मन स्थिति होती है, उसका चित्रण करता है। भावों की तीव्रता या कमी के कारण ही लेखक की भाषा में वेग या शिथिलता आती है। आचार्य शुक्ल ने इसी के अन्तर्गत विक्षेप या प्रलाप शैली को भी स्थान दिया है। जिसका दर्शन हमें गद्यकाव्य में

होता है। राजकुमार डॉ 0 रघुबीर सिंह, माधव प्रसाद मिश्र, रायकृष्णदास पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी आदि रचनाकारों के निबन्ध इसी श्रेणी आते हैं। सरदार पूर्ण सिंह के निबन्ध भावात्मक निबन्धों के श्रेष् उदाहरण हैं।

कथात्मक निबन्ध किसे कहते हैं

4. -यात्रा वर्णन, जीवन चरित्र आदि क गणना कथात्मक निबन्ध में की जाती है। कथात्मक निबन्धों की रचन किसी कथा को लेकर होती है इनको कहानी की संज्ञा नहीं दी ज सकती, क्योंकि कथात्मक निबन्धों का कोई उद्देश्य नहीं होता-होता और कहानी का कुछ उद्देश्य होता है। पद्म सिंह शर्मा के निबन्ध इस निबन्ध भेद के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

आत्म व्यंजक निबन्ध किसे कहते हैं

लेखक अपने व्यक्तित्व का पू प्रतिनिधित्व एवं अभिव्यक्ति आत्मव्यंजक निबन्ध में करता है आत्मव्यंजक निबन्ध का विषय कुछ भी हो सकता है। किसी भी विषय को आत्म व्यंजक निबन्ध का विषय बनाया जा सकता है। इस प्रकार के निबन्धों में सौन्दर्य विद्यमान होता है, इसका श्रेय लेखक क व्यक्तित्व को जाता है।

इस प्रकार के निबन्धों के जनक कहे जाने वाले माण्टेन ने लिखा है-“I an the subject of the my essays throughly ।” because I my self an the only Person whom I know सबसे अधिक आत्मव्यंजक निबन्धों की रचना भारतेन्दु युग में हुई है। पं 0 प्रताप नारायण मिश्र, हजारी प्रसाद द्विवेदी, पदुमलाल निबन्ध इसके उदाहरण हैं। पुन्नालाल बख्शी, सियाराम शरण गुप्त आदि साहित्य कारों के निबन्ध इसके उदाहरण हैं।

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