एसेट्स क्या होता है | Asset Kya Hota Hai

जीवन में हम सभी धनी होना चाहते हैं और बीते हुए समय में बहुत सारे धनी व्यक्ति एसेट्स को जोड़ कर धनी हुए हैं लेकिन क्या आप जानते है की एसेट्स क्या होता हैं ( Asset Kya Hota Hai ) आइये आज की इस लेख में हम जानेंगे की एसेट्स क्या होता है इसकी क्या विशेषताएं होती हैं?

एसेट्स क्या होता है | Asset Kya Hota Hai

एसेट्स क्या होता है ( Asset Kya Hota Hai )

आमतौर पर हम उन सभी चीजों को Assets कह सकते हैं जिनसे फ्यूचर में कम समय या अधिक समय में हम धन कमा सकते हैं।

एसेट्स वह स्रोत है जिसके द्वारा हम अपने खर्च को कम कर सकते हैं और लाभ को बढ़ा सकते हैं जिससे हमारा कैशफ्लो अच्छा बना रहता है।

एसेट्स की विशेषताएं [ Assets Ki Visheshtayen ]

  • किसी कंपनी के भूमि एसेट्स को किसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक पूंजी के लिए बेचा जा सकता है।
  • किसी कंपनी के मशीनरी एसेट्स एक संसाधन के रूप में होता है, जो किसी कंपनी के लिए आर्थिक लाभ उत्पन्न कर सकती है।
  • प्रत्येक मशीनरी एसेट्स का एक कीमत होता है, और इस एसेट्स को बाजार में एक्सचेंज या बेचा जा सकता है।
  • ज्यादातर मशीनरी संपत्तियों के रखरखाव एवं मरम्मत करने से यह व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है।

एसेट्स कितने प्रकार के होते हैं ? ( ASSETS KITNE PRAKAR KE HOTE HAIN )

एसेट्स के मुख्य रूप से तीन उप श्रेणियां होते हैं-

  • परिवर्तन के आधार पर‌ (Based On Convertibility)
  • भौतिक अस्तित्व के आधार पर (Based On Physical existence)
  • उपयोग के आधार पर (Based On Usage)

परिवर्तन के आधार पर‌ (Based On Convertibility)

इस उप श्रेणी में ऐसे एसेट्स आते हैं जो जिनको आसानी से नगदी में बदले जा सकते हैं। इस उप श्रेणी के आधार पर एसेट्स दो प्रकार के होते हैं-

  • Current assets
  • Fixed assets

Current Assets Kya Hota Hai ( करंट ऐसेट क्या होता है )

यह ऐसे assets होते हैं जिन्हें हम 1 साल के अंदर कभी भी तुरंत कैश में कन्वर्ट कर सकते हैं।इन्हें शॉर्ट टर्म एसेट्स या लिक्विड एसेट्स भी कहते हैं। जैसे: स्टॉक्स इन्वेंटरीज, मार्केटेबल सिक्योरिटीज, अकाउंट रिसिवेबल, प्रीपेड एक्सपेंस आदि।

किसी भी कंपनी के करंट एसेट्स को देखकर हमें यह समझ में आता है कि उस कंपनी में लिक्विडिटी यानी कैश फ्लो कितना है।

Fixed assets Kya Hota Hai [ फिक्स्ड ऐसेट क्या होता है ] 

यह ऐसे assets होते हैं जिन्हें एक निश्चित समय के लिए कहीं पर फिक्स कर दिया जाता है, जिसे तुरंत कैश में कन्वर्ट नही कर सकते। जैसे: लैंड, मशीनरी इक्विपमेंट्स, बिल्डिंग, पेटेंट, ट्रेडमार्क्स आदि। Fixed assets को लॉन्ग टर्म एसेट्स भी कहा जाता है।

करंट एसेट्स  और फिक्स्ड एसेट्स  में क्या अंतर है ( Current Assets or Fixed Asset Mein Kya Antar  Hai )

करंट एसेट्स फिक्स्ड एसेट्स 
ऐसे एसेट्स  जिन्हें कभी भी कैश के रूप में कन्वर्ट किया जा सके, करंट एसेट्स  कहलाते हैं।ऐसे एसेट्स  जिन्हें कैश के रूप में तुरंत कन्वर्ट नहीं किया जा सके, फिक्स्ड एसेट्स  कहलाते हैं।
करंट एसेट्स  को शॉर्ट टर्म एसेट्स  या लिक्विड एसेट्स  कहा जाता है।फिक्स्ड एसेट्स  को लॉन्ग टर्म एसेट्स  कहा जाता है।

भौतिक अस्तित्व के आधार पर (Based On Physical existence)

इस उप श्रेणी में ऐसे असेट्ज आते हैं जो भौतिक रूप में उपस्थित भी होते हैं और अनुपस्थित भी हो। इस उप श्रेणी के आधार पर एसेट्स दो प्रकार के होते हैं-

  • Tangible assets
  • Intangible assets

टैंगिबल असेट्स क्या होता है ( Tangible Assets Kya Hota Hai )

यह ऐसे assets होते हैं जिन्हें हम छू सकते हैं और देख सकते हैं। लैंड, बिल्डिंग, इक्विपमेंट, इन्वेंटरीज, मशीन आदि।

इंटेंजिबल एसेट क्या होता है (Intangible Assets Kya Hota Hai )

ऐसे assets जीने हम छू नहीं सकते और ना ही देख सकते हैं परंतु अपने आसपास महसूस कर सकते हैं। जैसे: गुडविल, पेटेंट्स, कॉपीराइट्स, परमिट्स आदि।

उपयोग के आधार पर (Based On Usage)

इस उप श्रेणी में ऐसे एसेट्स आते हैं किसी कंपनी या व्यक्ति के द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं। इस उप श्रेणी के आधार पर एसेट्स दो प्रकार के होते हैं-

  • Operating Assets
  • Non-Operating Assets

ऑपरेटिंग एसेट क्या होता है (Operating Assets Kya Hota Hai )

ऐसे assets है जिससे कंपनी को डायरेक्ट कमाई होती है, जिससे किसी कंपनी का ऑपरेटिंग चलता है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए कोई कंपनी है जो किसी प्रोडक्ट का उत्पादन कुछ मशीनों के द्वारा करती है तो उस कंपनी के लिए वह मशीन ऑपरेटिंग एसेट्स  होती है क्योंकि उस मशीन की वजह से ही उस कंपनी के प्रोडक्ट बनते हैं और उसकी सेल से कंपनी कमाई करती है।

नॉन ऑपरेटिंग असेट्स क्या होता है ( Non-operating Assets Kya hai )

किसी कंपनी के द्वारा प्रतिदिन एसेट्स की कमाई करना तो संभव नहीं है। यह ऐसे assets होते हैं जिसमे कंपनी को कुछ ऑपरेट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है, यह कुछ अलग तरह कमाई करके देते हैं।

मान लीजिए किसी कंपनी में कोई एफडी करा कर रखी है तो उसका जो भी इंटरेस्ट इनकम होगा तो वह उनका non-operating assets होगा क्योंकि उनका काम फिक्स डिपॉजिट करने का नहीं है उनका काम मशीन के द्वारा किसी प्रोडक्ट का उत्पादन करना तो यह एफडी पर इंटरेस्ट उनका non-operating assets है।

प्रश्न: एसेट का मतलब क्या होता है?

उत्तर: एसेट का हिंदी में अर्थ सम्पत्ति होता है।

प्रश्न: एसेट्स में क्या-क्या आता है।

उत्तर: हर वह चीज जो भविष्य में आपको लाभ दे सकती है, वह सारी चीजें एसेट में आती है।

प्रश्न: टोटल पर्सनल एसेट्स से क्या मतलब है?

€उत्तर: टोटल पर्सनल एसेट्स का अर्थ किसी व्यक्ति के निजी व व्यक्तिगत संपत्ति से होता है जैसे उस व्यक्ति का घर, उसके नाम से बैंक अकाउंट। हर वो चीज जो सिर्फ आप के नाम पर हो।

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