Uttak Kya Hai |उत्तक क्या है

नमस्कार दोस्तों, allhindi.co.in के एक नए लेख में आपका स्वागत है। हमारी शरीर की संरचना ऊतकों से हुई है । क्या आप जानते है उत्तक क्या है और यह सजीवों में उत्तक किस प्रकार से कार्य करता है। आइए इन सभी के बारे में जानते है सबसे पहले हम जानते है की उत्तक क्या है?

उत्तक क्या है | Uttak Kya Hai

किसी एक ही प्रकार की कोशिकाओं के समूह को उतक कहते हैं, ये कोशिकाएँ कार्य तथा संरचना में समान होती हैं। . शरीर तथा आन्तरांगों का अपने बाहरी आवरण के ही आर–पार होता है। उपकला ऊतक उत्सर्गों के विमोचन में सहायता करते हैं।

उत्तक के प्रकार:

जन्तु उतक चार प्रकार के होते हैं।

  • उपकला ऊतक
  • संयोजी ऊतक
  • पेशी ऊतक
  • तंत्रिका ऊतक

प्रत्येक प्रकार के ऊतक के ऊतकों को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है ।

उपकला ऊतक क्या हैं

उपकला ऊतक (Epithelial tissue)– प्राणियों के शरीर की बाहरी सतह और शरीर के अंदर स्थित विभिन्न अंगों के बाहरी तथा भीतरी सतह का निर्माण करने वाले उत्तक को उपकला उत्तक कहते हैं। इन ऊतकों क नाम डच वैज्ञानिक रयूश (ruysch) ने 18 वीं शदी में दिया था। उपकला मुख्यतः शरीर एवं आन्तरांगों के लिए सुरक्षात्मक आवरण बनाती हैं।

अर्थात से ऊतकों की कोशिकाओं को चोट से हानिकारक दार्थों, बैक्टीरियल संक्रमण आदि से बचाती हैं। वातावरण से पदार्थों का विनिमय एपीथीलियमी कुछ उपकला ऊतक स्रवण का कार्य भी करती हैं, वे विभिन्न प्रकार के पदार्थों लार, एन्जाइम आदि का स्रवण करते हैं। इनमें पुनरूत्पादन की बहुत क्षमता होती है, इस प्रकार यह धावों को भरने का क करती हैं।

संयोजी ऊतक क्या हैं?

संयोजी ऊतक पूरे शरीर में सबसे अधिक पाये जाते हैं, शरीर का लगभग 30 प्रतिशत भाग संयोजी उतकों का होता है। ये प्रत्येक अंग के भीतर तथा बाहर और विभिन्न अंगों के बीच में पाये जाते हैं, अंगों के बीच चारों ओर पैकिंग बना कर शरीर के विभिन्न अंगों को आधार प्रदान करके उन्हें सहारा देना तथा उन्हें परस्पर जोड़े रखने का कार्य करते हैं।

पेशीय उतक क्या हैं?

पेशी उतक: पेशीय ऊतक संकुचनशील तन्तुओं से मिलकर बना होता है। यह शरीर तथा शरीर के किसी भाग में गति प्रदान करते समय का कार्य करता है। इस ऊतक की एक विशेषता है कि यह उत्तेजित होन संकुचित हो जाता है। अर्थात इसमें उत्तेजनशीलता, चालकता तथा लचीलेपन का गुण भी होता है।

तंत्रिका ऊतक क्या हैं

यह ऊतक विशेष रूप से शरीर के बाहर एवं अन्दर से संवेदनाओं को ग्रहण करता है तथा प्रेषित करता है। तंत्रिका ऊतक, तंत्रिका कोशिका तथा उनके प्रवर्धित तन्तुओं मिलकर बनते हैं। इन्हें न्यूरॉन कहते हैं। न्यूरॉन ही तंत्रिका ऊतक की कार्यात्मक तथा रचनात्मक इकाई होती है। प्रत्येक तंत्रिका कोशिका में निम्नलिखित दो भाग होते हैं।

उपकला ऊतक के गुण–

उपकला ऊतक की कोशिकाएँ एक दूसरे सटी रहती हैं। इनकी कोशिकाओं के बीच कम स्थान होता है। विभिन्न उपकला ऊतकों की संरचना भिन्न होती है। उपकला ऊतक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।

उपकला ऊतक निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

1. शल्की उपकला (Squamous epithelium)
2. घनाभ उपकला (Cuboidal epithelium)
3. स्तम्भाकार उपकला (Columnar epithelium)
4. पक्ष्मामी उपकला (Ciliated epithelium)

शल्की उपकला ऊतक के कार्य: ये अत्यअधिक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल अस्तर का निमार्ण करती हैं।
आहारनली तथा मुँह का अस्तर शल्की एपिथीलियम से ढका रहता है। शरीर का रक्षात्मक कवच इन्हीं शल्की एपिथीलियम से बना रहता है।

धनाभ उपकला ऊतक के कार्य: घनाकार उपकला उतक वृक्कीय नली तथा लार ग्रंथि की नली के अस्तर का र्निमाण करती हैं, तथा उसे यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं। ये उपकला ऊतक पदार्थों का स्रावण करने में सक्षम होती हैं।

पक्ष्माभी उपकला ऊतक के कार्य: श्वास नली में स्तंभाकार उपकला ऊतक में (cilia) पक्ष्माभ होते हैं ये गति कर सकते हैं।

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संयोजी ऊतक के प्रकार

उत्तक क्या है | Uttak Kya Hai

1. गर्तिकामय संयोजी ऊतक (areolar connective tissue)
2. सघन नियमित संयोजी ऊतक (dense regular connective tissue)
3 वसामय ऊतक (adipose tissue)
4 कंकाली ऊतक (skeletal tissue)
5 तरल संयोजी ऊतक (fluid tissue)

कंकाली ऊतक में उपास्थि और अस्थि शामिल होते हैं। जो कशेरुकी देह का अंतःकंकाल बनाते हैं। उपास्थि यह एक विशिष्ट संयोजी ऊतक है। इसका मैट्रिक्स प्रोटीनों का बना होता है। यह कर्णपालि, नासिकाग्र एपीग्लॉटिस पसलियों के निचले सिरों आदि स्थानों पर पाई जाती है।

यह शरीर के अंगों लचीलापन प्रदान करती तथा जोड़ो के पृष्ठ को चिकना बनाती है। अस्थि यह अत्यअधिक मजबूत तथा लोचरहित ऊतक है। यह सरंध्र, अत्यअधिक संवहनी, खनिजयुक्त, कठोर तथा दृढ़ होती है। यह शरीर को आकृति प्रदान करती है तथा आधार का निर्माण करती है। हृदय, फेफडे आदि को सुरक्षित रखने का कार्य भी करती है तथा पेशियों को आधार प्रदान करती है।

रुधिर यह एक तरल संयोजी ऊतक है यह प्लाज्मा और रूधिर कणों से मिलकर बना होता है। प्लाज्मा एक निर्जीव तरल पदार्थ है जिसमें रक्त कणिकाएँ तैरती रहती है। प्लाज्मा पीले रंग का क्षारीय पारदर्शक तरल पदार्थ है। यह रक्त का लगभग 55 प्रतिशत भाग बनाता है।

इसमें से 90 प्रतिशत भाग तक जल तथा शेष भाग में कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ पाये जाते हैं। कार्बनिक पदार्थों में प्लाज्मा प्रोटीन होते हैं, जो मुख्यतः एल्ब्यूमिन ग्लोब्यूलिन तथा प्रोथ्रोम्बिन के रूप में होते हैं। ग्लोब्यूलिन एण्टीबॉडीज का काम करते हैं और विषैले पदार्थों वाइरस और जीवाणुओं को नष्ट करने का कार्य करते हैं।

प्रोथ्रोम्बिन रक्त का थक्का जमाने का कार्य करते हैं। रक्त कणिकाएँ प्लाज्मा के अतिरिक्त शेष 40 से 50 प्रतिशत भाग रूधिराणाओं का बना होता है। मनुष्य के रक्त में निम्नलिखित प्रकार की रक्त कणिकाएँ पाई जाती हैं

1. लाल रक्त कणिकाएँ 2. श्वेत रक्त कणिकाएँ 3. रूधिर प्लेटलेट्स

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